Thursday, April 26, 2012

शुद्ध भोजन,स्वस्थ जीवन.

आज के समय में हमारी जीवन शैली इतनी व्यस्त होती जा रही है कि हम समय पर न तो पौष्टिक  भोजन  कर पाते हैं और न ही समय पर अपनी दिनचर्या को व्यवस्थित  ही कर पाते हैं. जल्दबाजी में जो और जैसा भी भोजन मिलता है वही हमारे  पेट को भरने में काफी समझा जाता है. जबकि तन और मन की सेहत के लिए शुद्ध और पौष्टिक भोजन परम आवश्यक माना जाता है. बाज़ार में मिलने वाला फास्ट और जंक भोजन हमारी सेहत को बजाय लाभ के नुक्सान ही पहुंचता है. डॉक्टरों के अनुसार इस तरह का भोजन शरीर के अन्दर पहुंचकर बहुत सारे रोगों को जन्म देता है. यदि हम जीवन भर स्वस्थ्य और सुखी रहना कहते हैं तो हमें बाज़ार में मिलने वाले अशुद्ध और अस्वास्थ्यकर   खाद्य पदार्थों के सेवन से बचना चाहिए. जीवन भर स्वस्थ बने रहने का आसान सा मन्त्र है : शुद्ध भोजन,स्वस्थ जीवन. --प्रमोद कुमार अग्रवाल

कर्मशील को मिलती है सफलता

जीवन में लक्ष्य को हासिल करने के लिए कर्मशील होना परम आवश्यक है. आलसी और अकर्मण्य मनुष्य जीवन में कभी भी सफल नहीं हो सकता है. भाग्य के सहारे बेठे रहने वालों को भी कुछ हासिल नहीं होता है. हमारे धर्म ग्रंथों में भी कहा गया है कि जो मनुष्य जीवन भर कर्मशील बना रहता है वही सफलता के शिखर पर पहुँचता है. धर्म ग्रंथों के अनुसार कर्म धर्म का ही रूप है और सद्कर्म मोक्ष प्राप्ति का मार्ग है. इसीलिए हमें जीवन भर कर्म करते हुए जीवन को सुखी और संपन्न बनाना चाहिए. -- प्रमोदकुमार अग्रवाल