Tuesday, January 14, 2014

पतंग और तिल गुड़ का त्यौहार है मकर संक्रांति

    जिस प्रकार हिंदू धर्म एवं संस्कृति में एक मास को शुक्ल पक्ष तथा कृष्ण पक्ष में विभाजित किया गया है, उसी प्रकार एक वर्ष को भी दो अयनों - उत्तरायण और दक्षिणायन में विभाजित किया गया है। उत्तरायण काल में सौर मंडल का सबसे सशक्त ग्रह सूर्य पृथ्वी की परिक्रमा करने की दिशा में परिवर्तन करते हुए थोड़ा उत्तर दिशा की और ढलता जाता है। जबकि दक्षिणायन में सूर्य पूर्व से थोड़ा दक्षिण को गमन करता है। सूर्य का उत्तरायण होना शुभ माना गया है। मकर संक्रांति का त्यौहार सूर्य की गति पर आधारित है। पौष मास में जब सूर्य धनु राशि को छोड़ कर मकर राशि पर आता है तब इस संक्रांति को मनाते हैं।
     पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन सूर्य देवता अपने पुत्र शनि से मिलने उनके घर स्वयं जाते हैं। शनि को मकर राशि का स्वामी ग्रह माना जाता है, इसलिए यह दिन मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इसी दिन महाभारत काल के वीर प्रतापी योद्धा भीष्म पितामह ने अपने शरीर का त्याग किया और इसी दिन पवित्र गंगा नदी का धरती पर अवतरण होना माना जाता है।
    धार्मिक दृष्टि से मकर संक्रांति अत्यंत महत्वपूर्ण त्यौहार है। चूंकि मकर संक्रांति खगोलीय घटना से जुड़ा है इसलिए इस त्यौहार से जड़ तथा चेतन वस्तुओं की दशा एवं दिशा का निर्धारण होता है। यह त्यौहार तन और मन में प्रसन्नता, उमंग और शांति का संचार करके मनुष्य को पुनर्जन्म के चक्र से अवमुक्त कर देता है। श्रीमद्भगवद्गीता में स्वयं भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि उत्तरायण काल में जब सूर्य देव की कृपा से पृथ्वी विशेष प्रकाशमयी रहती है, तब मनुष्य शरीर का परित्याग होने से उसको पुनर्जन्म नहीं लेना पड़ता।
    मकर संक्रांति का त्यौहार पूरे देश में मनाया जाता है, परन्तु इसके नाम और स्वरुप अलग-अलग हैं। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और केरल राज्यों में यह त्यौहार संक्रांति के नाम से तो तमिलनाडु राज्य में पोंगल के नाम से प्रसिद्ध है। पतंग और तिल गुड़ से जुड़े मकर संक्रांति के त्यौहार पर आसमान तरह-तरह की रंग-बिरंगी पतंगों से आच्छादित हो जाता है।
    मकर संक्रांति पर गंगा जैसी पवित्र नदियों में अथवा घर पर ही तिल मिश्रित जल से स्नान करना, शरीर पर तिल के तेल की मालिश करना, तिल युक्त हवन सामग्री से हवन करना, दाल-चावल की खिचड़ी, तिल और गुड़ या चीनी से बनी गजक अथवा मिष्ठान, गर्म वस्त्र, कंबल, रजाई एवं घरेलू उपयोग की वस्तुओं आदि का दान और सेवन करना शुभ माना जाता है।
    महाराष्ट्र में इस दिन विवाहित महिलाओं के हल्दी या रोली का तिलक लगाकर तिल व गुड़ से बने व्यंजन तथा श्रद्धानुसार उपहार देकर त्यौहार का आनंद लिया जाता है। कहते हैं कि मकर संक्रांति पर किये जाने वाले दान के शुभ प्रभाव से सूर्य, शनि और दूसरे दोषपूर्ण ग्रहों का कोई दुष्प्रभाव मनुष्य पर नहीं पड़ता और जीवन में सुख, समृद्धि, शान्ति एवं संतान सुख प्राप्त होते हैं।-ज्योतिषविद् प्रमोद कुमार अग्रवाल,

No comments: