Saturday, July 14, 2012

बरसात के पानी का करें संरक्षण

मानसून अब लगभग पूरे देश में आ चुका है. पिछले दिनों में देश के एक बड़े हिस्से में अच्छा-खासा पानी भी बरसा है. दिनों दिन गिरते भू गर्भ जल के स्तर को ऊँचा करने के लिए अब अच्छा समय है जब हम वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली को अनिवार्य रूप से अपनाएं और अपने-अपने स्तर से ऐसे प्रयास करें कि बरसात के दिनों में व्यर्थ नालिओं में बह जाने वाला बरसात का पानी ज़मीं के अन्दर चला जाये,

हम चाहे शहर में रहते हों अथवा ग्रामीण क्षेत्र में निवास करते हों, चंद तरीके अपना कर बरसात के पानी का संरक्षण कर सके हैं. इसके लिए यदि हमारे घर के आस-पास कोई तालाब, पोखर. बेकार व खाली पड़ी जगह है तो हम उसमें बरसात के पानी को एकत्र होने के लिए अवश्य ही प्रयास करें.हमरे द्वारा की गयी इस कोशिश से बरसात का पानी धीरे-धीरे ज़मीन के अन्दर प्रवेश करता रहेगा.

इसके अलावा यदि हमारे घर में अथवा घर के नजदीक कोई बग़ीचा या पार्क हे तो भी हम उसके माध्यम से बरसात के पानी का संरक्षण करके आने वाले पीढी को पानी की कमी से बचा सकते हैं.

बरसात के दिनों में बरसात के पानी का भण्डारण करके उसे हम घर-बाहर के रोज़मर्रा के कामों के लिए उपयोग में ला सकते हैं. बरसात के पानी का ऊपयोग हम फ़िल्टर करने के बाद उसे पेय जल के रूप में, घर की धुलाई व सफाई, छोटे-बड़े वाहनों की धुलाई आदि कामों में किया जा सकता है. बरसात के मौसम को यदि हम इस दृष्टिकोण से देखें तो निश्चय ही इसका महत्व बहुत ही कल्याणकारी है, प्रत्येक जागरूक नागरिक को चाहिए कि वह मानव जाति एवं कल्याण हित के बरसात के पानी के संरक्षण के इस पवित्र यज्ञ में अपनी आहुति अवश्य दें। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल




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