Saturday, July 31, 2010

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005

भारत सरकार द्वारा पारित सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 आम जनता को किसी भी केंद्रीय अथवा राज्य सरकार के विभाग से कोई भी जानकारी एवं दस्तावेज की प्रतियाँ प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है. इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत कोई भी व्यक्ति मात्र दस रुपये का शुल्क अदा करके उक्त सूचनाये अथवा जानकारी हासिल कर सकता है. इसके लिए आवेदक  को मांगी जाने वाली सूचनाये, अपना नाम, पता, फोन या मोबाइल नंबर आदि का विवरण  देते हुए शुल्क के साथ आवेदन करना होता है. यह शुल्क पोस्टल आर्डर, नगद या बैंक ड्राफ्ट के रूप में दिया जा सकता है. आवेदन की तिथि से एक माह के अन्दर संबधित विभाग आवेदक को मांगी गई सूचनाये उपलब्ध कराता है.  यदि आवेदक को एक माह में सूचनाये प्राप्त नहीं होती हैं अथवा आधी अधूरी सूचनाये या गलत सूचनाये प्राप्त होती हैं तो वह अपील अधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है. इसके बाद भी यदि उसे सूचनाये नहीं मिलती हैं तो वह केंद्रीय सूचना  आयोग अथवा  राज्य सुचना आयोग में समस्त प्रमाण सहित अपनी शिकायत भेज सकता है.  आयोग शिकायत की सुनवाई के बाद यदि शिकायत को सही पाता है तो वह सूचना न देने के लिए ज़िम्मेदार अधिकारी पर 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से  जुर्माना   सूचनाएं   देने तक लगा सकता है. जुर्माने की यह रकम  अधिकतम 25000 /-रुपये तक हो सकती है. जागरूक नागरिक होने के नाते हमें इस अधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए. इससे हम और आप मिलकर सरकारी धन के दुरुपयोग को कम कर सकते हैं. - प्रमोदकुमार अग्रवाल, एडवोकेट, सदस्य, हाई कोर्ट बार एसोसियेशन, इलाहाबाद.

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