Saturday, May 21, 2011

मदद करने से ख़ुशी मिलती है

किसी की मदद करने के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि हमारे पास पर्याप्त धन-दौलत अथवा आर्थिक संसाधन हों. हम अपनी योग्यता, शिक्षा, मानसिक और शारीरिक क्षमता का प्रयोग  करते हुए भी  किसी ज़रुरतमंद की हर संभव मदद कर सकते हैं. यदि हमारे अन्दर किसी की मदद करने का वास्तव में ही ज़ज्बा है तो हम दिल से किसी की भी मदद करने के लिए आगे आ जाते हैं. मदद  करने के बहुत से तरीके हैं जिनमें हमारा कुछ भी खर्च नहीं होता जैसे - किसी अनपढ़ व्यक्ति को पढाना, सड़क पार कर रहे किसी बुज़ुर्ग, दृष्टिहीन, छोटे बच्चे आदि को सड़क पार कराना, प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाना, दुखी अथवा बीमार व्यक्ति को सबकुछ अच्छा होने की
दिलासा देना  आदि. 
इसमें कोई संदेह नहीं कि सच्चे   दिल से किसी की मदद करने से जो ख़ुशी मिलती है वह किसी दूसरे कार्य से हासिल नहीं होती. यदि हम वास्तव में ही किसी की मदद करना चाहते हैं तो हमें अपने नाम के प्रचार के चक्कर में न पड़कर अपने शरीर, मन  और योग्यता का भरपूर उपयोग  करते हुए सभी ज़रुरतमंद की मदद करने के लिए सदैव  तत्पर  रहना चाहिए.  -- प्रमोदकुमार अग्रवाल     
                                                                                                                    .                   

No comments: