Friday, September 21, 2012

श्री गणेशजी के पूजन से होती हैं मनोकामनाएं पूरी

समस्त देवताओं में प्रथम पूज्य विघ्नहर्ता रिद्धि-सिद्धि विनायक श्री गणेशजी सुख, समृद्धि, धन, ज्ञान विद्या और शांति के प्रदाता हैं। श्री गणेशजी के बारह स्वरूपों की पूजा अर्चना की जाती है। ये स्वरुप हैं : गजानन, लम्बोदर, एकदंत, भाल चन्द्र, मंगल मूर्ति, चतुर्भुज, कृष्ण पंगाक्ष, सिन्दूर् वर्ण, वक्र् तुंड, शूपकर्ण , ओमकार और महाकाय।
वास्तु शास्त्र में श्री गणेशजी के विधि-विधान से पूजन और उनकी प्रतिमा अथवा तस्वीर अनुकूल दिशा में लगाने मात्र से भवन अथवा व्यावसायिक प्रतिष्ठान में वास्तु दोषों का शमन होता है।
श्रीगणेशजी के पूजन के लिए प्रत्येक बुधवार या हर माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन् शुभ और विशेष लाभ देने वाला माना गया है। श्री गणेशजी के पूजन के लिए दूब , मोदक, सिन्दूर, लाल कनेर, लोंग , सुपारी और अक्षत आदि का उपयोग करना चाहिए।
श्री गणेशजी के पूजन में तुलसी दल का प्रयोग नहीं किया जाता है। श्री गणेशजी का पूजन पूर्ण श्रद्धा और विश्यास के साथ करने से श्री गणेशजी अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
--- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषविद





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