Friday, September 18, 2015

सौभाग्य के लिए हरतालिका तीज व्रत

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथिको हस्त नक्षत्र में हरतालिका तीज मनायी जाती है। इस तिथि को महिलायें भगवान शिव और माता पार्वती का विधि-विध न से पूजन करके सौभाग्य के लिए कामना करती हैं। भविष्योत्तर पुराण के अनुसार जो महिलायें हरतालिका तीज व्रत करती हैं उन्हें जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। हरतालिका तीज को बूढ़ी तीज भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन विवाहित महिलायें महिलाओं को उनकी सास सुहाग का सिंधारा देती हैं और महिलाये अपनी सास के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।
ऐसे करे पूजा 
हरतालिका तीज वाले दिन महिलाओं को चाहिए कि वे संध्या काल में स्नान करके धुले हुए वस्त्र धारण करें और पीली व पवित्र मिट्टी से पार्वती और शिव की प्रतिमा बनाकर उनका पूजन सामिग्री से श्रद्धा भाव से पूजन करें। पूजन के उपरान्त एक सुहाग की पिटारी में सुहाग की समस्त वस्तुएं रखकर माता पार्वती के समक्ष चढ़ाना चाहिए और फल, मिष्ठान और पकवान आदि का भोग लगाना चाहिए।इसके अलावा भगवान शिव को धोती और अंगोछा चढ़ाना चहिये।  तत्पश्चात सुहाग पिटारी को किसी भी ब्राह्मण स्त्री को तथा धोती और अंगोछा किसे ब्राह्मण को दान करके उनका शुभ आशीर्वाद लेना चाहिए। सौभाग्यवती महिलाओं को इस दिन व्रत खोलने से पूर्व अपनी सासु मां को अपनी श्रद्धानुसार मिष्ठान, फल और व्यंजन आदि और कुछ धनराशि देकर उनके चरण स्पर्श करना चाहिए। इस प्रकार किये गए व्रत-विधान से माता पार्वती और भगवान शिव की कृपा से सौभाग्य सुख मिलता है।
हरतालिका तीज व्रत कथा 
हरतालिका तीज व्रत के सम्बन्ध में जो कथा प्रचलित है उसके अनुसार भगवान शिव ने पार्वती को उनके पूर्वजन्म का स्मरण कराने के उद्देश्य से इस व्रत के माहात्म्य की कथा कही थी। पूर्वजन्म में भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए गौरी ने हिमालय पर्वत पर गंगा के तट पर बाल्यावस्था में कठोर तप किया था। जिससे उनके पिता गिरिराज को बहुत कष्ट होता था। एक दिन नारद मुनि गौरी के पिता के घर आये और उन्होंने गिरिराज से कहा कि भगवान विष्णु ने गौरी की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके साथ विवाह करने का प्रस्ताव भिजवाया है। नारदजी की बात सुनकर गिरिराज तो प्रसन्न हुए परन्तु गौरी ने विवाह प्रस्ताव से मना करते हुए कहा कि उन्होंने तो भगवान शिव को ही अपने पति के रूप में वरण किया है इसलिय वे किसी और से विवाह करने के बारे में सोच भी नहीं सकती।
गौरी की एक सखी के कहने पर गौरी ने अपने पिता का घर त्याग दिया और एक गुफा में भगवान शिव की उपासना में लीन हो गयी। गौरी ने गंगा की रेत से शिवलिंग का निर्माण करके व्रत किया और रात्रि में जागरण करते हुए शिव का स्तुतिगान किया। गौरी द्वारा की गयी पूजा-अर्चना से भगवान शिव प्रसन्न होकर उनके समक्स प्रकट हुए और उनसे वर मांगने को कहा। गौरी ने भगवान शिव को ही अपने पति के रूप में मांग लिया। शिव के अंतर्ध्यान होने के बाद गौरी ने समस्त पूजा सामिग्री को गंगा में अर्पित करके व्रत का पारण किया। गौरी के पिता को जब उनकी तपस्या के बारे में जानकारी हुयी तो उन्होंने गौरी का विवाह भगवान शिव के साथ करने की सहर्ष अनुमति प्रदान करदी। समय आने पर शास्त्रोक्त विधि से भगवान शिव के साथ गौरी का विवाह संपन्न हो गया।
जिस दिन गौरी ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए व्रत और उपवास किया था उस दिन भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि थी। तभी से ये तिथि हरतालिका तीज व्रत के रूप में मनई जाती है।
व्रत का माहात्म्य 
पुराणों के अनुसार जो सौभाग्यवती महिलाये इस व्रत को विधि-विधान से करती हैं उनका वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहता है। वहीं जो अविवाहित युवतियां इस व्रत को करके उपवास रखती हैं, उन्हें मनवांछित वार की प्राप्ति होती है तथा उनका विवाह भी शीघ्र होता है। इस व्रत को सभी महिलाये कर सकती हैं।  --- प्रमोद कुमार अग्रवाल


Thursday, September 10, 2015

वास्तु के अनुसार लगाएं बोनसाई पौधे

अपने पर्यावरण को हरा-भरा और प्रदूषणमुक्त बनाये रखने के लिए पेड़-पौधों का बड़ा महत्त्व है। इनके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। परंतु जगह की कमी को देखते हुए आज के समय में घर, कार्यालय, भवन, फैक्टरी, काम्प्लेक्स, पिकनिक स्पॉट, पार्क और चौराहों, मल्टी स्टोरी बिल्डिंग आदि में गमलों में पेड़-पौधे लगाने का चलन बढ़ता जा रहा है। ऐसे बड़े पेड़-पौधे जिन्हें विशेष तकनीक के द्वारा गमलों में लगाया जाता है, बोनसाई पौधे कहलाते हैं। इन पौधों की ऊंचाई और फैलाव बहुत कम होता है, परंतु इनमें फल और पुष्प आदि सामान्य पौधों के समान ही प्राप्त किये जा सकते हैं।
वास्तु दोषों के निवारण के लिए लगाएं बोनसाई पौधे 
वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार अगर आवासीय भवन और कार्यालयों में बोनसाई पौधे लगाए जा रहे हों तो इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि उन्हें पर्याप्त खाद और सूरज की धूप मिलती रहे। क्योंकि इन पौधों के लिए विशेष देखरेख की आवश्यकता होती है। बोनसाई पौधों की समुचित वृद्धि के लिए इनमें सड़ने वाली रेशेदार वनस्पति, गिरे हुए कोमल पत्ते, नीम की खली, गोबर से बनी खाद का प्रयोग ही करना चाहिए। कीटनाशक दवाओं और रासायनिक खाद के प्रयोग से बचना चाहिए। सही देखरेख के साथ उचित दिशा में लगाए गए बोनसाई पौधे भवन में सकारात्मक ऊर्जा देते हैं और वास्तु दोषों का निवारण भी करते हैं।
शुभ और अशुभ पौधे 
वास्तु  नियमों के अनुसार घर एवं कार्यालयों में आम, संतरे, सेब, अंगूर, अनार, केसर, नीम, मौलश्री, चंदन, जयंती, गुड़हल, अशोक, नीम, चंपा, तुलसी, बेल, गुलाब, चमेली आदि के बोनसाई पौधे लगाए जा सकते हैं। जबकि भवन और उसके आस-पास कांटेयुक्त पेड़-पौधे, बेर, दूध निकलने वाले पौधे, कैथल, बरगद, पीपल, बांस, कैक्टस, ढाक आदि लगाना अशुभ फलदायी होता है। इस तरह के बोनसाई पौधे न सिर्फ नकारात्मक ऊर्जा देते हैं बल्कि कई तरह की समस्याओं जैसे अर्थाभाव, घरेलू विवाद, रोग आदि का कारण भी बनते हैं।
सही दिशा का रखें ध्यान 
वास्तु नियमों के अनुसार अगर घर या कार्यालय में उचित दिशा का ध्यान रखते हुए बोनसाई पौधे लगाए जाएं तो इनका शुभ प्रभाव देखने को मिलता है। पूर्व दिशा में तुलसी, पश्चिम में शाक-सब्ज़ी, उत्तर में हरी कोमल दूब या घास और दक्षिण में बड़े पत्तों वाले पौधे जैसे मनी प्लांट लगाने चाहिए। इसी प्रकार उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में हरी दूब घास, दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में जलीय छायादार पौधे, दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोण) में भारी तने या पत्ते वाले पौधे तथा उत्तर-पश्चिम दिशा (वायव्य कोण) में वायु को शुद्ध करने वाले पौधे लगाना शुभ एवं श्रेष्ठ रहता है। 

Monday, August 3, 2015

श्रावण मास में शिव आराधना

देवाधिदेव भगवान शिव को अत्यंत प्रिय श्रावण मास का शुभारम्भ 1 अगस्त, 2015 से हो रहा है। इस मास में आशुतोष शंकर जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करके नियमित रूप से अभिषेक करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
कल्याणकारी हैं शिव
शिव का अर्थ है "कल्याण"। श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना करके सभी के कल्याण की कामना की जाती है तथा तन और मन से शिवोपासना में रुद्राभिषेक, अर्चना, भोग, श्रृंगार आदि करते हुए प्रार्थना, स्तुति, जप, भजन, कीर्तन, मंत्रोच्चारण आदि द्वारा कल्याणकारी कार्यों में प्रवृत्त होकर "शिवमय" होने का शुभ प्रयास किया जाता है।
ऐसे करें शिव आराधना
कहते हैं कि श्रावण मास में भगवान शंकर को प्रसन्न करने से समस्त देवताओं की पूजा का फल मिलता है। पुराणों के अनुसार, श्रावण मास में शिवलिंग पर प्रतिदिन एक बिल्वपत्र अर्पित करने से मनुष्य के तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। वहीँ भगवान शिव को सर्वाधिक प्रिय सोमवार के दिन शिव साधना करने एवं पूर्ण भक्ति-भाव से पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखते हुए शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, बूरा, गन्ने का रस, सरसों या तिल का तेल, घी, पंचामृत, पंचमेवा, चन्दन, भांग, धतूरा, फल, पुष्प, इलायची, मोली, श्वेत वस्त्र, यज्ञोपवीत, तुलसी मंजरी, दूर्वा, रुद्राक्ष आदि सामग्री अर्पित करने से धन, धान्य, संतान, शांति, निर्मलता की प्राप्ति होती है तथा जीवन से रोग और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
भोले हैं भोले शंकर
भगवान शिव को भक्त भोले शंकर और भोले भंडारी कहकर भी पुकारते हैं क्योंकि भगवान शंकर साधारण पूजा-पाठ से सहज ही प्रसन्न होने वाले देवता हैं। श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा भी उन्हें प्रसन्न  करने के लिए की जाती है जिससे कि भक्तों को उनकी कृपा मिले और वे शिवमय होकर सबका कल्याण कर सकें। भगवान शिव की आराधना करते समय "ॐ नमः शिवाय", "बम-बम भोले", "नमो नीलकंठाय", "ॐ पार्वतीपतये नमः", "ॐ किरुकुल्ये हुं फट स्वाहा", "ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय" आदि मंत्रों का उच्चारण अवश्य करना चाहिए। इसके अलावा श्रावण मास में भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जप भी करना चाहिए।
नाग पूजन से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव 
भगवान शिव का स्वरुप अद्भुत है। संपूर्ण शरीर पर भस्म, जटाओं में पवित्र गंगा, भाल पर अर्ध चंद्रमा, गले में रुद्राक्ष और सर्पों की माला, हाथ में डमरू एवं त्रिशूल। जो भी उन्हें देखता है , मंत्रमुग्ध रह जाता है। नाग देवता भगवान शिव के गले का श्रृंगार होते हैं, इसलिए श्रावण मास में भगवान शिव के साथ-साथ शिव परिवार और नाग देवता की पूजन किये जाने का विधान है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि "नाग पंचमी" के रूप में जानी जाती है। इस दिन पांच फन वाले नाग देवता की पूजा करके उन्हें चंदन, दूध, खीर, पुष्प आदि अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सर्प एवं नागों द्वारा काटे जाने का ख़तरा भी नहीं रहता है।
अशुभ ग्रहों को बनाएं शुभ
जिन जातकों की जन्म कुंडली में "कालसर्प दोष" है, उन्हें श्रावण मास में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते हुए उन्हें प्रसन्न करना चाहिए। श्रावण मास के चारों सोमवार के दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना, उपवास रखना, बहते हुए जल में चांदी और तांबे से निर्मित नाग-नागिन के जोड़े को प्रवाहित करना तथा महामृत्यंजय मंत्र का जप करना शुभ प्रभाव देता है। जन्म कुंडली में अगर ग्रहों के अशुभ फल मिलते दिखाई दे रहे हों तो भगवान शिव की नियमित रूप से आराधना करके महामृत्युंजय मंत्र का एक माला जप श्रावण मास में प्रतिदिन करना चाहिए। इस मंत्र में अपार शक्ति है। दुर्घटना अथवा असाध्य रोग के कारण मृत्यु के मुख में जा रहे व्यक्ति के जीवन को इस मंत्र शक्ति के बल पर जीवन दान दिया जा सकता है, ऐसा धार्मिक ग्रंथ एवं पुराणों में वर्णित है।
श्रावण मास में ऐसा न करें
श्रावण मास पवित्र जीवन, सात्विक आहार एवं व्यवहार प्राप्त करने से जुड़ा है क्योंकि इस मास में भगवान शिव की आराधना करके "सत्यं शिवं सुंदरं" की भावना को अपने अंदर समाहित किया जा सकता है। श्रावण मास में भगवान शिव की अनुपम कृपा पाने के लिए अपवित्र और अनैतिक कार्य करने से बचना चाहिए। शिवलिंग पर चम्पा, केतकी, नागकेसर, केवड़ा और मालती  पुष्प अर्पित नहीं करना चाहिए।  शिव मंदिर की पूरी परिक्रमा न करके आधी परिक्रमा ही करनी चाहिए। बिल्वपत्र कटे-फटे एवं छिद्रयुक्त न हों। बिना मंत्र के शिव पूजन न करें और न ही शिव पूजन में शंख का प्रयोग करें। शिवलिंग पर शंख से जल अर्पित नहीं करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल
     

Thursday, July 16, 2015

बिल्ली पालें तो रहे सावधान

     वर्त्तमान समय में घरों में बिल्ली पालने का शौक बढ़ता जा रहा है। तंत्र-मंत्र की साधना में बिल्ली को काली शक्ति का प्रतीक मानते हुए उसकी पूजा की जाती है। वहीं बिल्ली का सम्बन्ध पितरों से भी माना गया है। इसलिए घरों में बिल्ली के आने पर लोग उसे अशुभ मानते हुए घर से भगाने की कोशिश करते हैं। ज्योतिष एवं वास्तु की दृष्टि से घर में बिल्ली का बार-बार आना शुभ नहीं माना गया है। नारद पुराण के अनुसार जहां भी बिल्ली के पैरों की धूल उड़ती है, वहाँ सकारात्मक ऊर्जा की हानी होती है जिससे उस स्थान पर अशुभ प्रभाव बढ़ने लगते हैं।
     जिस घर में अक्सर बिना कारण बिल्लियों का आना-जाना लगा रहता है, उस घर में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। घर में अचानक ही बिल्लियों का आना बढ़ जाने से घर के स्वामी अथवा मुखिया को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है तथा घर में कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं। बिल्लियों के सम्बन्ध में यह भी माना जाता है कि अगर भोजन करते समय बिल्ली आकर देखने लगे तो कष्ट होता है। इसी प्रकार बिल्ली द्वारा घर में मल-मूत्र का त्याग करने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
     कहा जाता है कि दूसरे प्राणियों की तुलना में बिल्ली की छठी इन्द्रीअधिक सक्रिय होती है। इस वजह से बिल्ली को भविष्य में होने वाली किसी भी अशुभ घटना का पूर्वाभास हो जाता है, ऐसी स्थिति में बिल्ली स्थान परिवर्तन करके दूसरी जगह पलायन कर जाती है। जो लोग अपने घरों में बिल्ली पालते हैं उन्हें इस  बात का विशेष  चाहिए कि अगर उनकी पालतू बिल्ली घर छोड़ कर अचानक चली गयी है तो यह भविष्य में घटने  किसी अशुभ घटना का संकेत हो सकता है।
     बिल्ली पालने अथवा बिल्ली के आने-जाने से अगर  घर-परिवार में किसी तरह के अशुभ संकेत या परिणाम नज़र आ रहे हों तो उससे बचाव के लिए भगवान सत्यनारायणजी की पूजा या हवन अनुष्ठान कराना चाहिए। पितरों की शान्ति और तृप्ति के लिए प्रत्येक शनिवार को दक्षिण दिशा में मुख करके काले तिल मिश्रित जल से तर्पण करना चाहिए। पीपल के वृक्ष पर जल चढाने और दीपक प्रज्वलित करने से भी बिल्ली के कारण होने वाले अशुभ परिणामों से छुटकारा मिल सकता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल

Saturday, February 14, 2015

जूता गांठने वालो को मिलेंगी दुकान

 आगरा। जिला समाज कल्याण अधिकारी एस0एस0यादव ने अवगत कराया है कि जूता गांठने वाले अनुसूचित जाति के गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले कारीगरों के लिए निःशुल्क भूमि पर दुकान निर्माण योजना संचालित की गई है, जिसमें 13.32 वर्गमीटर साइज की दुकान हेतु प्रति व्यक्ति कुल 2.28 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत की जायेगी। सर्वप्रथम 1.50 लाख रूपये स्थल क्रय हेतु अनुदान दिया जायेगा एवं दुकान निर्माण हेतु रूपये 78 हजार रूपये पृथक से दिया जायेगा जिसमें 10 हजार शासकीय अनुदान एवं 68 हजार ब्याज मुक्त ऋण की धनराशि होगी। 
     यह योजना गरीबी रेखा से नीचे जीवन करने वाले ग्रामीण क्षेत्र के 19884/- रुपये तथा शहरी क्षेत्र के 25546/- रूपये अधिकतम आय वाले सड़कों पर जूता गांठने वाले अनुसूचित जाति के कारीगरों के लिए है। अधिक जानकारी के लिए किसी भी कार्यदिवस में  विकास भवन संजय प्लेस स्थित जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) /पदेन जिला प्रबंधक, उ0प्र0 अनु0जाति वित्त एवं विकास निगम लि0 से सम्पर्क किया जा सकता है।  

Friday, February 6, 2015

मतदान हेतु सवैतनिक अवकाश अनुमन्य

  सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी भारत सिंह ने अवगत कराया है कि दिल्ली राज्य में विधान सभा समान्य निर्वाचन-2015 के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावली में सम्मिलित ऐसे पात्र मतदाताओं, जिसमें दैनिक श्रमिक भी सम्मिलित है, तथा जो उक्त निर्वाचन क्षेत्र के बाहर के क्षेत्रों में आजीविका के संदर्भ में कार्यरत है, को अपने मत का प्रयोग करने के लिए मतदान दिवस को सवैतनिक अवकाश अनुमन्य किया जाएगा। 

विधवा पेंशन लाभाथी सी0बी0एस0 खाता संख्या दें

   जिला प्रोबेशन अधिकारी/ज्वाइन्ट मजिस्ट्रेट आर0उमा0 महेश्वरी ने अवगत कराया है कि प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न विकास योजनाओं के अन्तर्गत पात्र लाभार्थियों के डाटाबेस का डिजिटाइजेशन तथा प्रत्येक लाभार्थियों का आधार नम्बर नामांकन से लिंक किये जाने के निर्देश प्राप्त हुये है। उन्होंने बताया कि महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित की जा रही पति की मृत्युपरान्त निराश्रित महिला पेंशन (विधवा पेंशन) योजना के लाभार्थियों  के आच्छादन में सुधार हेतु डेटाबेजस का डिजिटाइजेशन तथा मार्च 2015 तक इस डाटा को आधार लिंक किया जाना है। 
     उन्होंने सम्बन्धित लाभार्थियों से अपेक्षा की है कि महिला का नाम, मृत पति का नाम, पता, सी0बी0एस0 खाता संख्या, मोबाइल नम्बर, दो पासपोर्ट साइज फोटो तथा आधार कार्ड नम्बर की जानकारी का विवरण तत्काल कलेक्ट्रेट स्थित उनके कार्यालय में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, ताकि सरकार की मंशा के अनुसार लाभार्थियों का डाटाबेस का डिजीटाइजेशन की कार्यवाही पूर्ण कर शासन को प्रेषित की जा सके।

Friday, January 30, 2015

हमारे देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं- मा0 राज्यपाल

जीवन में सफलता के चार मन्त्र अपनाने पर दिया जोर
05 डी लिट, 107 मेडल, 81 एमफिल तथा 495 पीएचडी उपाधि प्रदान की
   जो समाज अपने इतिहास को भूलता है और वर्तमान का ख्याल नहीं करता है तो ऐसा समाज विकास नहीं कर सकता है। हमारे पास प्रतिभा की कोई कमी नही है जरूरत है प्रतिभाओं को निखारने की, जिससे देश के लिए उपयोग हो। स्वास्थ्य लाभ के लिए विदेशों में जाते है लेकिन वहां पर इलाज करने वाले अधिकतर डाॅक्टर व नर्स तो भारतीय ही मिलते है। भारतीय विद्यार्थियों में प्रतिभा है। इस प्रकार की स्पर्धा में आगे बढ़ाने की जरूरत है।
     प्रदेश के मा0 राज्यपाल रामनाईक ने आज डा0 बी0आर0 अम्बेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित 80 वें दीक्षांत समारोह को कुलाधिपति के रूप में सम्बोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए चार मंत्र अपनाये जायें तो वह व्यक्ति निश्चित रूप से प्रगति कर सकता है। उन्होंने सफलता के चार मंत्रों में बताया कि विशेष परिस्थितियों को छोड़कर सदैव मुस्कराते रहना चाहिए, दूसरा यदि कोई अच्छा कार्य करता है तो उसे अच्छा कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करें, तीसरा किसी की अवमानना मत करो, इंसान को अंहकार बहुत जल्दी हो जाता है और जो कोई व्यक्ति दूसरे को छोटा दिखाने की कोशिश करता है वह आगे नही बढ़ सकता है। चैथा मंत्र है आप जो भी करते हो उसे और अधिक अच्छा करने की चाह करें अर्थात जो अधिक अच्छा करता है वही आगे बढ़ता है।
     मा0 राज्यपाल ने कहा इस विश्वविद्यालय की परम्परा रही है कि यहां से एक से बढ़कर एक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, चै0 चरण सिंह तथा पूर्व राष्ट्रपति डा0 शंकर दयाल शर्मा जैसे अच्छे विद्यार्थी इस वि0वि0 से निकले है जिन्होने भारत देश का नाम रोशन किया है। इस पर हर विद्यार्थी को गर्व होना चाहिए।
     उन्होंने छात्रों की संख्या के दो गुनी छात्राओं के आगे बढ़ने पर बधाई दी और छात्रों से कहा कि स्पर्धा को प्राप्त करने के लिए उन्हे कड़ी मेहनत करनी होगी। उन्होंने गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से कहा कि आपकी एक किताबी पढ़ाई पूरी हुयी है, अब आगे चलकर जीवन की पढ़ाई करनी है अब नये क्षेत्र में जा रहे हैं, आगे बहुत स्पर्धा आपके सामने है जो खुले जगत में करनी पड़ेगी इसलिए अपना व्यक्तित्व सुधारने की हमेशा, कोशिश करते रहना चाहिए। उन्होने क्षेष्ठतम विद्यार्थियों को 05 डी0लिट, 81 एमफिल, 107 मेडल तथा 495 पीएचडी की उपाधि प्रदान करते हुए सुखद भविष्य की कामना की।
     दीक्षान्त समारोह के मुख्य अतिथि पदम श्री एम0एस0 सोढ़ा ने सम्बोधित करते हुये कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात इस प्रकार करनी चाहिए जो दूसरों की अच्छी तरह समझा 
सके। यदि व्यक्ति में बौद्विक क्षमता है तो वह दूसरे क्षेत्रों में भी सफल हो सकता है। उन्होंने उद्यमशीलता को बढावा देने पर जोर देते हुये कहा कि ऐसा करने से अन्य लोगो को भी नौकरी
मिलने में आसानी रहेगी। उन्होंने उच्च शिक्षा क्षेत्र में पुर्नविचार की अपेक्षा करते हुये कहा कि यदि यथास्थिति अपनाएंगे तो आने वाली पीढीयां कभी माफ नहीं करेंगी।
     दीक्षांत समारोह के विशिष्ट अतिथि प्रो0 रमाशंकर कठेरिया ने कार्यक्रम को समबोधित करते हुये कहा कि यह विश्वविद्यालय आगरा जैसे नगर में बहुत पुराना विश्वविद्यालय है इसकी गरिमा ने सदैव बढ़ती ऊंचाई प्राप्त की है। देश के सामने चुनौतियां बहुत है। जिसमें वि0वि0 की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि जब प्राथमिक शिक्षा ठीक हो जायेगी तो निश्चित रूप से बहुत कुछ ठीक हो सकता है। उन्होंने कहा कि अध्यापकों की कमी जब तक बनी रहेगी तब तक अच्छे छात्रों की कल्पना करना कठिन है और जब अच्छे छात्र नही होंगे तो अच्छे समाज की कल्पना करना भी कठिन होगा। उन्होंने कहा कि हमारे सामने उच्च शिक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के साथ ही हमारी शिक्षा व्यवस्था कैसे ठीक हो, की चुनौती है, जिसके लिए हम सभी को समग्रता की ओर सोचना होगा। उन्होंने कहा कि छात्रों में प्रतिभा की कमी नही है देश को आगे बढाने के लिए लोगों की सोच बदला है। उन्होंने कहा कि भारत देश की सवा सौ करोड़ आबादी के ढ़ाई सौ करोड़ हाथ बढ़ेगे तो निश्चित रूप से देश की व्यवस्था  में परिवर्तन आयेगा। 
     कुलपति प्रो0 मोहम्मद मुजम्मिल ने दीक्षान्त समारोह में मा0 राज्यपाल को शाॅल एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।कार्यक्रम में महापौर इन्द्रजीत आर्य, विधायक छोटेलाल वर्मा, मण्डलायुक्त प्रदीप भट्नागर, जिलाधिकारी पंकज कुमार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश डी मोदक सहित विश्वविद्यालय परिवार के समस्त प्रोफेसर एवं उपाधि प्राप्त करने वाले श्रेष्ठतम विद्यार्थी भी उपस्थित थे।