Friday, September 21, 2012

ज्योतिष शास्त्र और भविष्य

ज्योतिष शास्त्र और भविष्य मनुष्य को हमेशा से ही अपने भूत, वर्तमान और भविष्य को जानने की जिज्ञासा रही है। इसके लिए वह ज्योतिष शास्त्र की विभिन्न विधाओं जैसे हस्तरेखा, जन्म कुंडली, अंक विज्ञान आदि का सहारा लेता है और इस विधा के जानकार लोगों से संपर्क करने की कोशिश करता है। वहीँ कुछ लोग ज्योतिष शास्त्र को अविश्वास की नज़र से देखते हैं और इस शास्त्र से जुड़े लोगों का उपहास उड़ाते हैं, लेकिन ऐसे लोग भी अपने घर परिवार में किसी बच्चे के जन्म , मांगलिक कार्यक्रम, लड़के अथवा लडकी के विवाह आदि से पहले कुंडली मिलवाते हैं और इस विधा के जानकार लोगों की तलाश करते हैं।
वास्तव में देखा जाये तो ज्योतिष शास्त्र सौर मंडल में स्थित ग्रह, नक्षत्रों के हमारे जीवन पर प्रभाव से जुड़ा विज्ञानं है. बच्चे के जन्म के साथ ही उस समय मौजूद ग्रह और नक्षत्र के आधार पर उसके समस्त जीवन का निर्धारण हो जाता है।
सही-सही जन्म समय , जन्म स्थान और जन्म की तिथि के आधार पर बनी हुई जन्म कुंडली किसी भी जातक के सम्पूर्ण जीवन से जुडी गूढ़ से गूढ़ बातों की जानकारी दे देती है। वहीँ दूसरी ओर हमारे हाथ की रेखाओं में भी जीवन से जुडी बहुत सी रहस्यमयी बातें छिपी होती हैं।
जन्म कुंडली और हाथ की रेखाओं के समुचित विश्लेषण से हम वर्तमान और भविष्य के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। बस ज़रुरत है इस सर्व शक्तिमान ईश्वर और शास्त्र के प्रति विश्वास बनाये रखने की। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल

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