Friday, January 30, 2015

हमारे देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं- मा0 राज्यपाल

जीवन में सफलता के चार मन्त्र अपनाने पर दिया जोर
05 डी लिट, 107 मेडल, 81 एमफिल तथा 495 पीएचडी उपाधि प्रदान की
   जो समाज अपने इतिहास को भूलता है और वर्तमान का ख्याल नहीं करता है तो ऐसा समाज विकास नहीं कर सकता है। हमारे पास प्रतिभा की कोई कमी नही है जरूरत है प्रतिभाओं को निखारने की, जिससे देश के लिए उपयोग हो। स्वास्थ्य लाभ के लिए विदेशों में जाते है लेकिन वहां पर इलाज करने वाले अधिकतर डाॅक्टर व नर्स तो भारतीय ही मिलते है। भारतीय विद्यार्थियों में प्रतिभा है। इस प्रकार की स्पर्धा में आगे बढ़ाने की जरूरत है।
     प्रदेश के मा0 राज्यपाल रामनाईक ने आज डा0 बी0आर0 अम्बेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित 80 वें दीक्षांत समारोह को कुलाधिपति के रूप में सम्बोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए चार मंत्र अपनाये जायें तो वह व्यक्ति निश्चित रूप से प्रगति कर सकता है। उन्होंने सफलता के चार मंत्रों में बताया कि विशेष परिस्थितियों को छोड़कर सदैव मुस्कराते रहना चाहिए, दूसरा यदि कोई अच्छा कार्य करता है तो उसे अच्छा कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करें, तीसरा किसी की अवमानना मत करो, इंसान को अंहकार बहुत जल्दी हो जाता है और जो कोई व्यक्ति दूसरे को छोटा दिखाने की कोशिश करता है वह आगे नही बढ़ सकता है। चैथा मंत्र है आप जो भी करते हो उसे और अधिक अच्छा करने की चाह करें अर्थात जो अधिक अच्छा करता है वही आगे बढ़ता है।
     मा0 राज्यपाल ने कहा इस विश्वविद्यालय की परम्परा रही है कि यहां से एक से बढ़कर एक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, चै0 चरण सिंह तथा पूर्व राष्ट्रपति डा0 शंकर दयाल शर्मा जैसे अच्छे विद्यार्थी इस वि0वि0 से निकले है जिन्होने भारत देश का नाम रोशन किया है। इस पर हर विद्यार्थी को गर्व होना चाहिए।
     उन्होंने छात्रों की संख्या के दो गुनी छात्राओं के आगे बढ़ने पर बधाई दी और छात्रों से कहा कि स्पर्धा को प्राप्त करने के लिए उन्हे कड़ी मेहनत करनी होगी। उन्होंने गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से कहा कि आपकी एक किताबी पढ़ाई पूरी हुयी है, अब आगे चलकर जीवन की पढ़ाई करनी है अब नये क्षेत्र में जा रहे हैं, आगे बहुत स्पर्धा आपके सामने है जो खुले जगत में करनी पड़ेगी इसलिए अपना व्यक्तित्व सुधारने की हमेशा, कोशिश करते रहना चाहिए। उन्होने क्षेष्ठतम विद्यार्थियों को 05 डी0लिट, 81 एमफिल, 107 मेडल तथा 495 पीएचडी की उपाधि प्रदान करते हुए सुखद भविष्य की कामना की।
     दीक्षान्त समारोह के मुख्य अतिथि पदम श्री एम0एस0 सोढ़ा ने सम्बोधित करते हुये कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात इस प्रकार करनी चाहिए जो दूसरों की अच्छी तरह समझा 
सके। यदि व्यक्ति में बौद्विक क्षमता है तो वह दूसरे क्षेत्रों में भी सफल हो सकता है। उन्होंने उद्यमशीलता को बढावा देने पर जोर देते हुये कहा कि ऐसा करने से अन्य लोगो को भी नौकरी
मिलने में आसानी रहेगी। उन्होंने उच्च शिक्षा क्षेत्र में पुर्नविचार की अपेक्षा करते हुये कहा कि यदि यथास्थिति अपनाएंगे तो आने वाली पीढीयां कभी माफ नहीं करेंगी।
     दीक्षांत समारोह के विशिष्ट अतिथि प्रो0 रमाशंकर कठेरिया ने कार्यक्रम को समबोधित करते हुये कहा कि यह विश्वविद्यालय आगरा जैसे नगर में बहुत पुराना विश्वविद्यालय है इसकी गरिमा ने सदैव बढ़ती ऊंचाई प्राप्त की है। देश के सामने चुनौतियां बहुत है। जिसमें वि0वि0 की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि जब प्राथमिक शिक्षा ठीक हो जायेगी तो निश्चित रूप से बहुत कुछ ठीक हो सकता है। उन्होंने कहा कि अध्यापकों की कमी जब तक बनी रहेगी तब तक अच्छे छात्रों की कल्पना करना कठिन है और जब अच्छे छात्र नही होंगे तो अच्छे समाज की कल्पना करना भी कठिन होगा। उन्होंने कहा कि हमारे सामने उच्च शिक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के साथ ही हमारी शिक्षा व्यवस्था कैसे ठीक हो, की चुनौती है, जिसके लिए हम सभी को समग्रता की ओर सोचना होगा। उन्होंने कहा कि छात्रों में प्रतिभा की कमी नही है देश को आगे बढाने के लिए लोगों की सोच बदला है। उन्होंने कहा कि भारत देश की सवा सौ करोड़ आबादी के ढ़ाई सौ करोड़ हाथ बढ़ेगे तो निश्चित रूप से देश की व्यवस्था  में परिवर्तन आयेगा। 
     कुलपति प्रो0 मोहम्मद मुजम्मिल ने दीक्षान्त समारोह में मा0 राज्यपाल को शाॅल एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।कार्यक्रम में महापौर इन्द्रजीत आर्य, विधायक छोटेलाल वर्मा, मण्डलायुक्त प्रदीप भट्नागर, जिलाधिकारी पंकज कुमार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश डी मोदक सहित विश्वविद्यालय परिवार के समस्त प्रोफेसर एवं उपाधि प्राप्त करने वाले श्रेष्ठतम विद्यार्थी भी उपस्थित थे।