Friday, March 18, 2011

...........यादगार रहे होली

होली स्नेह, प्रेम और सद्भाव का एकमात्र ऐसा त्यौहार है जिसमें तरह-तरह के रंग, गुलाल, अबीर, चन्दन आदि की भीनी-भीनी महक भी शामिल होकर हमारे ह्रदय को प्रफुल्लित कर देती है. होली का पावन पर्व हमें एक रहने और आपसी कटुता को भुलाकर एक दूसरे को प्यार के रंगों से सराबोर कर देने का पर्व है. हमें इस पर्व की महत्ता को स्वीकार करते हुए ऐसा कोई काम भूलकर भी नहीं करना चाहिए जिससे इस पावन पर्व को मनाने  का ध्येय ही समाप्त हो जाये. 
इस बार हम इस होली को इस प्रकार मनाएं कि ये पर्व हमेशा हमारी यादों में बसा रहे. होली जलाने के लिए हरे-भरे पेड़ों को काटने में कोई समझदारी की बात नहीं है. ऐसा करके हम अपने पर्यावरण को नुक्सान पहुंचा कर अपने ही पेरों पर कुल्हाडी मारते हैं. 
अलग-अलग स्थानों पर होलिका दहन करने की बजाय हम सामूहिक रूप से मिलकर होलिका दहन करें तो पर्यावरण की सुरक्षा हो सकती है. होली पर हानिकारक रसायन युक्त रंगों का प्रयोग करने की बजाय हमें प्राकृतिक  एवं केमिकल रहित रंगों का प्रयोग ही करना चाहिए.इससे हम होली खेलने के बाद इन केमिकल रंगों को साफ़ करने के नाम पर लाखों लीटर पीने के पानी की बर्बादी को रोक सकते हैं और अपने स्वास्थ्य की रक्षा भी कर सकते हैं.  गुब्बारों में पानी भरकर राहगीरों पर फेंकना, चलते हुए वाहनों पर रंग, गोबर, कीचड, गन्दा पानी आदि फेंकना घातक होता है. होली मनाने का असली मज़ा इसी में है कि हम पूर्ण रूप से सादगी के साथ सारे मतभेदों को भुलाकर इस त्यौहार का आनंद लें. तो आइये हम सब मिलकर मनाएं होली का ये पावन पर्व स्नेह और सद्भाव के साथ और महका दें इसके प्यार भरें रंगों को सभी के दिलों मे.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल