Monday, March 21, 2011

अस्तित्व को बचाना है तो .....

आधुनिकता का दंभ भरने वाला और सब कुछ हासिल करने की अभिलाषा रखने वाला इन्सान पूरी तरह बेबस है प्रकृति और उस सर्व  शक्तिमान ईश्वर की ताक़त के आगे जिसने इस संसार की रचना की है. जापान का संकट इस बात का सजीव प्रमाण है. फिर भी हम जागे नहीं है. प्रकृति के साथ लगातार खिलवाड़, भूमिगत जल का लगातार दोहन, वनों का कटाव, पवित्र नदियों एवं वायुमंडल को प्रदूषित करना .. आखिर ये सब क्या है? क्या यही आधुनिकता है? यदि हाँ तो ये समूचा संसार ही सुनामी, भूकंप और दूसरे प्राकृतिक प्रकोपों के मुहाने पर खड़ा है. कभी भी कोई भी देश प्राकृतिक प्रकोप का शिकार बनकर धवस्त हो सकता है. 
अभी भी वक़्त ज्यादा नहीं हुआ है.यदि हम अपनी धरती और प्रकृति को लेकर सचेत नहीं हुए तो परिणाम सभी को भुगतने होंगे. इस बारे में सोचिये और लग जाइये अपने अस्तित्व को बचाने के लिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल