Wednesday, October 12, 2011

अधिकार और कर्तव्य

अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के  के दो पहलू  हैं.
 एक के बिना दूसरे का अस्तित्व कदापि संभव नहीं है.  जब हम अधिकारों की मांग करते हैं तो हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि हम अपने कर्तव्यों के पालन के प्रति भी गंभीर रहें. कर्तव्यों का पालन किये बिना अधिकारों की मांग करना अनुचित है. हमें यह भी अवश्य ध्यान रखना होगा कि एक व्यक्ति के अधिकार दूसरे व्यक्ति के लिए कर्तव्य होते हैं.  हमारे अधिकारों की मांग से किसी व्यक्ति को कोई नुक्सान भी नहीं होना चाहिए.
अधिकार हमें सरकार द्वारा बनाये गए नियम - कानूनों के माध्यम से प्राप्त होते हैं. यदि हम अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहते हैं तो हमें सभी आवश्यक नियम - कानूनों की जानकारी  होनी चाहिए. हमारी जागरूकता ही हमें अपने अधिकार और कर्तव्यों के प्रति सचेत और समझदार बना सकेगी इसमें कोई संदेह नहीं है.
 -- प्रमोदकुमार अग्रवाल