Thursday, December 23, 2010

ग़मों के बाद ख़ुशी का दौर भी आता है

जीवन को जीने का अपना-अपना अंदाज़ होता है. हर व्यक्ति अपने हिसाब से अपनी ज़िन्दगी को जीना चाहता है. यदि कोई व्यक्ति उसकी इस जिंदगी मे अनुचित हस्तक्षेप करता है तो वह इसका विरोध भी व्यक्त करता है. यदि कोई हमारे जीने के अदाज़ पर प्रतिकूल मत व्यक्त करे अथवा हमारा उपहास उडाये तो भी हमें उस पर ध्यान न देकर अपने अंदाज़ से जिंदगी को जीते रहना है. जिंदगी को बेहतर ढंग से जीने के लिए हमें अपने जीवन के हर पल को हंसी-ख़ुशी जीने की कोशिश करनी चाहिए. जब कभी जीवन में ग़मों का दौर आ भी जाये तो हमें विचलित हुए बिना उन पलों को मस्त अंदाज़ में हंसी-ख़ुशी जीना चाहिए. कहा भी गया है कि अपने लिए जीना भी क्या जीना है. जिस तरह रात के बाद दिन का उजाला होता है उसी तरह ग़मों के दौर के बाद ख़ुशी का दौर भी आता है. इस  बात पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए. जिंदगी जीने का उद्देश्य यदि सम्पूर्ण विश्व का कल्याण हो तो कहना ही क्या. जीओ इस तरह से कि हमारी जिंदगी ताउम्र  मस्त रहे  और मरने के  बाद भी लोग हमारी जिंदादिली को  याद रखें.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल

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