Saturday, April 23, 2011

मन की सुन्दरता

सुन्दरता की कोई एक निश्चित परिभाषा नहीं है. अलग-अलग व्यक्ति की नज़र में सुन्दरता की अपनी परिभाषा होती है. किसी की नज़र में काले और घुंघराले बाल, लम्बा या नाटा क़द सुन्दर होता है तो कोई बड़ी बड़ी आँखों  वाले गोरे व्यक्ति  को पसंद  करता है. लेकिन क्या वास्तव में तन की सुन्दरता ही सच्ची सुन्दरता है. इसका उत्तर है  नहीं .सुन्दरता तन की नहीं मन की होनी चाहिए. जो लोग मन से सीधे-सच्चे, कोमल  और  सरल स्वभाव के होते हैं, वही मन से सुन्दर कहलाते हैं. ऐसे व्यक्तिओं से जब भी हम मिलते हैं  हार्दिक प्रसन्नता का अहसास होता है.
मन की सुन्दरता को हम माँ की ममता के रूप में देख सकते हैं. अपने बच्चे के मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम होने के बाद भी वह अपने सामान्य बच्चों की तरह उस बच्चे को भी पूर प्यार और दुलार देती है. मन की सुन्दरता में बहुत  से गुणों का समावेश होता है जैसे - विनम्रता, कार्य के प्रति निष्ठा, हंसमुख स्वभाव, स्नेह एवं प्रेमभाव आदि-आदि. हमें याद रखना चाहिए कि वास्तविक सुन्दरता का अर्थ है हमारी आन्तरिक सुन्दरता जिसे हम सिर्फ अपने व्यक्तित्व के माध्यम से व्यक्त कर सकते हैं. तन की सुन्दरता कुछ ही समय के लिए होती है जबकि मन की सुन्दरता स्थाई होती है और हमेशा दूसरों के दिलों में हमारा एक महत्वपूर्ण स्थान बनती है. -- प्रमोदकुमार अग्रवाल
       

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