Saturday, August 9, 2014

शुभ नक्षत्र और वार के प्रभाव से विशेष फलदायी होगा रक्षा बंधन का पर्व 
श्रवण मास की पूर्णिमा तिथि को भाई-बहिनो के स्नेह और प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन का पर्व धर्म एवं वर्ग के भेद-भाव से परे सभी वर्णों के लोगों के द्वारा मनाया जाता है। रक्षा बंधन का धार्मिक और पौराणिक महत्त्व है।  भविष्य पुराण के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन प्रातः काल में नित्य क्रिया से निवृत्त होने के बाद श्रुति-स्मृति विधि से स्नान करके देवताओं और पितरों का निर्मल जल से तर्पण करना चाहिए तथा वेदपाठी ब्राह्मणों के रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें दान आदि देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। भगवान श्री कृष्ण ने भी रक्षा बंधन के पर्व की महत्ता को बताते हुए कहा है कि विधि-विधान से मनाया गया यह पर्व  विजय,सुख, पुत्र, आरोग्य और धन लाभ कराता है।
श्रवण मास की पूर्णिमा सभी वर्णों के लिए शुभ मानी गयी है। जिस दिन पूर्णिमा उदय काल में 6 घड़ी से अधिक हो, उस दिन भद्रारहित काल में रक्षा बंधन पर्व को मनाया जा सकता है। इस वर्ष 10 अगस्त को रविवार के दिन रक्षा बंधन पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भद्रा काल दिन में 1 बजकर 21 मिनट तक है। इसलिए इस बार रक्षा बंधन पर्व पर बहनें भद्राकाल समाप्त होने के बाद ही अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधेंगी।
वार और नक्षत्र के विशेष संयोग से शुभ और सिद्ध योग बनता है , ऐसा ज्योतिष शास्त्रियों का मानना है। रक्षा बंधन पर्व इस बार रविवार के दिन पड़ रहा है। रक्षा बंधन पर्व सदैव श्रवण नक्षत्र में ही मनाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार श्रवण नक्षत्र के स्वामी चन्द्रदेव हैं जबकि रविवार का दिन भगवान सूर्यदेव से जुड़ा है। सूर्यदेव को समस्त ग्रहों में सर्वाधिक शक्तिशाली माना गया है। इसी प्रकार सूर्यदेव से चन्द्रदेव को प्रकाश भी प्राप्त होता है। लेकिन इसकी बावजूद दोनों की प्रकृति में बहुत अंतर है।  सूर्यदेव गर्म प्रकृति के हैं तो चन्द्रदेव की प्रकृति अत्यंत शीतल है। इसके बाद भी दोनों में मित्रता है। जहां सूर्यदेव ज्ञान, विवेक, यश, सामान, सौख्य और समृद्धि के प्रदाता हैं, वहीँ चन्द्रदेव जीवन में सौम्यता, शान्ति और शीतलता प्रदान करते हैं।
रविवार के दिन रक्षा बंधन पर्व को मनाना विशेष फलप्रद हो सकता है। क्योंकि इस बार रक्षा बंधन पर सूर्यदेव और चन्द्रदेव, दोनों ही शुभ प्रभाव देने वाले होंगें। इसके अलावा 10 अगस्त रक्षा बंधन को 8 घंटा 2 मिनट से 23 घंटा 54 मिनट तक यग्योजय योग भी पड़ रहा है। इस योग में किया गया प्रत्येक शुभ कार्य विशेष फलीभूत होता है। इस दृष्टि से इस बार रक्षा बंधन का पर्व समस्त भाई और बहनों के लिए विशेष महत्त्व रखता है।  पूर्ण श्रद्धा भाव के साथ इस अवसर पर किया गया कार्य सभी के लिए अवश्य ही सफल होगा।
रक्षा बंधन के पर्व पर श्रवण कुमार की पितृ भक्ति को भी याद किया जाता है और उनके माता-पिता सहित उनका पूजन करके उनसे आशीर्वाद लिया जाता है।
यह पर्व धार्मिक और पौराणिक महत्त्व के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्त्व भी रखता है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार एक हिन्दू रानी ने अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए एक मुस्लिम शासक को रक्षा सूत्र भेजा। साम्प्रदायिक सौहाद्र की मिसाल कायम रखते हुए मुस्लिम शासक ने भी उस हिन्दू बहिन को उसकी रक्षा करने का विश्वास दिलाया।
रक्षा बंधन पर्व को मनाने का उद्देश्य भाई-बहिन के पवित्र रिश्ते की मर्यादा को बनाए रखने के साथ-साथ अपनी प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परम्पराओं को आने वाली पीढ़ी तह पहुंचाना है। तो आइये हम सब इस पर्व के मर्म को समझे और निहित स्वार्थ और धन लिप्सा का त्याग करके रक्षा बंधन के पर्व पर स्नेह और प्रेम की वर्षा करें। -- ज्योतिषविद प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा 

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