Thursday, January 2, 2014

ग्रह बाधा में करें उपाय

++ अगर बनते हुए कार्यों में बिना वजह बाधा आ रही हो तो शुक्ल पक्ष के किसी भी मंगलवार से सुन्दर काण्ड का पाठ प्रारम्भ करके प्रतिदिन एक बार लगातार एक सौ आठ दिन तक पाठ करने से बाधा दूर होकर कार्य बनने लगते हैं। 
++ शनि की साढ़े साती परेशान कर रही हो तो कष्ट शमन के लिए शनि ग्रह से सम्बंधित मन्त्रों का जप करने के साथ-साथ शनि की वस्तुओं का दान करना चाहिए। 
++  सूर्य ग्रह के दोषपूर्ण होने से ह्रदय रोग की सम्भावना रहती है। इससे बचाव के लिए श्री आदित्य ह्रदय स्त्रोत का पाठ प्रतिदिन श्रद्धापूर्वक करना चाहिए। इस पाठ के करने से धन लाभ, प्रसन्नता, पदोन्नति तथा अन्य शुभ फल भी मिलते हैं। 
++ जीवन यापन के लिए पर्याप्त आय के साधन होने के बावजूद अगर लिया गया ऋण चुकता नहीं हो पा रहा है तो शुक्ल पक्ष के मंगलवार से व्रत रखते हुए ऋण मोचक मंगल स्त्रोत का पाठ करना चाहिए। व्रत में नमक का सेवन न करें। 
++ यदि जीवन में लगातार दुर्घटनाओं का सामना करना पड़ रहा हो तो प्रतिदिन महामृत्यंजय मन्त्र, विष्णुसहस्त्रनाम, राम रक्षा कवच और शक्ति कवच का जप करते हुए पशु-पक्षियों व मछली को दाना डालना चाहिए।
++ संतान प्राप्ति में बाधा आ रही हो तो अन्य उपायों के अलावा गौ पालन अथवा गौ सेवा करना शुभ होता है। गौ सेवा करने से जहां शुक्र ग्रह के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं वहीं प्रत्येक बुधवार को गौ माता को हरा चारा खिलाने से बुध ग्रह के दोषों का शमन होता है।-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिष विद्या विशारद (फलित ज्योतिष और वास्तु सलाहकार) 

नया साल, हो नयी आशाएं

2013 बीत चुका है और हमारे सामने है एक और नया साल यानि 2014। जो बीत चुका है उसे दोहराने की आवश्यकता नहीं है। बीते हुए साल में हमने क्या खोया, क्या नया हासिल किया, इस बात पर चिंतन-मनन करने का समय है। कहते हैं कि अतीत की घटनाओं से जो लोग सबक नहीं लेते, आने वाला समय उन्हें कभी माफ़ नहीं करता। इसलिए हमें बीते हुए समय से सबक लेकर नयी आशाओं और नए आत्म विश्वास के साथ इस नए साल का स्वागत करना चाहिए।
भारतीय धर्म और संस्कृति में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से नए साल का शुभारंभ होना माना गया है। परंतु अँग्रेज़ी कलैंडर के अनुसार एक जनवरी से नया साल का आगाज होता है। इस तारीख से प्रारंभ होने वाले समय के आकलन को ईस्वी सन कहा जाता है। रोम के सम्राट जूलियस सीजर ईस्वी सन को ईसाई जगत के गॉड ईसा मसीह के जन्म के तीन साल बाद प्रचलन में लाये थे। हमारे देश में सन 1752 से ईस्वी संवत का प्रचलन अंग्रेजों द्वारा किया गया था।
प्रारंभ में ईस्वी सन 25 मार्च से शुरू होता था, परंतु अठारहवीं सदी में एक जनवरी से ईस्वी सन की शुरुआत की जाने लगी। पुराने कलैंडर में समय-समय पर आवश्यक सुधार किये जाते रहे। भारत में अंग्रेजों के द्वारा स्वीकृत ग्रेगर कलैंडर को राष्ट्रीय कलैण्डर के रूप में 22 मार्च, 1957 को अपनाने का निर्णय लिया गया। तभी से देश में सरकारी और गैरसरकारी काम-काज के लिए ग्रेगेरियन कलैण्डर की तारीखों का ही प्रयोग किया जा रहा है।
नया साल है तो मन में नयी उमंगें होना स्वाभाविक ही है। इस नए साल का स्वागत करने के लिए हमें कुछ नए ढंग से अपने को तैयार करना है। हम इस नए साल में नए संकल्प लें, अपने आप से ऐसे वादे करें, जिन्हें हम पूरे कर सकें। नए साल में मद्यपान, धूम्रपान, नशीले पदार्थों का सेवन करके हंगामा न करें और अगर अब तक करते रहे हों तो भविष्य में कभी भी न करने का दृढ़ संकल्प लें। अपनी शक्ति, धन और समय का सदुपयोग करने का वायदा करें। नए साल में ऐसा कोई भी काम न करें जिससे किसी को ज़रा भी कष्ट, तकलीफ और दुःख पहुंचे।
नए साल में नए दिन की शुरुआत किसी अच्छे काम से करनी चाहिए। अपने समय में से कुछ समय निकाल कर समाज और देश की सेवा करने के लिए भी अपने आप को अग्रसर रखना चाहिए। समाज में फ़ैली कुरीतियों को मिटाने की जिम्मेवारी हमारी ही है। नए साल में इन कुरीतियों को दूर करने का संकल्प लेते हुए दूसरों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
नया साल है तो नयी आशाओं के साथ हम स्वागत करें नए साल का। स्वागत करें नए साल के हर उस नए दिन का जो हमारे अंदर नयी ऊर्जा और नयी उमंग देता है। अपने पर्यावरण को संरक्षित करें, अपनी धरती को हरा-भरा बनाने के लिए नए साल पर नया पौधा लगाकर उसकी साल भर देख-रेख करें। पीने के पानी और बिजली के अपव्यय को रोकें। नए साल पर इस तरह से की गयी हमारी कोशिश निश्चय ही आने वाले दिनों में हमें सुख , प्रसन्नता और शांति प्रदान करती रहेगी।