Tuesday, June 21, 2011

जीने का वास्तविक आनंद

जीवन को बेहतर ढंग से जीने के बहुत से तरीके हैं. हर कोई अपने-अपने ढंग से इस जीवन को जीना चाहता है. कुछ लोग सिर्फ अपने लिए जीते हैं तो कुछ लोग जीवन भर दूसरों की सेवा में लगे रहकर प्रसन्नता का अनुभव करते हैं, लेकिन वास्तव में जीने की सही परिभाषा क्या है यह बात कोई भी व्यक्ति निश्चित ढंग से नहीं कह सकता है. हर व्यक्ति अपने ही तरीके से जीवन को जीने की परिभाषा को व्यक्त करना चाहता है. लेकिन मेरे विचार से जीवन जीने का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि हम सुबह से शाम तक की जीवनचर्या को पूरा करने के बाद खा-पी कर सो जाएँ और फिर दूसरे दिन से वही पुरानी जीवनचर्या को अपनाएं. जीवन जीने का वास्तविक आनंद तो दूसरों की भलाई के लिए ही जीने में है. हमारे देश में ऐसे अनेक उदाहरण मिल जायेंगे जिसमें महान
पुरुषों का सारा जीवन समाज और देश के साथ-साथ पूरे विश्व के कल्याण के लिए ही बीत गया और उन्होंने उफ़ तक नहीं की. ऐसे महापुरुषों ने कभी भी सिर्फ नाम कमाने के लिए कोई काम नहीं किया बल्कि उन्होंने अपने ज़ेहन में सिर्फ और सिर्फ दूसरों की भलाई एवं कल्याण को ही रखा और उसी के अनुसार सर्वश्रेष्ठ कार्य किये. यदि हम भी अपनी ज़िन्दगी को बेहतर ढंग से जीना चाहते हैं और चाहते हैं कि हमें आत्म - संतुष्टी हासिल हो तो हमें भी ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे दूसरों को हित हो और किसी को भी हमारे कर्म,वचन एवं आचरण से किसी प्रकार का कोई कष्ट न पहुंचे.    -- प्रमोद कुमार अग्रवाल         

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