Wednesday, September 18, 2013

18 सितम्बर,2013: अनन्त चतुर्दशी व्रत पर्व पर विशेष

अनन्त चतुर्दशी व्रत से मिलती हैं समस्त सिद्धियाँ


     भाद्रपद मास की चतुर्दशी तिथि को अनन्त चतुर्दशी का व्रत किया जाता है. इस दिन अनन्त भगवान् की पूजा अर्चना की जाती है तथा रेशम के धागे में चौदह गांठ लगाकर अनन्त बनाते हैं और अपनी भुजा में बांधते हैं. पुरुषों के लिए दाहिनी भुजा में और स्त्रियों के लिए बायीं भुजा में बनाया गया अनन्त बाँधने का विधान है.अनन्त भगवान् का श्रृंगार करके पूजा उपासना के बाद उनके भी अनन्त धारण किया जाता है. 
     भविष्य पुराण में कहा गया है कि अनन्त नाम  भगवान् श्री  कृष्ण का ही है. पुराण में दिए गए एक प्रसंग में भगवान  कृष्ण युधिष्ठिर से कहते हैं कि संसार का भार उतारने और दानवों का संहार करने के लिए ही वे वासुदेव जी के कुल में अवतरित हुए हैं तथा वे ही विष्णु, शिव, ब्रह्मा, भास्कर, शेष, सर्व व्यापी ईश्वर तथा अनन्त हैं.
     अनन्त चतुर्दशी के दिन स्त्री एवं पुरुष प्रातः स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करके पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, मीठी पूरी अथवा हलवा आदि से अनन्त स्वरुप भगवान् विष्णु की उपासना करते हैं. भगवान् अनन्त के समक्ष चौदह गाँठ लगाकर बनाया गया अनंत " अनन्तसंसारमहासमुद्रे मग्नान सम्भ्युद्दर वासुदेव। अनन्तरूपे विनियोजितात्मा ह्यनन्तरूपाय नमो नमस्ते।।" मन्त्र का उच्चारण  करते हुए अपनी भुजा में धारण करते हैं. अनन्त चतुर्दशी पर बांधे गए अनन्त को गाज  कहा जाता है. इस प्रकार धारण कियॆ गए गाज अर्थात अनन्त को भाद्रपद मास के किसी भी शुभ दिन को खोला जाता है।  गाज खोलने के बाद इस गाज को मीठी पूरी पर रखते हैं और गेहूं  के दानों  के साथ गाज माता की कथा सुनते हैं. 
     गाज माता की कहानी के अनुसार, एक निःसंतान रानी को अनन्त और गाज माता की कृपा से संतान उत्पन्न हुई. रानी ने किये गए संकल्प जब पूरे नहीं किए तो गाज माता के क्रोध ने उस संतान को रानी के घर से एक भील के यहाँ पहुंचा दिया। रानी को जब अपनी भूल का अहसास हुआ तो उसने गाज माता से क्षमा याचना की और पूर्ण विधि-विधान से गाज माता की कथा सुनी। इससे गाज माता की अनुकम्पा से रानी को उसकी संतान वापस प्राप्त हो गयी. 
     अनन्त चतुर्दशी का व्रत-अनुष्ठान करने वाले स्त्री-पुरुषों के समस्त पाप दूर हो जाते हैं,मनोकामनाओं की पूर्ति होती है और समस्त रिद्धियाँ प्राप्त होती हैं. भगवान् कृष्ण ने स्वयं कहा है कि जो मनुष्य अनन्त - व्रत करता है, उसे उत्तम नक्षत्र, पुत्र एवं पौत्र सुख की प्राप्ति होती हैं तथा वह इस  लोक में समस्त सुख भोगकर अन्त में मोक्ष को प्राप्त हो जाता है. -- प्रमोद कुमार अग्रवाल (ज्योतिष एवं वास्तु सलाहकार)