Saturday, September 7, 2013

08 सितम्बर (रविवार) : हरतालिका व्रत पर्व पर विशेष

हरतालिका व्रत से मिलता है सौभाग्य
 भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीय तिथि को हरतालिका व्रत किया जाता है. इसे भविष्य पुराण में हरकाली व्रत के नाम से बताया गया है. सौभाग्य की आकांक्षा रखने वाली स्त्रियों को यह व्रत करना करना चाहिए, परन्तु इस व्रत को पुरुष भी कर सकते हैं क्योंकि इस व्रत के करने के लिए स्त्री पुरुषों में किसी प्रकार का कोई भेद नहीं किया गया है और इस व्रत के प्रभाव से स्त्री और पुरुषों को समान रूप से मिलने वाले शुभ फल का प्रावधान भविष्य पुराण में है. इस व्रत में आरोग्य, दीर्घायु, सौभाग्य, संतान, धन-सम्पदा, शारीरिक एवं बल तथा ऐश्वर्य आदि प्रदान करने वाली माता भगवती हरकाली देवी जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है.
  हरतालिका व्रत किये जाने के सम्बन्ध में एक प्राचीन कथा है. जिसके अनुसार, महाराजा दक्ष प्रजापति की काली नाम की कन्या का विवाह भगवान् शंकर के साथ हुआ था. काली का वर्ण नीलकमल के सामान काला था. एक बार जब भगवान् शंकर भगवान् विष्णु जी के साथ विराजमान थे, तभी भगवान् शंकर ने काली को "प्रिये गौरी " का उच्चारण करते हुए पुकारा। यह सुनकर काली ने इसे अपना अपमान समझा और हरित वर्ण की कांति हरी दूर्वा घास में अग्नि प्रज्वलित  करते हुए उस अग्नि में अपनी देह को भस्म कर लिया।
 तत्पश्चात काली ने दुबारा हिमालय राज के यहाँ गौरवर्ण पुत्री के रूप में जन्म लिया। नए जन्म में उनका नाम गौरी रखा गया. इस जन्म में भी उन्होंने भगवान् शिव को अपने वर के रूप में चुनते हुए विवाह रचाया। इसलिए भगवान् शिव की आराध्या शक्ति माता भगवती का नाम हरकाली कहलाया।
 भविष्य पुराण में वर्णित है कि हरकाली अर्थात हरतालिका व्रत रखने वाली स्त्रियों को इस दिन नए धान्य एकत्र करके अंकुरित हरी घास से भगवती हरकाली की प्रतिमा बनानी चाहिए और पुष्प, धूप, दीप, मोदक, फल आदि के साथ उनकी उपासना करनी चाहिए। उपासना करते समय "हरकर्मसमुत्पन्ने हरकाये हरप्रिये। माँ त्राहीशस्य मूर्तिस्थते प्रणतोअस्मि नमो नमः. मन्त्र का जप अवश्य करना चाहिए। रात्रि काल में सौभाग्यवती स्त्रियों को माँ हरकाली देवी की कृपा प्राप्त  करने के लिए रात्रि जागरण करते हुए भक्तिमय गीत, संगीत और नृत्य करना चाहिए।
दूसरे दिन प्रातःकाल में अर्थात चतुर्थी के दिन माँ हरकाली की प्रतिमा को किसी पवित्र नदी अथवा जलाशय में "अर्चितासी मया भक्त्या गच्छ देवी सुरालयम। हरकाले शिवे गौरि पुनरागमनाय च." मन्त्र  का जप करते हुए विसर्जित कर देना चाहिए।
 इस प्रकार पूर्ण श्रद्धा भाव और विधि-विधान से हरतालिका व्रत करने से माँ हरकाली और भगवान् शिव की असीम कृपा से स्त्रियों को पति सुख के साथ-साथ अन्य समस्त सुख भी प्राप्त होते हैं. जो पुरुष इस व्रत को प्रत्येक वर्ष करते हैं उन्हें भी दीर्घायु, आरोग्य, संतान और धन आदि सुखों की सहज ही प्राप्ति होती है.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल 
    

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