Monday, March 21, 2011

अस्तित्व को बचाना है तो .....

आधुनिकता का दंभ भरने वाला और सब कुछ हासिल करने की अभिलाषा रखने वाला इन्सान पूरी तरह बेबस है प्रकृति और उस सर्व  शक्तिमान ईश्वर की ताक़त के आगे जिसने इस संसार की रचना की है. जापान का संकट इस बात का सजीव प्रमाण है. फिर भी हम जागे नहीं है. प्रकृति के साथ लगातार खिलवाड़, भूमिगत जल का लगातार दोहन, वनों का कटाव, पवित्र नदियों एवं वायुमंडल को प्रदूषित करना .. आखिर ये सब क्या है? क्या यही आधुनिकता है? यदि हाँ तो ये समूचा संसार ही सुनामी, भूकंप और दूसरे प्राकृतिक प्रकोपों के मुहाने पर खड़ा है. कभी भी कोई भी देश प्राकृतिक प्रकोप का शिकार बनकर धवस्त हो सकता है. 
अभी भी वक़्त ज्यादा नहीं हुआ है.यदि हम अपनी धरती और प्रकृति को लेकर सचेत नहीं हुए तो परिणाम सभी को भुगतने होंगे. इस बारे में सोचिये और लग जाइये अपने अस्तित्व को बचाने के लिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल 

Friday, March 18, 2011

...........यादगार रहे होली

होली स्नेह, प्रेम और सद्भाव का एकमात्र ऐसा त्यौहार है जिसमें तरह-तरह के रंग, गुलाल, अबीर, चन्दन आदि की भीनी-भीनी महक भी शामिल होकर हमारे ह्रदय को प्रफुल्लित कर देती है. होली का पावन पर्व हमें एक रहने और आपसी कटुता को भुलाकर एक दूसरे को प्यार के रंगों से सराबोर कर देने का पर्व है. हमें इस पर्व की महत्ता को स्वीकार करते हुए ऐसा कोई काम भूलकर भी नहीं करना चाहिए जिससे इस पावन पर्व को मनाने  का ध्येय ही समाप्त हो जाये. 
इस बार हम इस होली को इस प्रकार मनाएं कि ये पर्व हमेशा हमारी यादों में बसा रहे. होली जलाने के लिए हरे-भरे पेड़ों को काटने में कोई समझदारी की बात नहीं है. ऐसा करके हम अपने पर्यावरण को नुक्सान पहुंचा कर अपने ही पेरों पर कुल्हाडी मारते हैं. 
अलग-अलग स्थानों पर होलिका दहन करने की बजाय हम सामूहिक रूप से मिलकर होलिका दहन करें तो पर्यावरण की सुरक्षा हो सकती है. होली पर हानिकारक रसायन युक्त रंगों का प्रयोग करने की बजाय हमें प्राकृतिक  एवं केमिकल रहित रंगों का प्रयोग ही करना चाहिए.इससे हम होली खेलने के बाद इन केमिकल रंगों को साफ़ करने के नाम पर लाखों लीटर पीने के पानी की बर्बादी को रोक सकते हैं और अपने स्वास्थ्य की रक्षा भी कर सकते हैं.  गुब्बारों में पानी भरकर राहगीरों पर फेंकना, चलते हुए वाहनों पर रंग, गोबर, कीचड, गन्दा पानी आदि फेंकना घातक होता है. होली मनाने का असली मज़ा इसी में है कि हम पूर्ण रूप से सादगी के साथ सारे मतभेदों को भुलाकर इस त्यौहार का आनंद लें. तो आइये हम सब मिलकर मनाएं होली का ये पावन पर्व स्नेह और सद्भाव के साथ और महका दें इसके प्यार भरें रंगों को सभी के दिलों मे.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल 

Wednesday, March 16, 2011

कभी भी करा सकते हैं गैस की बुकिंग, डिलीवरी होगी 48 घंटे मैं

समय पर गैस की बुकिंग और डिलीवरी अथवा आपूर्ति न होने की समस्या से प्राय: अधिकांश ग्राहक परेशान रहते हैं. गैस कम्पनियों से सम्बद्ध वितरक द्वारा ग्राहकों की गैस सिलेंडरों की बुकिंग अमूमन इक्कीस दिनों के बाद तथा डिलीवरी चार से दस दिनों में की जाती है. कभी-कभी तो यह अवधि इससे भी ज्यादा हो जाती है. जबकि गैस कम्पनियों द्वारा इस तरह का कोई नियम नहीं बनाया गया है. 
इस सम्बन्ध में 'न्यूज़लाइन फीचर्स एंड प्रेस एजेंसी '  के संपादक प्रमोदकुमार अग्रवाल  द्वारा इन्डियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड, नोएडा से सूचना का अधिकार अधिनियम,2005 के अंतर्गत सूचनाएँ मांगी गयीं. कम्पनी के उप-महा प्रबंधक एवं जन सूचना अधिकारी वाई.के गुप्ता ने अपने पत्र संख्या : UPSO  - II  / RTI  / 1879  दिनांक : 14  फरवरी,2011  के माध्यम से अवगत कराया गया है  कि गैस रिफिल की बुकिंग के लिए कोई समय सीमा नहीं है. ग्राहक को उसकी वास्तविक घरेलू  खाना पकाने की ज़रूरत के अनुरूप गैस की आपूर्ति की जाती है. बुकिंग करने के बाद अवकाश एवं अपवादी स्थितियों के दिनों को छोड़ कर सामान्यतया 48  घंटे के अन्दर गैस की आपूर्ति हो जानी चाहिए. फिर भी गैस वितरक के पास कराई  गयी बुकिंग की वरीयता क्रम एवं सिलेंडर की उपलब्धता के अनुरूप ग्राहकों को गैस की आपूर्ति की जाती है. गैस की बुकिंग और आपूर्ति के सम्बन्ध में यदि किसी ग्राहक को किसी प्रकार की कोई शिकायत हो तो वह अपनी शिकायत गैस कम्पनी के क्षेत्रीय प्रबंधक को अथवा गैस कम्पनी के टोल फ्री नंबर 1800 2333 555 पर कर सकता है.  

Saturday, March 5, 2011

हॉकरों को कंट्रोल करेंगी नगर पालिकाएं

सार्वजनिक मार्गों, सडकों और गलियों में घूम-घूम कर अथवा एक जगह रहकर अपने माल को बेचने वाले हॉकरों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (जी) के अंतर्गत अपना व्यवसाय अथवा रोज़गार करने का मूल अधिकार प्राप्त है. वहीँ दूसरी ओर  भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (डी) के तहत  आम जनता को भी उन्ही सार्वजनिक मार्गों, सडकों और गलियों में बिना किसी बाधा के आने-जाने का अधिकार दिया गया है. देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एक रिट याचिका का निस्तारण करते हुए यह मत व्यक्त किया है कि बहुसंख्य जनता के हित ओर अधिकारों को ध्यान में रखते हुए नगर पालिकाएं इन हॉकरों को विनियमित (कंट्रोल) करने ओर उनके द्वारा सार्वजनिक मार्गों, सडकों और गलियों को अवरुद्ध करने से रोकने के लिए योजनायें बनाकर लागू कर सकती हैं. (2010 एआईआर एससीडब्ल्यू  6885  )

बिजली के बकाया रकम की वसूली

यदि  किसी उद्योग को रजिस्टर्ड बैनामा के द्वारा खरीददार के पक्ष में ट्रांसफर कर दिया गया हो तो उस उद्योग से सम्बंधित पुराने चले आ रहे बिजली के बिल की रकम की वसूली उस नए खरीददार से नहीं की जा सकती है. बिजली विभाग  पुराने बिजली के बकाया रकम की वसूली केवल उस उद्योग के विक्रेता  अर्थात  मूल बकायेदार से ही करने का अधिकारी है. (2010 (2)ऐडीजे७)