Monday, November 11, 2013

अक्षय नवमी के पूजन से नष्ट होते हैं महापाप

     कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी के रूप में जाना जाता है। इसे आंवला नवमी तथा कुष्मांड नवमी भी कहा जाता है। इस दिन व्रत, पूजन, तर्पण और दान करने से मनुष्य के महापाप नष्ट हो जाते हैं। अक्षय नवमी पर प्रातः काल में सूर्योदय से पहले गंगा, यमुना आदि पवित्र नदी में स्नान करके आंवले के वृक्ष नीचे पूर्व दिशा की ओर मुख करके आंवले के वृक्ष का पूजन करने का विधान है। पूजन के लिए जल, अक्षत, रोली, बतासे, आंवला, गुड़, पुष्प, मिष्ठान आदि का प्रयोग किया जाता है। पूजन करते समय आंवले के वृक्ष की जड़ में दुग्ध मिश्रित जल चढ़ाकर शुद्ध घी का दीपक  जलाना चाहिए और वृक्ष के चारों ओर कपास का सूत लपेटते हुए एक सौ  आठ बार परिक्रमा लगानी चाहिए।
    अक्षय नवमी पर कही जाने वाली लोक कथा के अनुसार, एक साहूकार प्रत्येक वर्ष अक्षय नवमी वाले दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करने के बाद उसके नीचे श्रद्धा भाव से ब्राह्मणों को भोजन कराता और उन्हें स्वर्ण दान करता। साहूकार के बेटों को यह सब करना नहीं सुहाता था तथा वे इसे फिजूलखर्ची मानते हुए साहूकार का विरोध करते थे।
     बेटों के इस व्यवहार से परेशान होकर एक दिन साहूकार घर से अलग हो गया और उसने एक दुकान लेकर उसके आगे आंवले का वृक्ष लगा दिया। साहूकार पहले की तरह आंवले के वृक्ष की सेवा करता और अक्षय नवमी आने पर उसकी पूजा-अर्चना करके ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान करता। जिससे उसका व्यापार जल्दी ही फलने-फूलने लगा और वह पहले से भी अधिक समृद्धशाली हो गया।
   उधर साहूकार के बेटों का व्यापार पूरी तरह ठप हो गया। जब उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ तो वे अपने पिता के पास आकर क्षमा मांगने लगे। साहूकार ने बेटों को क्षमा करते हुए उन्हें आंवला वृक्ष का पूजन करने को कहा। साहूकार की बात मानकर बेटों ने आंवला वृक्ष का पूजन कर दान करना  आरम्भ किया। जिसके प्रभाव से वे पहले की तरह सुखी और संपन्न हो गए। 
    अक्षय नवमी पर्व पर आंवले का पूजन करने के साथ-साथ पितरों को जल से तर्पण करना भी शुभ होता है। इस दिन ब्राह्मणों को आंवला, गुड़, गाय, स्वर्ण, वस्त्र, आभूषण, अनाज, चीनी, बतासे आदि का दान करने से ब्रह्म ह्त्या जैसे महापाप भी नष्ट हो जाते हैं तथा जीवन में सुख, समृद्धि, शांति एवं समस्त प्रकार से सुख प्राप्त हो - प्रमोद कुमार अग्रवाल

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