Monday, February 14, 2011

जीना बेहतर ढंग से

अपने जीवन को हर कोई बेहतर ढंग से जीने की लालसा रखता है और इसके लिए प्रयास भी करता है. बेहतर जीवन की क्या परिभाषा हो, यह हमारी अपनी सोच पर निर्भर करती है. कोई पैसे को तो,कोई भौतिक सुख सुविधाओं को जीवन के लिए आवश्यक मानता है, लेकिन वास्तव में बेहतर ढंग से जीना वही है जिसमें ईमानदारी, सच्चाई, सद्गुण, परोपकार जैसे गुण हमारे अन्दर मौजूद हों. हम जो भी काम करें उसमें हमेशा दूसरों का हित हो. अपने  किसी भी कार्य से हम किसी को कोई कष्ट न पहुंचाए. कहा भी गया है कि जीना वही है जो औरों के काम आये. हम इस बारे में विचार करें और अपने जीवन में इन बातों को आत्मसात करने की कोशिश करें.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल   

Friday, February 11, 2011

गरीब मरीजों को मुफ्त उपचार की सुविधा

उत्तर प्रदेश में अब गंभीर बीमारियों जैसे ह्रदय, केंसर, गुर्दे, यकृत, हड्डी आदि के इलाज में धन की कमी कोई समस्या नहीं बनेगी. राज्य आरोग्य द्वारा इन बीमारियों के उपचार के लिए ज़रुरतमंदों को 35  हज़ार से 1.5  लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी. यह सुविधा केवल गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले बीपीएल कार्ड धारकों को अथवा 24 हज़ार रुपये वार्षिक आय वाले परिवारों को ही मिलेगी. इसके अलावा प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत भी गरीब रोगियों को मुफ्त उपचार के लिए भी  हेल्प लाइन नंबर 09198004444  की शुरुआत की गयी है. इस नंबर को डायल करने पर नजदीक के निजी अस्पताल के डॉक्टर के मोबाइल पर एसएम्एस एलर्ट आ जायेगा और अस्पताल से तुरंत एक एम्बुलेंस फोन करने वाले व्यक्ति के घर भेज दी जाएगी. यह सेवा पूर्ण रूप से निःशुल्क होगी और इसका कोई भी चार्ज मरीज से नहीं लिया जायेगा. 

विद्युत् विभाग हर्जाना अदा करने के लिए उत्तरदायी

हाई पॉवर क्षमता वाले विद्युत् तारों की लाइन को आम जनता के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाये रखने की ज़िम्मेदारी विद्युत् विभाग की है. यदि विभाग की लापरवाही एवं रख-रखाव में कमी के कारण किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है अथवा उसे शारीरिक क्षति पहुँचती है तो विद्युत् विभाग पीड़ित पक्ष को समुचित हर्जाना अदा करने के लिए उत्तरदायी  है.(2010 /4 /133 )

Thursday, February 10, 2011

सादगी के साथ मनाए निजी कार्यक्रम

विवाह शादी एवं अन्य मांगलिक अवसरों पर हम लोग तेज आवाज में लाउडस्पीकर तथा दूसरे वाद्य यन्त्र बजाते हैं और अधिक शोर करने वाली आतिशबाजी का प्रदर्शन करते हैं. ऐसा करने से पहले हम यह नहीं सोचते कि हमारे इस कार्य से किसी को कष्ट पहुचता है. हमें चाहिए कि हम अपने निजी स्तर पर आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों को अवश्य मनाये लेकिन दूसरे की सुविधाओ का भी ध्यान रखें. हमें कोई अधिकार नहीं है कि हम दूसरो की असुविधा अथवा परेशानी का कारण बन जाएँ. हम अपने कार्यक्रम सादगी के साथ बिना किसी शोर शराबे के ही मनाएंगे  .
--प्रमोद कुमार अग्रवाल