Monday, December 23, 2013

फल ही नहीं औषध भी है पपीता

   समस्त फलों में पपीता एकमात्र ऐसा फल है जिसे औषध के रूप में भी उपयोग में लाया जाता है। पपीते के नियमित सेवन से पेट के विकार दूर होते हैं, पाचन क्रिया में सुधार होकर भूख लगने लगती है जिससे शरीर की कार्य क्षमता में वृद्धि होती है। पपीते में पाया जाने वाला विशेष तत्व है कारपेन, जो हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद करता है। 
    पपीते में पर्याप्त मात्रा में विटामिन ए, बी और सी होने से यह नेत्र रोग, यकृत रोग, मूत्र रोग, ह्रदय रोग,पैरालाइसिस, वमन आदि को दूर करने के लिए सर्वोत्तम माना गया है। बच्चों की शारीरिक वृद्धि के लिए उन्हें पपीता अवश्य खिलाना चाहिए। काला नमक, काली मिर्च तथा नीबू का रस डालकर पपीता खाने से यह अत्यंत स्वादिष्ट तो लगता ही है,इसके पाचक गुण भी बढ़ जाते हैं। 
     अजीर्ण होने पर कच्चे पपीते के  दूध में चीनी मिलाकर चाटने से लाभ होता है। कच्चे पपीते की सब्जी बनाकर खाने से कब्ज, आंव, अपच एवं अजीर्ण जैसी बीमारियों में आशातीत फायदा होता है। 
   जहां एक ओर पपीता स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, वहीँ दूसरी ओर गर्भवती महिलाओं के लिए इसका सेवन उपयुक्त नहीं है।  जिन महिलाओं को अत्यधिक मासिक आता हो, उन्हें भी इसका सेवन नहीं करना चाहिए। रक्त प्रदर से पीड़ित महिलाओं को भूलकर भी कच्चे पपीते का सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे रक्तस्राव अधिक होने की आशंका रहती है। 
प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन के रूप में भी पपीते का उपयोग किया जाता है। अधिक पके हुए पपीते का गूदा चेहरे और शरीर के खुले अंगों पर लगाने से दाग-धब्बे, मस्से, झाइयां, त्वचा की झुर्रियां, कालापन और मैल दूर होने लगते हैं। त्वचा की कोमलता और कांति के लिए इस उपाय को करने के बाद त्वचा पर नारियल अथवा तिल का तेल अवश्य लगाना चाहिए।

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