Saturday, October 12, 2013

विजय का पर्व विजयदशमी

      विजय दशमी को समस्त कामनाओं की पूर्ति और विजय का पर्व माना जाता है धार्मिक ग्रन्थों  में आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को विजय दशमी पर्व मनाये जाने का विधान है। इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने अधर्म, अन्याय और अत्याचार के प्रतीक लंका के राजा रावण का वध किया था धार्मिक ग्रन्थों  अनुसार जब भी पृथ्वी पर धर्म की हानि होने से अन्याय, अत्याचार और अनाचार बढने लगते हैं, भगवान मनुष्य  शरीर धारण करके इस पृथ्वी पर अवतरित होते हैं 
भगवान विष्णु के अवतार के रुप में प्रभु श्री राम ने भी ऋषि-मुनियों तथा राज्य की जनता को राक्षसो से निजात दिलाने के लिए चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को कर्क लग्न और पुनर्वसु नक्षत्र में कौशल नरेश दशरथ के यहाँ महारानी कौशल्या की कोख से जन्म लिया। भगवान श्री राम महानता की अद्भुत प्रतिमूर्ति थे उनकी लीलायें मनुष्यों के लिए आदर्श का पर्याय हैं गुरुकुल में निस्वार्थ भाव से गुरु सेवा, वचन पालन के लिए वन गमन, शरणागत की रक्षा, मित्र धर्म का निर्वहन, एक पत्नीव्रत पालन, भाई के प्रति प्रेम, शान्त-चित्त व्यक्तित्व, उदारता, दया भाव, समस्त चर-अचर जीवों के प्रति प्रेम एवं स्नेह- भगवान श्री राम के व्यक्तित्व और कृतित्व की महानता को दर्शाते हैं 
    चूकि विजय दशमी को समस्त मांगलिक कार्यो के लिये प्रशस्त माना जाता है, इसलिये ज्योतिष शास्त्र में इन इस तिथि को अबूझ मानते हुए इस दिन विभिन्न संस्कार युक्त कार्य जैसे बच्चे का नामकरण, अन्न प्राशन, मुंडन, कर्ण छेदन, यज्ञोपवीत, वेदारंभ, ग्रह प्रवेश, भूमि पूजन, नवीन व्यापार या दुकान का  उद्घाटन, नए वाहन या सामान की खरीद आदि कार्य किए जाने की अनुमति दी गयी है
    नवरात्र के नौ दिनों तक मा दुर्गाजी के नौ स्वरूपों की आराधना करके दशमी तिथि को विजय दशमी पर समस्त सिद्धियाँ प्राप्त करने के लिए अत्यन्त पवित्र माने जाने वाले शमी वृक्ष और अस्त्र-शस्त्र की पूजा की जाती है पौराणिक कथा के अनुसार हनुमान जी ने जनक नन्दनी सीता जी को शमी के समान पवित्र कहा था, इसलिए माना जाता है कि इस दिन घर की पूर्व दिशा में या मुख्य स्थान में शमी की टहनी प्रतिष्ठित करके उसके पूजन से घर-परिवार में खुशहाली आती है और विवाहित महिलाओ का सौभाग्य अखण्ड बना रहता है
शमी के पूजन से मनुष्य के पाप और मुसीबतों का अन्त भी होता है 
रावण काम, क्रोध, मद्, लोभ और मोह जैसी बुराइयो का प्रतीक हैअयोध्या पति श्री राम ने रावण का वध करके संसार को यह संदेश दिया कि ये सभी बुराईया मनुष्य के पतन का कारण हैं ज्ञानी-ध्यानी और विद्वान होने के बावजूद अगर किसी मनुष्य में ये समस्त बुराइया विद्यमान हैं तो उसकी सारी योग्यतायें व्यर्थ हैं मनुष्य के बुरे कर्म एक न एक दिन उसके अन्त का कारण अवश्य ही  बनते हैं 
 विजय दशमी के दिन सकल सिद्धियों की प्रदाता अपराजिता देवी जी की पूजा-अर्चना भी की जाती है शास्त्रों के अनुसार अपराजिता देवी को मा दुर्गा भगवती का अवतार माना गया है इनके पूजन  से कार्यों में विजय हासिल होती है और जीवन में आने वाली परेशानियों एवं समस्यायों का अन्त होता है इसके अलावा जीवन में सभी कामों में सफलता पाने के लिए इस दिन रामरक्षास्त्रोत, श्री रामचरित मानस का सुन्दरकाण्ड और लंका काण्ड में वर्णित राम-रावण युद्ध का पाठ करना भी शुभ माना गया है  
    वर्तमान समय में श्री राम का सम्पूर्ण जीवन दर्शन न सिर्फ प्रासंगिक और अनुकरणीय है बल्कि मनुष्य के भीतर छिपे दुर्गुणों को दूर करने के लिए भी अनिवार्य है जिस प्रकार विजय दशमी पर्व  अधर्म पर धर्म की विजय का पर्व है उसी प्रकार भगवान श्री राम का आदर्श व्यक्तित्व महान और प्रभावशाली है जीवन में सुख, समृद्धि, कामनाओ की पूर्ति तथा विजय प्राप्त करने के लिए विजय दशमी पर्व पर श्री राम की आराधना करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लेना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल