Monday, December 23, 2013

वास्तु दोष भी है विवाह में विलम्ब का कारण

    वास्तु शास्त्र का सम्बन्ध हमारे सम्पूर्ण जीवन से है। भवन और जमीन की स्थिति, शयन करने के तरीके, बेड की स्थिति आदि का प्रभाव किसी न किसी रूप में हमारे ऊपर अवश्य ही पड़ता है। वास्तु दोष होने पर कैरियर, धन, संतान, दाम्पत्य जीवन, संतान की पढ़ाई और उनके विवाह आदि में समस्याएँ आने लगती हैं। सब कुछ ठीक होने के बावजूद अगर विवाह योग्य लड़के अथवा लड़की के विवाह में अनावश्यक विलम्ब हो रहा हो तो इसका कारण जन्म कुंडली में ग्रह दोष या वास्तु दोष हो सकता है।
    वास्तु के अनुसार गलत दिशा में लगाया गया बेड विवाह में बाधक होता है। लड़के को सदैव पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा अर्थात ईशान कोण में तथा लड़की को उत्तर-पश्चिम दिशा अर्थात वायव्य कोण में ही अपना बेड लगाना चाहिए।  
    बेड दीवार से अलग हटकर लगाना चाहिए। दीवार से सटाकर लगाया हुआ बेड दोषपूर्ण माना जाता है। बेड पर बैठकर भोजन करने से बचना चाहिए। सोते समय करवट बायीं  तरफ ही रहे। दाहिनी ओर करवट लेकर सोने से मानसिक अस्थिरता एवं नकारात्मकता बनी रहती है।
    बेड के नीचे किसी तरह का कोई सामान, कागज, कबाड़ा आदि नहीं रखना चाहिए। अगर बेड बॉक्स वाला है तो इस बात का विशेष ध्यान रखें कि उसमें केवल ओढ़ने-बिछाने के कपडे, चादर, रजाई, गद्दे, तकिया आदि ही रखें जाएँ। अन्य सामान भरने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगता है। जिससे विवाह में बाधा आती है। 
     जगह की कमी की वजह से यदि बॉक्स वाले बेड में अन्य सामान रखना मजबूरी हो तो इस नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए बेड के नीचे एक बाउल में समुद्री या सेंधा नमक रखें या फिर बेड के चारों पायों के नीचे तांबे की एक-एक स्प्रिंग लगा दें। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल,फलित ज्योतिष और वास्तु सलाहकार

फल ही नहीं औषध भी है पपीता

   समस्त फलों में पपीता एकमात्र ऐसा फल है जिसे औषध के रूप में भी उपयोग में लाया जाता है। पपीते के नियमित सेवन से पेट के विकार दूर होते हैं, पाचन क्रिया में सुधार होकर भूख लगने लगती है जिससे शरीर की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है। पपीते में पाया जाने वाला विशेष तत्व है कारपेन, जो हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। 
    पपीते में पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए, बी और सी होने से यह नेत्र रोग, यकृत रोग, मूत्र रोग, ह्रदय रोग,पैरालाइसिस, वमन आदि को दूर करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। बच्चों की शारीरिक वृद्धि के लिए उन्हें पपीता अवश्य खिलाना चाहिए। काला नमक, काली मिर्च तथा नीबू का रस डालकर पपीता खाने से यह अत्यंत स्वादिष्ट तो लगता ही है,इसके पाचक गुण भी बढ़ जाते हैं। 
     अजीर्ण होने पर कच्चे पपीते के  दूध में चीनी मिलाकर चाटने से लाभ होता है। कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर खाने से कब्ज, आंव, अपच एवं अजीर्ण जैसी बीमारियों में आशातीत फायदा होता है। 
   जहां एक ओर पपीता स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, वहीँ दूसरी ओर गर्भवती महिलाओं के लिए इसका सेवन उपयुक्त नहीं है।  जिन महिलाओं को अत्यधिक मासिक आता हो, उन्हें भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए। रक्त प्रदर से पीड़ित महिलाओं को भूलकर भी कच्चे पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे रक्तस्राव अधिक होने की आशंका रहती है। 
प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन के रूप में भी पपीते का उपयोग किया जाता है। अधिक पके हुए पपीते का गूदा चेहरे और शरीर के खुले अंगों पर लगाने से दाग-धब्बे, मस्से, झाइयां, त्वचा की झुर्रियां, कालापन और मैल दूर होने लगते हैं। त्वचा की कोमलता और कांति के लिए इस उपाय को करने के बाद त्वचा पर नारियल अथवा तिल का तेल अवश्य लगाना चाहिए।