Sunday, October 16, 2011

सफल होने के लिए ...

जीवन में सफल होने के  बहुत से तरीके हैं और लोग अपने-अपने ढंग से उनका उपयोग करके जीते हैं.  यहाँ हम कुछ ऐसी बाते बता रहे हैं जो बहुत आसान हैं और हम सब उनके बारे में जानते भी हैं. 
सबसे पहले हम अपने जीवन को अनुशासित बनायें और पूर्ण रूप से अनुशासन के दायरे में रहकर ही अपना कार्य करें 
विश्वास किसी भी सफलता की बुनियादी नीव है. सफल होने के लिए हमें अपने आप पर और अपनी प्रतिभा एवं अपनी शक्तियों पर भरोसा करना चाहिए. तन और मन से पूर्ण रूप से स्वस्थ होना भी जीवन में सफल होने का महत्वपूर्ण मन्त्र है. इसके लिए हमें स्वास्थ्य के प्राकृतिक  नियमों का पालन अवश्य करना चाहिए. 
जीवन में सफल होने के लिए यह भी अनिवार्य है कि हम अपनी प्राथमिकताएं निर्धारित करते समय भावुकता का परित्याग कर दें. अपने काम के दौरान सोच-समझ कर पूरी सूझ-बूझ से और अपनी योग्यता से उचित निर्णय लें. जो भी काम हाथ में लें उसे जिम्मेदारी के साथ चुनौती के रूप में पूरा करने का प्रयास करें. सफलता के लिए इन मूल मन्त्रों को यदि हम अपने जीवन में अपनाएं  तो कोई कारण नहीं कि हम जीवन में सफलता की ऊंचाइयों पर न पहुंचें. -- प्रमोदकुमार अग्रवाल
 

Wednesday, October 12, 2011

अधिकार और कर्तव्य

अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के  के दो पहलू  हैं.
 एक के बिना दूसरे का अस्तित्व कदापि संभव नहीं है.  जब हम अधिकारों की मांग करते हैं तो हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि हम अपने कर्तव्यों के पालन के प्रति भी गंभीर रहें. कर्तव्यों का पालन किये बिना अधिकारों की मांग करना अनुचित है. हमें यह भी अवश्य ध्यान रखना होगा कि एक व्यक्ति के अधिकार दूसरे व्यक्ति के लिए कर्तव्य होते हैं.  हमारे अधिकारों की मांग से किसी व्यक्ति को कोई नुक्सान भी नहीं होना चाहिए.
अधिकार हमें सरकार द्वारा बनाये गए नियम - कानूनों के माध्यम से प्राप्त होते हैं. यदि हम अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहते हैं तो हमें सभी आवश्यक नियम - कानूनों की जानकारी  होनी चाहिए. हमारी जागरूकता ही हमें अपने अधिकार और कर्तव्यों के प्रति सचेत और समझदार बना सकेगी इसमें कोई संदेह नहीं है.
 -- प्रमोदकुमार अग्रवाल       

Sunday, September 4, 2011

कार्य के प्रति समर्पण ही सफलता का पर्याय

हर इंसान में कोई-न-कोई  जन्मजात प्रतिभा होती है जो उसके बड़े होने पर अथवा उसके जागृत करने पर अवश्य ही उसे ऊंचाइयों  की ओर ले जाती है. बहुत से ऐसे व्यक्ति हमें अपने जीवन में मिल जाएंगे जो साधारण परिवार में होने और कोई विशेष सुविधाएं न मिलने के बावजूद तरक्की के मार्ग पर स्वतः ही बढ़ते चले जाते हैं और कभी पीछे  मुड कर नहीं देखते. ऐसे  इंसानों को मिली सफलता का राज़  उनकी जन्मजात  प्रतिभा तो होती ही है लेकिन जीवन में सफलता हासिल करने के लिए उनके द्वारा सच्चे मन से किये गए प्रयास और उनकी अथक मेहनत भी सम्मिलित होते हैं.
जीवन में सफलता पाने का कोई आसान रास्ता कहीं भी नहीं है और न ही कोई ऐसा मन्त्र या तरीका है जो इंसान को बिना मेहनत के बुद्धिमान अथवा धनवान बना दे. यदि कोई व्यक्ति इस तरह का दावा करता है तो इसका मतलब यह है कि वह उसे सिर्फ गुमराह करके अपना स्वार्थ सिद्ध करना चाह रहा है.ऐसे  इंसानों से सावधान रहने और उनके बनाये जाल में न फसने में ही भलाई है.
हमें सदैव इस बात को अपने दिमाग में रखना चाहिए कि जीवन में तरक्की पानी है तो हमें सच्ची लगन और मेहनत से कठोर परिश्रम करना ही होगा. परिश्रम करने का अर्थ यह है कि हम अपने कार्य को समय पर, पूरी निष्ठां, आत्मविश्वास और ईमानदारी के   साथ पूरा  करें तथा काम में किसी तरह की कोई लापरवाही न बरतें. अपने कार्य के प्रति हमारा समर्पण ही हमारी सफलता का पर्याय है.-- प्रमोदकुमारअग्रवाल 

Sunday, August 21, 2011

भ्रष्टाचार की समस्या

देश में भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए जन लोकपाल कानून बनाये जाने की मांग को लेकर अन्ना हजारे और उनके साथियों द्वारा  चलाये जा रहे आन्दोलन से  पूरे देश की जनता के एकजुट होकर आन्दोलन में बिना किसी स्वार्थ के शामिल हो जाने से इतना तो स्पष्ट हो  ही  गया है की  भारत की   जनता को अब और अधिक समय तक बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता है. आज स्थिति ये है कि हर वह व्यक्ति जो सरकारी सेवा में  है , ज़रा सा भी मौका मिलते ही अपने पद का दुरूपयोग करते हुए   अपने घर और बैंक बेलेंस को जल्दी-जल्दी भर लेना चाहता है. मीडिया की जागरूकता की वजह से यदि मामला खुल जाता है तो भ्रष्टाचारियों को जेल भिजवा दिया जाता है वरना तो फिर वे  मज़े कर ही रहे हैं.
भ्रष्टाचार  की समस्या ने न सिर्फ योग्यता का गला घोटा है बल्कि बहुत सारी जटिल समस्यायों को भी जन्म दिया है.  वैसे भी  हमारे देश में भ्रष्टाचार के लिए दोषी व्यक्तिओं को सजा दिलाये जाने हेतु कई कानून हैं , लेकिन इनके प्रभावी ढंग से लागू न होने से इस समस्या पर अंकुश नहीं लग सका है. भ्रष्टाचार को  देश से पूरी तरह समाप्त करने के लिए अवाम की आवाज़ को अब सरकार को समझ लेना चाहिए और जनता को यह भरोसा दिला देना चाहिए कि सरकार भी पूरी ईमानदारी से भ्रष्टाचार की समस्या को समाप्त कर देगी.  
यदि हमारे देश के नेता वास्तव में ही देश के प्रति बफादार हैं और देश का हित चाहते हैं तो उन्हें अब   भ्रष्टाचार की समस्या को देश से पूरी तरह  समाप्त करने की मुहिम में आगे आकर जनता की आवाज़ बन जाना चाहिए और जनता को यह दिखा देना चाहिए कि वे भी इस देश के ईमानदार और निष्ठावान नागरिक हैं. -- प्रमोद कुमार अग्रवाल

Tuesday, July 19, 2011

RIGHT TO INFORMATION ACT

RIGHT TO INFORMATION ACT, 2005 IS USEFUL FOR ALL PERSONS WHO WANT TO GET ANY INFORMATION FROM ANY GOVERNMENT DEPARTMENT , CORPORATION ,  LOCAL BODY , GOVERNMENT AIDED SOCIAL ORGANISATION  AND OTHERS.

INFORMATIONS CAN BE OBTAINED FROM ANY DEPARTMENT  BY APPLYING WITH REQUISITE  FEE OF RUPEE 10 /- THROUGH DEMAND DRAFT, INDIAN POSTAL ORDER OR CASH.

CONCERN DEPARTMENT IS BOUND TO GIVE THE INFORMATIONS WITHIN THIRTY DAYS. IF APPLICANT CAN NOT GET THE INFORMATIONS OR HE GETS WRONG OR INCOMPLETE INFORMATION,  HE MAY FILE AN APPEAL TO THE APPELLATE AUTHORITY OF THE DEPARTMENT WITHIN THIRTY DAYS. IN CASE OF URGENT MATTER THE TIME LIMIT OF INFORMATION IS 48 HOURS.

IF THE INFORMATIONS NOT RECEIVED BY THE APPLICANT  THEN HE  MAY FILE A COMPLAINT TO THE STATE INFORMATION COMMISSION OF HIS STATE IN CASE OF STATE GOVERNMENT MATTER. IN CASE OF CENTRAL GOVERNMENT MATTER, COMPLAINT MAY FILE BEFORE NATIONAL INFORMATION COMMISSION, NEW DELHI.

THE PUBLIC INFORMATION OFFICER MAY BE PUNISHED BY THE INFORMATION COMMISSION IF HE IS FOUND GUILTY. THE AMOUNT OF FINE MAY EXTEND TWO HUNDRED FIFTY RUPEES PER DAY TO TOTAL AMOUNT RS. 25000/-  --- PRAMOD KUMAR AGRAWAL

Saturday, July 16, 2011

रेलवे नुकसान की भरपाई करने के लिए उत्तरदायी

आरक्षित रेलवे बोगी में यात्रा करने के दौरान यदि किसी यात्री का सामान चोरी हो जाता है और रेलवे प्रशासन तथा पुलिस बल द्वारा चोर को पकड़ने या चोरी का माल बरामद करने हेतु रेल रोकने का कोई प्रयास नहीं किया जाता है तो रेलवे प्रशासन यात्री को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए उत्तरदायी है. - प्रमोद कुमार अग्रवाल

Wednesday, July 6, 2011

काले धन की समस्या

आजकल काले धन को लेकर देश भर में काफी हो हल्ला मचा हुआ है. माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी इस सम्बन्ध में सरकार को आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए गए हैं. काले धन की समस्या कोई नयी नहीं है बल्कि समाज का एक बड़ा तबका बेईमानी से अर्जित धन को छुपाकर रखता चला आ रहा है जिसे आयकर विभाग में घोषित नहीं किया जाता है. यही धन काला  धन के रूप में देश से बाहर जमा कर दिया जाता है. काला धन विदेशों से भारत में वापस आना ही चाहिए  क्योंकि यह धन हमारे देश की संपत्ति है और उस पर देश का ही हक़ है. भारत से बाहर जमा इस धन को वापस लाने के लिए सरकार के साथ-साथ उन लोगो को भी ईमानदारी से प्रयास करने चाहिए जिन्होंने इसे भारत से बाहर के देशो में जमा कराया है. काला धन वापसी से निश्चय ही हमारे देश का सर्वांगीण विकास हो सकेगा, इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए. -- प्रमोद कुमार अग्रवाल




Friday, July 1, 2011

सीमा में रहकर ही करें कार्य

"" ज्ञान की कोई सीमा नहीं होती, लेकिन व्यक्ति को सीमा का ज्ञान होना  चाहिए. "" 
 किसी महापुरुष  का यह कथन इस तथ्य को स्पष्ट करता है कि हमें ज्ञान अर्जित करने के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए, लेकिन हम जो भी कार्य करें उसे अपनी सीमा में रहकर ही करें. सीमा से बाहर जाकर किया गया कोई भी कार्य हमेशा तकलीफदेह ही होता है.
 किसी कार्य की सीमा क्या है यह बात उस कार्य की प्रकृति एवं परिस्थितियों पर निर्भर  करती  है. जीवन में सफलता पाने के लिए यह भी एक उपयोगी मन्त्र है और इस मन्त्र का उपयोग हमें सोच-समझ कर अपने विवेक से करना चाहिए. -- प्रमोद कुमार अग्रवाल    

Tuesday, June 28, 2011

मृत्यु वरदान भी है

मृत्यु जीवन का अटल सत्य है. जिसका जन्म हुआ है उसकी मृत्यु निश्चित है. गीता में कहा गया है कि मृत्यु शरीर की होती है, आत्मा की नहीं. शरीर के निष्प्राण होने के बाद आत्मा एक शरीर को छोड़कर नए शरीर में प्रवेश करती है. मृत्यु की इस वास्तविकता को कोई नहीं जान सका है. मृत्यु कुछ लोगों के लिए सजा है तो कुछ लोगों के लिए वरदान है. मृत्यु उन लोगों के लिए सजा है जिनका सारा जीवन पाप कर्मों में बीता है और उन्होंने जीवन भर धोखा-धडी, छल-कपट, बेईमानी, व्यभिचार जैसे गलत कार्य  किये हैं, वहीँ दूसरी ओर मृत्यु उन लोगों के लिए वरदान है जिन्होनें अपना जीवन दूसरों की सेवा, कल्याण और भलाई में बिताया है.
मृत्यु उन लोगों के लिए भी वरदान है जो जीवन भर ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ सत्यवादी और सत्चरित्र वाले रहें हैं. ऐसे व्यक्तिओं की मृत्यु समाज के लिए वरदान स्वरुप है क्योंकि इनके मरने के बावजूद समाज इन्हें  हमेशा याद रखता है और उनके कार्यों  को अनुकरणीय समझते हुए उनके अनुसार चलने के लिए स्वयं उत्प्रेरित होता है. जीवन  को यादगार बनाने का मन्त्र हमारे अपने पास है. हम अपने आप को ईमानदार, समोजोपयोगी ,चरित्रवान, स्पष्टवादी, कर्तव्यनिष्ठ और सर्वगुण संपन्न बनायें, हम हमेशा दूसरों के हित के लिए समर्पित रहें. हमारी इस  कोशिश से  निश्चय ही हमारी मृत्यु  सार्थक और सभी के लिए वरदान  सिद्ध हो सकेगी, इसमें किसी को कोई संदेह नहीं होना चाहिए. - प्रमोद कुमार  अग्रवाल 

Saturday, June 25, 2011

भ्रष्टाचार की समस्या

इन दिनों देश में  भ्रष्टाचार के  खिलाफ   काफी कुछ कहा सुना जा रहा है.  भ्रष्टाचार को लेकर सरकार, आम जनता एवं बुद्धिजीविओं  में गरमा-गरम बहस भी जारी है.  भ्रष्टाचार का मुद्दा कोई नया नहीं है भ्रष्टाचार के कारण हमारे समाज में दूसरी बहुत सी समस्याएं जैसे दहेज़ का लेन-देन.अपराध, रिश्वतखोरी आदि जन्म लेने लगती हैं.  ऐसा नहीं है कि इस समस्या से सिर्फ हमारा ही देश प्रभावित है, बल्कि संसार के बहुत सारे देशों  में  भ्रष्टाचार की समस्या  से वहां के नागरिक पीड़ित हैं.  भ्रष्टाचार की समस्या की जड़ को खोजा जाये तो हम पाएंगे कि कहीं न कहीं इस समस्या को बढ़ाने में हमारा ही योगदान रहा है. देखने में आता है कि अपने निहित स्वार्थों को पूरा करने और अपने काम को दूसरों से पहले कराने के लिए हम सम्बंधित व्यक्ति को अनुचित तरीका अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं. बाद में हमारी यही आदत उस व्यक्ति के लिए लालच बन जाती है और वह  किसी भी काम को करने के लिए किसी न किसी रूप में रिश्वत की मांग करने लग जाता है. यदि हम वास्तव में ही  भ्रष्टाचार को जड़ से समाप्त करना चाहते हैं तो हमें अपने आप को ईमानदार बनाना होगा, अपनी स्वार्थपरक मानसिकता का परित्याग करना होगा, रिश्वत देने व रिश्वत लेने की गैर कानूनी प्रथा को समाप्त करने के लिए पहल करनी होगी.  भ्रष्टाचार जैसी सामाजिक बुराई को दूर करने की हमारी ये कोशिश यक़ीनन देश व समाज को प्रगति के पथ पर ले जाएगी. -- प्रमोदकुमार अग्रवाल

Tuesday, June 21, 2011

जीने का वास्तविक आनंद

जीवन को बेहतर ढंग से जीने के बहुत से तरीके हैं. हर कोई अपने-अपने ढंग से इस जीवन को जीना चाहता है. कुछ लोग सिर्फ अपने लिए जीते हैं तो कुछ लोग जीवन भर दूसरों की सेवा में लगे रहकर प्रसन्नता का अनुभव करते हैं, लेकिन वास्तव में जीने की सही परिभाषा क्या है यह बात कोई भी व्यक्ति निश्चित ढंग से नहीं कह सकता है. हर व्यक्ति अपने ही तरीके से जीवन को जीने की परिभाषा को व्यक्त करना चाहता है. लेकिन मेरे विचार से जीवन जीने का मतलब सिर्फ यह नहीं है कि हम सुबह से शाम तक की जीवनचर्या को पूरा करने के बाद खा-पी कर सो जाएँ और फिर दूसरे दिन से वही पुरानी जीवनचर्या को अपनाएं. जीवन जीने का वास्तविक आनंद तो दूसरों की भलाई के लिए ही जीने में है. हमारे देश में ऐसे अनेक उदाहरण मिल जायेंगे जिसमें महान
पुरुषों का सारा जीवन समाज और देश के साथ-साथ पूरे विश्व के कल्याण के लिए ही बीत गया और उन्होंने उफ़ तक नहीं की. ऐसे महापुरुषों ने कभी भी सिर्फ नाम कमाने के लिए कोई काम नहीं किया बल्कि उन्होंने अपने ज़ेहन में सिर्फ और सिर्फ दूसरों की भलाई एवं कल्याण को ही रखा और उसी के अनुसार सर्वश्रेष्ठ कार्य किये. यदि हम भी अपनी ज़िन्दगी को बेहतर ढंग से जीना चाहते हैं और चाहते हैं कि हमें आत्म - संतुष्टी हासिल हो तो हमें भी ऐसे कार्य करने चाहिए जिससे दूसरों को हित हो और किसी को भी हमारे कर्म,वचन एवं आचरण से किसी प्रकार का कोई कष्ट न पहुंचे.    -- प्रमोद कुमार अग्रवाल         

Wednesday, June 8, 2011

प्रदूषणमुक्त धरती से बचेगा जीवन

पांच जून को हम सबने विश्व  पर्यावरण दिवस मनाया और अपने पर्यावरण को हरा-भरा और प्रदूषणमुक्त बनाये रखने का संकल्प लिया. संकल्प लेने मात्र से ही अपने पर्यावरण को   प्रदूषणमुक्त बनाये  रखना कदापि संभव नहीं है. इसके लिए हमें वास्तव में ऐसे  कदम उठाने की आवश्यकता है जिससे हमारा पर्यावरण प्रदूषणमुक्त  रहे और हम शुद्ध हवा में सांस  ले सकें. हमें याद रखना चाहिए  कि जब तक  हमारी धरती  है, हमारा अस्तित्व है.  अपनी धरती को हरा-भरा बनाने के लिए वृहद् वृक्षारोपण किया  जाना आवश्यक है. जल के प्राकृतिक स्रोतों को  प्रदूषणमुक्त बनाने की पहल किया जाना, जल के अनावश्यक दोहन को रोकना, वायु प्रदुषण पर अंकुश लगाना, घातक रसायनों के अनुचित  प्रयोग पर पाबन्दी लगाना समय की ज़रुरत है.  यदि हम वास्तव में अपने पर्यावरण  के शुभ चिन्तक हैं तो हमें  सिर्फ बातें करने या फिर बैठकें अथवा सम्मेलन आयोजित करने की बजाय अपने पर्यावरण  को  प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए स्वयं आगे आना होगा और अपने तथा आने वाली पीढी के जीवन को बचाना होगा. -- प्रमोद कुमार अग्रवाल.

Saturday, May 21, 2011

मदद करने से ख़ुशी मिलती है

किसी की मदद करने के लिए यह ज़रूरी नहीं है कि हमारे पास पर्याप्त धन-दौलत अथवा आर्थिक संसाधन हों. हम अपनी योग्यता, शिक्षा, मानसिक और शारीरिक क्षमता का प्रयोग  करते हुए भी  किसी ज़रुरतमंद की हर संभव मदद कर सकते हैं. यदि हमारे अन्दर किसी की मदद करने का वास्तव में ही ज़ज्बा है तो हम दिल से किसी की भी मदद करने के लिए आगे आ जाते हैं. मदद  करने के बहुत से तरीके हैं जिनमें हमारा कुछ भी खर्च नहीं होता जैसे - किसी अनपढ़ व्यक्ति को पढाना, सड़क पार कर रहे किसी बुज़ुर्ग, दृष्टिहीन, छोटे बच्चे आदि को सड़क पार कराना, प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाना, दुखी अथवा बीमार व्यक्ति को सबकुछ अच्छा होने की
दिलासा देना  आदि. 
इसमें कोई संदेह नहीं कि सच्चे   दिल से किसी की मदद करने से जो ख़ुशी मिलती है वह किसी दूसरे कार्य से हासिल नहीं होती. यदि हम वास्तव में ही किसी की मदद करना चाहते हैं तो हमें अपने नाम के प्रचार के चक्कर में न पड़कर अपने शरीर, मन  और योग्यता का भरपूर उपयोग  करते हुए सभी ज़रुरतमंद की मदद करने के लिए सदैव  तत्पर  रहना चाहिए.  -- प्रमोदकुमार अग्रवाल     
                                                                                                                    .                   

Wednesday, May 18, 2011

नाम के लिए काम ज़रूरी

जीवन में हर इंसान चाहता है कि उसका नाम हो और लोग उसे उसके नाम और काम से जानें. इसके लिए वह जीवन भर कोशिश करता है, लेकिन हर इन्सान के भाग्य में नहीं होता है कि  उसके नाम से उसकी  पहचान हो. साफ़-सुथरी छवि को बनाना और उस छवि को बनाये रखना आसान नहीं है. समाज में अच्छी छवि उन्हीं लोगों की बनती है जो हमेशा समाज के हित में स्वार्थ की भावना को त्याग करके काम करते हैं और अपने अन्दर आदर्श गुणों को आत्मसात करते हैं.
समाज, देश और संसार में नाम करने के लिए हर कोई अपने-अपने तरीके से प्रयत्नशील रहता है. नए-नए रिकोर्ड बनाना, खेल,शिक्षा, ज्ञान-विज्ञान राजनीति, सर्विस, व्यापार, व्यवसाय आदि  सभी क्षेत्रों  में काम करने वाले लोग यही कोशिश करते हैं कि वे उस क्षेत्र में इतनी तरक्की करें कि लोग उसके नाम और काम से जानने लगें. कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, इस बात में  कोई  संदेह नहीं. यदि हम चाहते हैं कि हमारा नाम हो तो हमें हमेशा अपने-अपने कार्य क्षेत्र में रहते हुए जन हित के कार्य करने चाहिए और कोई भी ऐसा कार्य नहीं करें जिससे हमारे नाम पर धब्बा लगे. यक़ीनन हमारी ये कोशिश हमें समाज में बेहतर जगह दिलाएगी तथा लोग हमारे नाम से हमें जानेंगे. --- प्रमोदकुमार अग्रवाल

Monday, April 25, 2011

कुछ समय तक साथ रहना विवाह नहीं

पति और पत्नी के मध्य वैवाहिक संबंधों का अर्थ है कि उनका विवाह किसी भी सामान्य विधि के अंतर्गत पूरे रीति-रिवाज़ के अनुसार हुआ हो और सामान्य विधि के अंतर्गत विवाह को तभी मान्य समझा जाता है जब उनके विवाह एवं रिश्ते को समाज स्वीकार करता हो, 
उनकी विवाह योग्य उम्र हो, उनके कोई दूसरा पति या पत्नी जीवित न हो, वे किसी अन्य  रूप से विवाह के अयोग्य न हों तथा पति-पत्नी के रूप में वे साथ-साथ निवास कर रहे हों.
वर्तमान कानून के अनुसार वैध विवाह के लिए लड़के की उम्र इक्कीस  वर्ष,जबकि लड़की के लिए अठारह वर्ष पूरी होना अनिवार्य है.
एक मामले में सुप्रीम  कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई स्त्री और पुरुष वैध विवाह किये बिना 
पति और पत्नी के रूप में
 कुछ समय तक साथ-साथ रह लेते हैं अथवा उनके बीच कुछ
 समय के लिए  शारीरिक सम्बन्ध बन जाते हैं तो  इससे उनके बीच विवाह की प्रकृति नहीं
 मानी जा सकती है. साधारण शब्दों में इसे यूँ भी कहा जा सकता है कि कुछ समय तक साथ रहना विवाह नहीं है.(2010 AIR SCW 6731)
-- प्रमोदकुमार अग्रवाल

Saturday, April 23, 2011

मन की सुन्दरता

सुन्दरता की कोई एक निश्चित परिभाषा नहीं है. अलग-अलग व्यक्ति की नज़र में सुन्दरता की अपनी परिभाषा होती है. किसी की नज़र में काले और घुंघराले बाल, लम्बा या नाटा क़द सुन्दर होता है तो कोई बड़ी बड़ी आँखों  वाले गोरे व्यक्ति  को पसंद  करता है. लेकिन क्या वास्तव में तन की सुन्दरता ही सच्ची सुन्दरता है. इसका उत्तर है  नहीं .सुन्दरता तन की नहीं मन की होनी चाहिए. जो लोग मन से सीधे-सच्चे, कोमल  और  सरल स्वभाव के होते हैं, वही मन से सुन्दर कहलाते हैं. ऐसे व्यक्तिओं से जब भी हम मिलते हैं  हार्दिक प्रसन्नता का अहसास होता है.
मन की सुन्दरता को हम माँ की ममता के रूप में देख सकते हैं. अपने बच्चे के मानसिक या शारीरिक रूप से अक्षम होने के बाद भी वह अपने सामान्य बच्चों की तरह उस बच्चे को भी पूर प्यार और दुलार देती है. मन की सुन्दरता में बहुत  से गुणों का समावेश होता है जैसे - विनम्रता, कार्य के प्रति निष्ठा, हंसमुख स्वभाव, स्नेह एवं प्रेमभाव आदि-आदि. हमें याद रखना चाहिए कि वास्तविक सुन्दरता का अर्थ है हमारी आन्तरिक सुन्दरता जिसे हम सिर्फ अपने व्यक्तित्व के माध्यम से व्यक्त कर सकते हैं. तन की सुन्दरता कुछ ही समय के लिए होती है जबकि मन की सुन्दरता स्थाई होती है और हमेशा दूसरों के दिलों में हमारा एक महत्वपूर्ण स्थान बनती है. -- प्रमोदकुमार अग्रवाल
       

Thursday, April 21, 2011

जल ही जीवन है.

जल ही जीवन है. हम सब इस बात को अच्छी तरह से जानते हुए भी जल की बर्बादी करते हैं. जल को बर्बाद करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है. भूमिगत जल का निरंतर दोहन करके हम प्रकृति से प्राप्त इस बहुमूल्य सम्पदा को नष्ट करके अपनी आने वाली पीढ़ी के लिए समस्या उत्पन्न कर रहे हैं. हमें याद रखना चाहिए की जल के भंडार सीमित नहीं हैं. हमें जल के प्राकृतिक स्रोतों को सभी तरह के प्रदूषण से बचने के लिए मुहिम  छोडनी चाहिए. जल के संरक्षण के लिए भी हम सभी को आगे आने की आवश्यकता है. इसके लिए वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली को अपनाये जाने की भी जरुरत है.ग्रामीण क्षत्रों में पुराने और बंद पड़े तालाबों एवं पोखरों की सफाई कराकर और उन्हें गहरा करके उनमें बरसात के पानी का भण्डारण करना चाहिए. ज्यादा से ज्यादा वृक्ष लगाकर भी हम अपने पर्यावरण को हरा-भरा बनाकर पानी की ज़रूरत को पूरा कर सकते हैं. हमें जल को बचाने के इस अभियान का एक हिस्सा बनकर समाज, देश और समस्त संसार के लिए जल के महत्व के प्रति लोगों को जागरूक करें. -- प्रमोदकुमार अग्रवाल

Monday, March 21, 2011

अस्तित्व को बचाना है तो .....

आधुनिकता का दंभ भरने वाला और सब कुछ हासिल करने की अभिलाषा रखने वाला इन्सान पूरी तरह बेबस है प्रकृति और उस सर्व  शक्तिमान ईश्वर की ताक़त के आगे जिसने इस संसार की रचना की है. जापान का संकट इस बात का सजीव प्रमाण है. फिर भी हम जागे नहीं है. प्रकृति के साथ लगातार खिलवाड़, भूमिगत जल का लगातार दोहन, वनों का कटाव, पवित्र नदियों एवं वायुमंडल को प्रदूषित करना .. आखिर ये सब क्या है? क्या यही आधुनिकता है? यदि हाँ तो ये समूचा संसार ही सुनामी, भूकंप और दूसरे प्राकृतिक प्रकोपों के मुहाने पर खड़ा है. कभी भी कोई भी देश प्राकृतिक प्रकोप का शिकार बनकर धवस्त हो सकता है. 
अभी भी वक़्त ज्यादा नहीं हुआ है.यदि हम अपनी धरती और प्रकृति को लेकर सचेत नहीं हुए तो परिणाम सभी को भुगतने होंगे. इस बारे में सोचिये और लग जाइये अपने अस्तित्व को बचाने के लिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल 

Friday, March 18, 2011

...........यादगार रहे होली

होली स्नेह, प्रेम और सद्भाव का एकमात्र ऐसा त्यौहार है जिसमें तरह-तरह के रंग, गुलाल, अबीर, चन्दन आदि की भीनी-भीनी महक भी शामिल होकर हमारे ह्रदय को प्रफुल्लित कर देती है. होली का पावन पर्व हमें एक रहने और आपसी कटुता को भुलाकर एक दूसरे को प्यार के रंगों से सराबोर कर देने का पर्व है. हमें इस पर्व की महत्ता को स्वीकार करते हुए ऐसा कोई काम भूलकर भी नहीं करना चाहिए जिससे इस पावन पर्व को मनाने  का ध्येय ही समाप्त हो जाये. 
इस बार हम इस होली को इस प्रकार मनाएं कि ये पर्व हमेशा हमारी यादों में बसा रहे. होली जलाने के लिए हरे-भरे पेड़ों को काटने में कोई समझदारी की बात नहीं है. ऐसा करके हम अपने पर्यावरण को नुक्सान पहुंचा कर अपने ही पेरों पर कुल्हाडी मारते हैं. 
अलग-अलग स्थानों पर होलिका दहन करने की बजाय हम सामूहिक रूप से मिलकर होलिका दहन करें तो पर्यावरण की सुरक्षा हो सकती है. होली पर हानिकारक रसायन युक्त रंगों का प्रयोग करने की बजाय हमें प्राकृतिक  एवं केमिकल रहित रंगों का प्रयोग ही करना चाहिए.इससे हम होली खेलने के बाद इन केमिकल रंगों को साफ़ करने के नाम पर लाखों लीटर पीने के पानी की बर्बादी को रोक सकते हैं और अपने स्वास्थ्य की रक्षा भी कर सकते हैं.  गुब्बारों में पानी भरकर राहगीरों पर फेंकना, चलते हुए वाहनों पर रंग, गोबर, कीचड, गन्दा पानी आदि फेंकना घातक होता है. होली मनाने का असली मज़ा इसी में है कि हम पूर्ण रूप से सादगी के साथ सारे मतभेदों को भुलाकर इस त्यौहार का आनंद लें. तो आइये हम सब मिलकर मनाएं होली का ये पावन पर्व स्नेह और सद्भाव के साथ और महका दें इसके प्यार भरें रंगों को सभी के दिलों मे.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल 

Wednesday, March 16, 2011

कभी भी करा सकते हैं गैस की बुकिंग, डिलीवरी होगी 48 घंटे मैं

समय पर गैस की बुकिंग और डिलीवरी अथवा आपूर्ति न होने की समस्या से प्राय: अधिकांश ग्राहक परेशान रहते हैं. गैस कम्पनियों से सम्बद्ध वितरक द्वारा ग्राहकों की गैस सिलेंडरों की बुकिंग अमूमन इक्कीस दिनों के बाद तथा डिलीवरी चार से दस दिनों में की जाती है. कभी-कभी तो यह अवधि इससे भी ज्यादा हो जाती है. जबकि गैस कम्पनियों द्वारा इस तरह का कोई नियम नहीं बनाया गया है. 
इस सम्बन्ध में 'न्यूज़लाइन फीचर्स एंड प्रेस एजेंसी '  के संपादक प्रमोदकुमार अग्रवाल  द्वारा इन्डियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड, नोएडा से सूचना का अधिकार अधिनियम,2005 के अंतर्गत सूचनाएँ मांगी गयीं. कम्पनी के उप-महा प्रबंधक एवं जन सूचना अधिकारी वाई.के गुप्ता ने अपने पत्र संख्या : UPSO  - II  / RTI  / 1879  दिनांक : 14  फरवरी,2011  के माध्यम से अवगत कराया गया है  कि गैस रिफिल की बुकिंग के लिए कोई समय सीमा नहीं है. ग्राहक को उसकी वास्तविक घरेलू  खाना पकाने की ज़रूरत के अनुरूप गैस की आपूर्ति की जाती है. बुकिंग करने के बाद अवकाश एवं अपवादी स्थितियों के दिनों को छोड़ कर सामान्यतया 48  घंटे के अन्दर गैस की आपूर्ति हो जानी चाहिए. फिर भी गैस वितरक के पास कराई  गयी बुकिंग की वरीयता क्रम एवं सिलेंडर की उपलब्धता के अनुरूप ग्राहकों को गैस की आपूर्ति की जाती है. गैस की बुकिंग और आपूर्ति के सम्बन्ध में यदि किसी ग्राहक को किसी प्रकार की कोई शिकायत हो तो वह अपनी शिकायत गैस कम्पनी के क्षेत्रीय प्रबंधक को अथवा गैस कम्पनी के टोल फ्री नंबर 1800 2333 555 पर कर सकता है.  

Saturday, March 5, 2011

हॉकरों को कंट्रोल करेंगी नगर पालिकाएं

सार्वजनिक मार्गों, सडकों और गलियों में घूम-घूम कर अथवा एक जगह रहकर अपने माल को बेचने वाले हॉकरों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (जी) के अंतर्गत अपना व्यवसाय अथवा रोज़गार करने का मूल अधिकार प्राप्त है. वहीँ दूसरी ओर  भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (डी) के तहत  आम जनता को भी उन्ही सार्वजनिक मार्गों, सडकों और गलियों में बिना किसी बाधा के आने-जाने का अधिकार दिया गया है. देश के सर्वोच्च न्यायालय ने एक रिट याचिका का निस्तारण करते हुए यह मत व्यक्त किया है कि बहुसंख्य जनता के हित ओर अधिकारों को ध्यान में रखते हुए नगर पालिकाएं इन हॉकरों को विनियमित (कंट्रोल) करने ओर उनके द्वारा सार्वजनिक मार्गों, सडकों और गलियों को अवरुद्ध करने से रोकने के लिए योजनायें बनाकर लागू कर सकती हैं. (2010 एआईआर एससीडब्ल्यू  6885  )

बिजली के बकाया रकम की वसूली

यदि  किसी उद्योग को रजिस्टर्ड बैनामा के द्वारा खरीददार के पक्ष में ट्रांसफर कर दिया गया हो तो उस उद्योग से सम्बंधित पुराने चले आ रहे बिजली के बिल की रकम की वसूली उस नए खरीददार से नहीं की जा सकती है. बिजली विभाग  पुराने बिजली के बकाया रकम की वसूली केवल उस उद्योग के विक्रेता  अर्थात  मूल बकायेदार से ही करने का अधिकारी है. (2010 (2)ऐडीजे७)

Monday, February 14, 2011

जीना बेहतर ढंग से

अपने जीवन को हर कोई बेहतर ढंग से जीने की लालसा रखता है और इसके लिए प्रयास भी करता है. बेहतर जीवन की क्या परिभाषा हो, यह हमारी अपनी सोच पर निर्भर करती है. कोई पैसे को तो,कोई भौतिक सुख सुविधाओं को जीवन के लिए आवश्यक मानता है, लेकिन वास्तव में बेहतर ढंग से जीना वही है जिसमें ईमानदारी, सच्चाई, सद्गुण, परोपकार जैसे गुण हमारे अन्दर मौजूद हों. हम जो भी काम करें उसमें हमेशा दूसरों का हित हो. अपने  किसी भी कार्य से हम किसी को कोई कष्ट न पहुंचाए. कहा भी गया है कि जीना वही है जो औरों के काम आये. हम इस बारे में विचार करें और अपने जीवन में इन बातों को आत्मसात करने की कोशिश करें.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल   

Friday, February 11, 2011

गरीब मरीजों को मुफ्त उपचार की सुविधा

उत्तर प्रदेश में अब गंभीर बीमारियों जैसे ह्रदय, केंसर, गुर्दे, यकृत, हड्डी आदि के इलाज में धन की कमी कोई समस्या नहीं बनेगी. राज्य आरोग्य द्वारा इन बीमारियों के उपचार के लिए ज़रुरतमंदों को 35  हज़ार से 1.5  लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी. यह सुविधा केवल गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले बीपीएल कार्ड धारकों को अथवा 24 हज़ार रुपये वार्षिक आय वाले परिवारों को ही मिलेगी. इसके अलावा प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के अंतर्गत भी गरीब रोगियों को मुफ्त उपचार के लिए भी  हेल्प लाइन नंबर 09198004444  की शुरुआत की गयी है. इस नंबर को डायल करने पर नजदीक के निजी अस्पताल के डॉक्टर के मोबाइल पर एसएम्एस एलर्ट आ जायेगा और अस्पताल से तुरंत एक एम्बुलेंस फोन करने वाले व्यक्ति के घर भेज दी जाएगी. यह सेवा पूर्ण रूप से निःशुल्क होगी और इसका कोई भी चार्ज मरीज से नहीं लिया जायेगा. 

विद्युत् विभाग हर्जाना अदा करने के लिए उत्तरदायी

हाई पॉवर क्षमता वाले विद्युत् तारों की लाइन को आम जनता के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाये रखने की ज़िम्मेदारी विद्युत् विभाग की है. यदि विभाग की लापरवाही एवं रख-रखाव में कमी के कारण किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है अथवा उसे शारीरिक क्षति पहुँचती है तो विद्युत् विभाग पीड़ित पक्ष को समुचित हर्जाना अदा करने के लिए उत्तरदायी  है.(2010 /4 /133 )

Thursday, February 10, 2011

सादगी के साथ मनाए निजी कार्यक्रम

विवाह शादी एवं अन्य मांगलिक अवसरों पर हम लोग तेज आवाज में लाउडस्पीकर तथा दूसरे वाद्य यन्त्र बजाते हैं और अधिक शोर करने वाली आतिशबाजी का प्रदर्शन करते हैं. ऐसा करने से पहले हम यह नहीं सोचते कि हमारे इस कार्य से किसी को कष्ट पहुचता है. हमें चाहिए कि हम अपने निजी स्तर पर आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों को अवश्य मनाये लेकिन दूसरे की सुविधाओ का भी ध्यान रखें. हमें कोई अधिकार नहीं है कि हम दूसरो की असुविधा अथवा परेशानी का कारण बन जाएँ. हम अपने कार्यक्रम सादगी के साथ बिना किसी शोर शराबे के ही मनाएंगे  .
--प्रमोद कुमार अग्रवाल

Thursday, January 13, 2011

सफलता के लिए सत्य के मार्ग से बढ़कर कोई और दूसरा मार्ग नहीं

सच्चाई की राह पर चलने वालों को तकलीफें तो उठानी पड़ सकती हैं, लेकिन उनकी विजय भी अवश्य होती है. महात्मा गाँधी जी ने भी सत्य के मार्ग को अपनाया और पूरे संसार में अपना नाम रोशन कर लिया. गांधी जी के सत्य मार्ग का ही प्रताप रहा कि आज देश की अदालतों में गाँधी जी कि तस्वीरें शोभायमान रहती हैं और हमें सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं. यदि हम अपने जीवन में सफल होना चाहते हैं तो हमें सत्य के मार्ग को अपनाना चाहिए. सफलता के लिए सत्य के मार्ग से बढ़कर कोई और दूसरा मार्ग नहीं है.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल 

Saturday, January 8, 2011

नया साल नए संकल्प

समय का चक्र अपनी निश्चित गति से चलता रहता है. दिन, महीने और साल बीतते हैं तथा हम अपने घर के कलेंडर को हर साल पहली तारीख़ को बदल देते हैं. नया साल आता है तो हम अपने दिल में बहुत कुछ नया करने के सपने देखते हैं और नया करने का संकल्प लेते हैं, परन्तु समय के साथ हमारे ये संकल्प और सपने हवा होने लगते हैं क्योंकि जिंदगी को अपने ढंग से जीने की लालसा में हम वे संकल्प भूलने लगते है. कुछ ही लोग ऐसे होते हैं जो अपने संकल्पों को पूरा करने के लिए पूरे आत्मविश्वास के साथ कर्मपथ पर लगे रहते हैं. नया साल है तो नए संकल्प भी होने चाहिए और हमें उन संकल्पों को पूरा करने के लिए हमेशा लगे रहना चाहिए. कोई भी साल अच्छा या बुरा नहीं होता है बल्कि हमारी सोच के अनुसार ही हम अपने साल के दिनों को अच्छा या बुरा बना लेते हैं. हम अपने जीवन में ऐसे काम करें जिनसे हमेशा दूसरों का भला हो, किसी को कोई तकलीफ न हो और हमारे आचार-विचार ऐसे हो जिनमें सभी के प्रति  प्रेम, अहिंसा, सद्भाव और सम्मान की भावना हो.--प्रमोद कुमार अग्रवाल