Friday, April 26, 2013

सर्प के काटने से बचने का आसान उपाय

प्रत्येक वर्ष सूर्य एक निश्चित समय पर विशेष डिग्री पर स्थित होता है जिससे उसका विशेष प्रभाव मनुष्य पर पड़ता है। इस वर्ष ये समय 25 अप्रैल, 2013 से 05 मई, 2013 तक रहेगा। 
अगर इस समय अवधि के दौरान कोई भी मनुष्य एक साबुत मसूर का दाना और दो नीम की पत्तियां खा ले तो पूरे वर्ष उसे सर्प के काटने के भय से मुक्ति मिल सकती है अर्थात उसे सर्प के डसने की संभावाना नहीं रहेगी  यह शास्त्रोक्त उपाय हमें ग़ाज़ियाबाद से श्री चन्द्र शेखर गुप्ता जी द्वारा एसएम्एस के माध्यम से भेजा गया है। श्री गुप्ता जी के अनुसार यह उपाय सटीक एवं अचूक है।    

Tuesday, April 23, 2013

25 अप्रैल श्री हनुमान जयंती पर विशेष:

श्री हनुमान उपासना से होता है कल्याण 
 भगवान श्री राम के परम भक्त अंजनी नंदन श्री हनुमान अजेय और अमर हैं। इनका मुख लाल और शरीर सुवर्णगिरी के समान कांतिवान है। "आंजनेयं पाटलास्यम स्वर्णाद्रिसमविग्रहम। 
पारिजातद्रुमूलस्यम चिन्तयेत साधकोत्तम।।" 
श्री हनुमानजी की विधि-विधान और श्रद्धा भाव से उपासना सर्व कल्याणकारी है। मनोवांछित फल प्राप्त करने और दुःख, कष्ट, बाधा एवं भूत-प्रेत के प्रकोप से बचने के लिए श्री हनुमानजी  की आराधना करनी  चाहिए। इसके लिए लाल चन्दन, सिन्दूर, शुद्ध घी, चमेली का तेल, धूप, लाल पुष्प, जनेऊ, प्रसाद में बूंदी आदि का प्रयोग करना चाहिए। सिन्दूर और घी या चमेली का तेल मिलाकर हनुमान जी का श्रृंगार करना चोला चढ़ाना कहा जाता है, ऐसा करने से श्री हनुमानजी  की कृपा प्राप्त होती है। 
श्रृंगार के बाद श्री हनुमानजी  की आरती और पञ्चमुखी दीपदान का विधान है। दीपदान में लाल रंग के सूत से बनी बत्ती और शुद्ध घी का प्रयोग किया जाता है। श्री हनुमानजी के साथ-साथ भगवान् शिव के मंदिर में भी दीपदान अवश्य करना चाहिए। श्री हनुमानजी का ध्यान करते समय प्रभु श्री राम, जनक नंदनी सीता जी, अंगद, जामवंत, नल, नील, बाली आदि का भी ध्यान करने से जीवन में शुभ फल मिलने लगते हैं। 
पुराणों के अनुसार श्री हनुमानजी ने समस्त ग्रहों के राजा सूर्य देवता से धर्म, अध्यात्म, ज्योतिष और अन्य गूढ़ विद्याएं ग्रहण की थी। 
श्री हनुमानजी को समस्त देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त है। रामभक्त, महातेजा, कपिराज, महाबल, द्रोणादिहारक, मेरुपीठार्चनकारक, दक्षिणशाभास्कर, सर्वविघ्नविनाशक- ये आठ नाम श्री हनुमानजी के हैं। इन नामों का साथ 'नमः' लगाकर जप करने से शत्रु भय नहीं रहता और श्री हनुमानजी  के समान तेज भी मिलने लगता है। 
'तप्तचामीकरनिभं भीघ्नम संविहितान्जलिम। चलतकुंडलदीप्तास्यम पद्माक्षं मरुतिम स्मरेत।।' मन्त्र का एक सौ बार जप करने से सामान्य रोगों से छुटकारा मिल जाता है। किसी कार्य विशेष के लिए यात्रा करते समय इस मन्त्र के जप से कार्य सिद्ध होने की संभावनाएं अधिक हो जाती हैं। घर में रहकर इस मन्त्र के जप करते रहने से आरोग्य और धन सम्पदा सुख प्राप्त होते हैं। सम्पूर्ण कामनाओं की पूर्ति के लिए "हं पवननन्दनाय स्वाहा" मन्त्र का जप करना चाहिए। भूत-प्रेत बाधा से बचने के लिए "ॐ श्रीं महाअन्जनाय पवनपुत्रावेशयावेशय ॐ श्री हनुमते फट" मन्त्र का जप करना शुभ रहता है। दैनिक जीवन में प्रतिदिन या प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार को श्री हनुमान चालीसा और श्री रामचरित मानस का पाठ करने से समस्याओं और कष्टों से छुटकारा मिलने लगता है तथा सुख, सौभाग्य, साहस, संतान, विद्या, सम्मान, विजय लाभ प्राप्त होने लगते हैं। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल
  
          


Wednesday, April 17, 2013

भगवान के सच्चे भक्त बनने में है सुख

सर्वशक्तिमान ईश्वर अर्थात भगवान् की आराधना हम सब अपने-अपने ढंग से करते हैं और अपने को सच्चा भक्त कहते हैं। निहित स्वार्थ के लिए ईश्वर से प्रार्थना करना और परलोक सुधारने के लिए दिखावा करके नाम कमाने की अभिलाषा के साथ दान करना सच्ची भक्ति नहीं है। पुराणों में कहा गया  है कि जो मनुष्य संसार के समस्त प्राणिओं का हित करता है, अपनी इन्द्रिओं को वश में रखता है और जिसमें दूसरों के प्रति किंचित मात्र भी ईर्ष्या भाव भी नहीं है, भगवान् का सच्चा भक्त है। सत्यवादी सात्विक बुद्धि वाले, माता-पिता की सेवा करने वाले, निंदनीय कर्मों से दूर रहने वाले, साधु  पुरुषों के सेवक, मन वचन एवं कर्म से किसी को कष्ट न पहुँचाने वाले, और निष्काम भाव से शुभ कर्म करने वाले मनुष्य भगवान् को परम प्रिय हैं क्योंकि वे भगवान् के सच्चे भक्त हैं। -प्रमोद कुमार अग्रवाल   

Monday, April 8, 2013

चैत्र नवरात्र(11/04/2013) के शुभारम्भ पर विशेष

धन, सौभाग्य और शांति के लिए करें उपासना
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार सर्व शक्तिमान भगवान् ने अपने दाहिने अंग से प्रजापति ब्रह्मा जी को, बाएँ अंग से भगवान् विष्णु जी को और मध्य अंग से भगवान् शिव को प्रकट किया था। ब्रह्मा जी ने शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि अर्थात प्रतिपदा को सूर्योदय काल में इस सम्पूर्ण जगत की रचना की, इसीलिए चैत्र मास की प्रतिपदा का विशेष महत्त्व माना गया है। इस तिथि से नवसंवत्सर और चैत्र नवरात्र का शुभारम्भ होता है।
आयु, धन, सौभाग्य, शांति आदि की प्राप्ति के लिए इस तिथि को सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी, जगत जननी माता भगवती, भगवान् शिव और अविनाशी भगवान् विष्णु जी की आराधना करनी चाहिए। इसके लिए केसर, अगर, चन्दन, कपूर, शुद्ध घी का दीपक, कमल, कनेर एवं नील कमल पुष्प के साथ पूजन करके गायत्री मन्त्र का जप करना विशेष फलप्रद होता है।
चैत्र प्रतिपदा से अष्टमी तिथि तक प्रत्येक दिन प्रभु श्रीराम, माँ दुर्गाजी और अन्य देवी-देवताओं का पूजन अर्चन होता है। चैत्र शुक्ल की अष्टमी तिथि को देवी दुर्गा जी की उपासना की जाती है। इस दिन श्री दुर्गा अष्टमी व्रत करके ''ॐ ह्रीं दुर्गे रक्षिणी '' मन्त्र का जप करना चाहिए। देवी जी का ध्यान और रात्रि जागरण करने से दुर्गा जी की कृपा प्राप्त होने लगती है। शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को प्रभु श्री राम जी का जन्म हुआ था, इसीलिए यह दिन श्री रामनवमी व्रत के रूप में जाना जाता है। इस दिन कन्या लांगुरों, देवी भगवती और भगवान् श्री राम एवं अन्य स्वरूपों का पूजन करने से समस्त दुःख, कष्ट, रोग और समस्याओं से छुटकारा मिलता है, मनोरथ सिद्ध होने होने लगते हैं तथा समस्त देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
-- प्रमोद कुमार अग्रवाल