Tuesday, February 5, 2013

हथेली में त्रिभुज बनता है भाग्यशाली

हथेली में बनी विभिन्न रेखाएं, पर्वतों की स्थिति, चिन्ह और अन्य संकेतों के अध्ययन से जातक के बारे में जानकारी दी जा सकती है। हथेली में जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और स्वास्थ्य रेखा के बीच का स्थान त्रिभुज कहलाता है। इन तीनों रेखाओं की स्थिति के अनुसार त्रिभुज छोटा, बड़ा, विस्तृत, संकुचित अथवा अन्य विशेषताएँ लिए हो सकता है। 
यदि किसी जातक की हथेली में ये रेखाएं न भी हों, तो भी त्रिभुज के स्थान को आधार मानकर अध्ययन किया जाता है। हथेली में यदि त्रिभुज बड़े आकर का हो तो जातक उदार, संपन्न और दीर्घ  आयु वाला होता है।
त्रिभुज के साथ मंगल पर्वत का उभार युक्त होना जातक को स्पष्टवादी बनाता है। वहीँ छोटा, दबा हुआ और आड़ी रेखाओं वाला त्रिभुज जातक को कंजूस, भयभीत होने वाला, चिडचिडा एवं क्रोधी बनता है।यदि त्रिभुज में बने कोण स्पष्ट और अच्छे हों तो जातक लम्बी आयु वाला और बुद्धिमान होता है। उसकी निर्णय लेने की क्षमता भी अद्वितीय होती है।त्रिभुज का दूसरा कोण यदि चन्द्र पर्वत पर बना दिखाई दे तो जातक के मानसिक रोगों से ग्रसित होने की संभावनाएं रहती हैं। त्रिभुज में अन्दर की ओर श्वेत रंग के बिंदु होना जातक में रक्त की कमी दर्शाता है।वहीँ लाल बिन्दुओं की मौजूदगी महिलाओं के गर्भवती होने का संकेत देती  है। 
अगर त्रिभुज के बीच क्रौस का चिन्ह बना हो तो जातक झगडालू प्रवृत्ति का होता है। एक से अधिक क्रौस का होना आर्थिक विपन्नता की ओर इशारा करते हैं।जीवन और भाग्य रेखा के बीच बना त्रिभुज जातक को साहसी एवं प्रसिद्धि प्रदान करता है। 
यदि त्रिभुज के मध्य में वर्ग का चिन्ह हो तो जातक के जीवन में खतरे आने की आशंकाएं बनी रहती हैं। त्रिभुज में यदि वृत्त हो तो जातक को विपरीत लिंग वाले व्यक्ति से तनाव 
और कष्ट मिलता है। त्रिभुज में गहरा जाल अशुभ माना जाता है। -- प्रमोद
कुमार अग्रवाल 

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