Thursday, April 21, 2011

जल ही जीवन है.

जल ही जीवन है. हम सब इस बात को अच्छी तरह से जानते हुए भी जल की बर्बादी करते हैं. जल को बर्बाद करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है. भूमिगत जल का निरंतर दोहन करके हम प्रकृति से प्राप्त इस बहुमूल्य सम्पदा को नष्ट करके अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए समस्या उत्पन्न कर रहे हैं. हमें याद रखना चाहिए की जल के भंडार सीमित नहीं हैं. हमें जल के प्राकृतिक स्रोतों को सभी तरह के प्रदूषण से बचने के लिए मुहिम  छोडनी चाहिए. जल के संरक्षण के लिए भी हम सभी को आगे आने की आवश्यकता है. इसके लिए वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली को अपनाये जाने की भी जरुरत है.ग्रामीण क्षत्रों में पुराने और बंद पड़े तालाबों एवं पोखरों की सफाई कराकर और उन्हें गहरा करके उनमें बरसात के पानी का भण्डारण करना चाहिए. ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगाकर भी हम अपने पर्यावरण को हरा-भरा बनाकर पानी की ज़रूरत को पूरा कर सकते हैं. हमें जल को बचाने के इस अभियान का एक हिस्सा बनकर समाज, देश और समस्त संसार के लिए जल के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करें. -- प्रमोदकुमार अग्रवाल

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