Monday, April 8, 2013

चैत्र नवरात्र(11/04/2013) के शुभारम्भ पर विशेष

धन, सौभाग्य और शांति के लिए करें उपासना
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सर्व शक्तिमान भगवान् ने अपने दाहिने अंग से प्रजापति ब्रह्मा जी को, बाएँ अंग से भगवान् विष्णु जी को और मध्य अंग से भगवान् शिव को प्रकट किया था। ब्रह्मा जी ने शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि अर्थात प्रतिपदा को सूर्योदय काल में इस सम्पूर्ण जगत की रचना की, इसीलिए चैत्र मास की प्रतिपदा का विशेष महत्त्व माना गया है। इस तिथि से नवसंवत्सर और चैत्र नवरात्र का शुभारम्भ होता है।
आयु, धन, सौभाग्य, शांति आदि की प्राप्ति के लिए इस तिथि को सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी, जगत जननी माता भगवती, भगवान् शिव और अविनाशी भगवान् विष्णु जी की आराधना करनी चाहिए। इसके लिए केसर, अगर, चन्दन, कपूर, शुद्ध घी का दीपक, कमल, कनेर एवं नील कमल पुष्प के साथ पूजन करके गायत्री मन्त्र का जप करना विशेष फलप्रद होता है।
चैत्र प्रतिपदा से अष्टमी तिथि तक प्रत्येक दिन प्रभु श्रीराम, माँ दुर्गाजी और अन्य देवी-देवताओं का पूजन अर्चन होता है। चैत्र शुक्ल की अष्टमी तिथि को देवी दुर्गा जी की उपासना की जाती है। इस दिन श्री दुर्गा अष्टमी व्रत करके ''ॐ ह्रीं दुर्गे रक्षिणी '' मन्त्र का जप करना चाहिए। देवी जी का ध्यान और रात्रि जागरण करने से दुर्गा जी की कृपा प्राप्त होने लगती है। शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को प्रभु श्री राम जी का जन्म हुआ था, इसीलिए यह दिन श्री रामनवमी व्रत के रूप में जाना जाता है। इस दिन कन्या लांगुरों, देवी भगवती और भगवान् श्री राम एवं अन्य स्वरूपों का पूजन करने से समस्त दुःख, कष्ट, रोग और समस्याओं से छुटकारा मिलता है, मनोरथ सिद्ध होने होने लगते हैं तथा समस्त देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
-- प्रमोद कुमार अग्रवाल

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