Tuesday, August 6, 2013

सूर्य भगवान् के पूजन से मिलता है मनोवांछित फ

 समस्त संसार को अपने प्रकाश से आलोकित करने वाले भगवान् सूर्य का स्मरण और प्रातः पूजन मनोवांछित फल प्रदान करने वाला है। सप्तमी तिथि को भगवान् सूर्य का आविर्भाव हुआ था। इस कारण सप्तमी तिथि भगवान् सूर्य को अत्यंत प्रिय है। किसी भी मास  के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि अथवा किसी सूर्य ग्रहण या मकर संक्रांति के दिन से आरम्भ करके जो भक्त पूर्ण श्रद्धाभाव से भगवान् सूर्य की पूजा अर्चना करता है, उसे समस्त समस्त सुख प्राप्त होने लगते हैं। 
भगवान् सूर्य की प्रातः कालीन आराधना के समय सूर्य देव को जल अर्पित करना, "ॐ खकोल्काय स्वाहा" मन्त्र का जप करते हुए हवन करना, सूर्य से सम्बंधित वस्तुओं जैसे गेंहू, माणिक्य, रक्तवर्ण पुष्प, गुड, केसर, ताम्बा, स्वर्ण, रक्त चन्दन, रक्त कमल, भूमि, भवन आदि का दान करना शुभ होता है। 
वर्ष के बारह मास में भगवान् सूर्य के अलग-अलग नाम एवं रूपों की आराधना की जाती है। चैत्र मास में विशाखा, वैशाख मास में धाता, ज्येष्ठ मास में इंद्र, आषाढ़ मास में रवि, श्रावण मास में नभ, भाद्रपद मास में यम, आश्विन मास में पर्जन्य, कार्तिक मास में त्वष्टा, मार्गशीर्ष मास में मित्र, पौष मास में विष्णु, माघ मास में वरुण तथा फाल्गुन मास में सूर्य नामक भगवान् सूर्य की उपासना की जाती है। 
भगवान् सूर्य  की विधि विधान से सप्तमी तिथि को उपवास करके पूजा करने से सभी प्रकार के कष्टों का निवारण होता है, जीवन में प्रसन्नता आती है और भगवान् सूर्य की कृपा से सभी दोषपूर्ण ग्रहों के अशुभ प्रभाव दूर होते हैं। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल