Thursday, November 25, 2010

चेक का भुगतान न होने पर क़ानूनी कार्यवाही

खाते में धनराशि न होने के आधार पर यदि किसी चेक की रकम खाता धारक को प्राप्त नहीं होती है तो वह चेक जारी करने वाले व्यक्ति के खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138  के अंतर्गत सक्षम न्यायालय में परिवाद- पत्र दाखिल कर सकता है, लेकिन इससे पहले उसे चेक जारी करने वाले व्यक्ति को एक क़ानूनी नोटिस भिजवाना होगा. यह नोटिस रिटर्न मीमो के साथ चेक के बेंक से लौटा दिए जाने के बाद रिटर्न मीमो की तारीख से एक महीने की अवधि में दिया जाना  आवश्यक है. इस नोटिस में  उस चेक के बेंक से लौट दिए जाने [ अनादृत होने ] का विवरण देते हुए चेक की रकम पंद्रह दिन के अन्दर अदा करने और रकम अदा न करने की दशा में क़ानूनी कार्यवाही किये जाने का उल्लेख करना होगा. नोटिस भिजवाते समय इस समय सीमा का विशेष ध्यान  रखना अनिवार्य है अन्यथा दोष पूर्ण नोटिस के आधार पर  की जाने वाली क़ानूनी कार्यवाही अवैध हो जाएगी. चेक से भुगतान के मामले में यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि  चेक को उस पर दी गयी तारीख से छह माह की अवधि में भुगतान हेतु बेंक में प्रस्तुत किया जाना चाहिए. यदि चेक की अवधि समाप्त हो जाये तो चेक जारी करने वाले से उस चेक की अवधि बढ़वा ली जाये अथवा उसके बदले नया चेक ले लिया जाये. चेक पर किसी तरह की काटपीट भी नहीं  होनी चाहिए वरना बेंक चेक की रकम अदा करने से मना कर सकता है. 
-- प्रमोदकुमार अग्रवाल, एडवोकेट , सदस्य : हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद.