Saturday, July 31, 2010

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005

भारत सरकार द्वारा पारित सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 आम जनता को किसी भी केंद्रीय अथवा राज्य सरकार के विभाग से कोई भी जानकारी एवं दस्तावेज की प्रतियाँ प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है. इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत कोई भी व्यक्ति मात्र दस रुपये का शुल्क अदा करके उक्त सूचनाये अथवा जानकारी हासिल कर सकता है. इसके लिए आवेदक  को मांगी जाने वाली सूचनाये, अपना नाम, पता, फोन या मोबाइल नंबर आदि का विवरण  देते हुए शुल्क के साथ आवेदन करना होता है. यह शुल्क पोस्टल आर्डर, नगद या बैंक ड्राफ्ट के रूप में दिया जा सकता है. आवेदन की तिथि से एक माह के अन्दर संबधित विभाग आवेदक को मांगी गई सूचनाये उपलब्ध कराता है.  यदि आवेदक को एक माह में सूचनाये प्राप्त नहीं होती हैं अथवा आधी अधूरी सूचनाये या गलत सूचनाये प्राप्त होती हैं तो वह अपील अधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है. इसके बाद भी यदि उसे सूचनाये नहीं मिलती हैं तो वह केंद्रीय सूचना  आयोग अथवा  राज्य सुचना आयोग में समस्त प्रमाण सहित अपनी शिकायत भेज सकता है.  आयोग शिकायत की सुनवाई के बाद यदि शिकायत को सही पाता है तो वह सूचना न देने के लिए ज़िम्मेदार अधिकारी पर 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से  जुर्माना   सूचनाएं   देने तक लगा सकता है. जुर्माने की यह रकम  अधिकतम 25000 /-रुपये तक हो सकती है. जागरूक नागरिक होने के नाते हमें इस अधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए. इससे हम और आप मिलकर सरकारी धन के दुरुपयोग को कम कर सकते हैं. - प्रमोदकुमार अग्रवाल, एडवोकेट, सदस्य, हाई कोर्ट बार एसोसियेशन, इलाहाबाद.

Friday, July 30, 2010

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986

उपभोक्ताओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए भारत सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 पारित किया है. इस कानून के अंतर्गत प्रत्येक उपभोक्ता को सुरक्षा, सूचना, चयन, सुनवाई, हर्जाना पाने तथा उपभोक्ता शिक्षा के अधिकार दिए गए हैं. इस कानून के प्रावधान इतने सरल और प्रभावशाली हैं कि कोई भी उपभोक्ता अपने अधिकारों की  रक्षा के लिए उपभोक्ता अदालतों में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है. इसके लिए जिला स्तर पर उपभोक्ता फोरम, राज्य स्तर पर राज्य आयोग और राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आयोग कार्य कर रहे हैं. जिला फोरम में बीस लाख रुपये तक के वाद, राज्य आयोग में एक करोड़ रुपये तक के वाद तथा राष्ट्रीय आयोग में एक करोड़ से अधिक के वाद दायर किये जा सकते हैं.
विद्युत् विभाग, टेलीफोन, बीमा, रोडवेज, रेलवे, ट्रांसपोर्ट, विकास प्राधिकरण, नगर निगम, जल निगम,  कंपनी, दुकानदार] स्कूल कॉलेज, बेंक आदि विभागों की सेवा में कमी अथवा लापरवाही से पीड़ित कोई भी उपभोक्ता  अपनी शिकायत सभी साक्ष्यों सहित दर्ज करा सकता है. शिकायत के साथ मामूली शुल्क की अदायगी भी करनी पड़ती है. उपभोक्ता अदालतें मामले की पूरी सुनवाई के बाद निर्णय देती हैं. शिकायत सही पाए जाने पर उपभोक्ता की प्रार्थना के अनुसार निर्णय देते हुए समुचित हर्जाना भी दिलाया जाता हैं. यदि कोई उपभोक्ता/विपक्षी  निर्णय से संतुष्ट नहीं होता तो वह राज्य आयोग अथवा राष्ट्रीय आयोग में अपील कर सकता है. - प्रमोदकुमार अग्रवाल, एडवोकेट, सदस्य : हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद.

Saturday, July 24, 2010

आयुर्वेदिक दवाओं की पेकिंग पर एक्स्पाएरी की तारीख

भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी आयुर्वेदिक, यूनानी एवं सिद्ध दवाओं की पेकिंग पर  एक्स्पाएरी की तारीख लिखना अनिवार्य कर दिया है. ऐसा न करने वाली कम्पनियों एवं दवा विक्रेताओं के खिलाफ  कठोर कार्यवाही की जाएगी. मंत्रालय के अनुसार च्वनप्राश, गोली, जैल, क्रीम तथा केप्सूलों के लिए तीन  वर्ष, सभी प्रकार के चूर्ण, दन्त मंजन और इअर ड्राप्स के लिए दो वर्ष तथा आई ड्राप्स के लिए एक्स्पाएरी की तारीख एक वर्ष निर्धारित की गयी है. भस्म, आसव एवं आरिष्ठ के लिए कोई एक्स्पाएरी की तारीख निर्धारित नहीं की गयी  है.

Tuesday, July 20, 2010

कटिंग वाले चेक स्वीकार नहीं होंगें

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी नए  निर्देशों के अनुसार अब कोई भी बैंक कटिंग वाले चेक स्वीकार नहीं करेगी. अभी तक चेक काटते समय यदि उसमें कोई गलती हो जाती है तो चेक जारी करने वाला उस गलत शब्द या संख्या को काट कर उस पर अपने हस्ताक्षर कर देता है.लेकिन अब आगामी एक दिसंबर से इस तरह के चेकों का चलन बंद हो जायेगा . इस सम्बन्ध में रिजर्व बैंक ने  कहा है कि यदि निर्धरित तिथि के बाद कोई भी बैंक कटिंग किये गए चेक को स्वीकार करके धनराशि का भुगतान कर देता है तो उसके लिए बैंक पूरी तरह ज़िम्मेदार होंगीं .[ न्यूज़लाइन फीचर्स एंड प्रेस एजेंसी, आगरा]

Monday, July 19, 2010

शिक्षा का अधिकार कानून

एक अप्रेल से देश भर में 6 से 14 आयु वर्ग के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देना क़ानूनी रूप से सरकार के लिए ज़रूरी हो गया है. सरकार द्वारा पारित राईट टू एजुकेशन एक्ट ,2009   के अनुसार अब स्कूलों  में एक अध्यापक पर चालीस से अधिक विद्यार्थी नहीं होंगे .राज्य सरकारों को बच्चों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए लाइब्रेरी ,क्लास रूम ,खेल का मैदान और अन्य ज़रूरी चीजें उपलब्ध करानी होंगी. कोई भी विद्यालय किसी भी बच्चे को सत्र के दोरान किसी भी कारण से मना नहीं कर सकता है. निजी विद्यालयों  में 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए होंगी.[ न्यूज़लाइन फीचर्स एंड प्रेस एजेंसी, आगरा ]

कमीशन भुगतान की जानकारी इरडा को देना ज़रूरी

बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण [ इरडा ] द्वारा जारी एक सर्कुलर के अनुसार बीमा कंपनियों को निर्देश दिया है कि यदि उनके द्वारा किसी एजेंट अथवा किसी भी व्यक्ति को कमीशन या अन्य रूप में एक लाख से अधिक के पारिश्रमिक का  भुगतान  किया गया है तो वे इसकी  सूचना अनिवार्य रूप से  इरडा को दें. 31  मार्च को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए यह जानकारी हर साल 30 अप्रेल को देना ज़रूरी होगा.[ न्यूज़लाइन फीचर्स एंड प्रेस एजेंसी, आगरा]

Sunday, July 18, 2010

लोकपाल निपटायेंगे शिकायतें

बीमा पालिसी धारकों की शिकायतों का समाधान करने के लिए पूरे भारत में 12 शहरों में बीमा लोकपाल की नियुक्ति कर दी गयी है.बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण [ इरडा ] के अनुसार बीमा कर्ता द्वारा उपभोक्ता को पालिसी न देने, प्रीमियम में कोई विवाद होने अथवा बीमा दावा को आंशिक या पूर्ण रूप से नामंज़ूर करने की दशा में विवाद की तारीख से एक वर्ष के अन्दर बीमा लोकपाल को अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.                        

       

अब डाक्टर नहीं ले सकेंगे गिफ्ट

भारतीय चिकित्सा परिषद् ने पेशेवर डाक्टरों पर लागू होने वाली आचार संहिता कानून, 2002 में संशोधन करके नई आचार संहिता बनाई है जिसके तहत अब कोई भी डाक्टर दवा निर्माता कम्पनी अथवा स्वास्थ्य की देखभाल से जुड़े उद्योगों से किसी भी तरह का कोई गिफ्ट या यात्रा सुविधा लाभ नहीं ले सकेगा.,लेकिन फार्मा कंपनी द्वारा प्रायोजित विशेष अनुसन्धान  कार्यों में योग्य अधिकारी से अनुमति लेने के बाद डाक्टर उसमें भाग ले सकते हैं.

ऍफ़ डी कराने पर देना होगा पेन नंबर

बैंकों में निर्धारित समय के लिए धनराशि ऍफ़ डी के रूप में जमा कराने पर अब उपभोक्ताओं को आय कर विभाग द्वारा जारी पेन कार्ड का नंबर अनिवार्य रूप से देना होगा. पेन का उल्लेख न करने पर उस उपभोक्ता से दस हज़ार रूपया से अधिक सालाना ब्याज होने पर बीस प्रतिशत की दर से टी.डी.एस.वसूल किया जाएगा. भारतीय जीवन बीमा निगम ने भी अपने प्रतिनिधियों से कहा है कि वे अनिवार्य रूप से अपना पेन नंबर निगम को दें वरना  उनका कमीशन नहीं  दिया जायेगा.

गैस रिफिल की बुकिंग के लिए कोई समय सीमा नहीं

गैस रिफिल की बुकिंग के लिए कोई समय सीमा नहीं है एक बार गैस मिलने के बाद उपभोक्ता अपनी घरेलू जरूरत के अनुसार गैस की बुकिंग करा सकता है.अवकाश के दिन और आपात स्थिति को छोड़कर सामान्यतया रिफिल बुक कराने के 48 घंटे के अन्दर उपभोक्ता को गैस की आपूर्ति करनी होगी. सूचना का अधिकार अधिनियम ,2005 के अंतर्गत मांगी गयी जानकारी के उत्तर में इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड [ मार्केटिंग डिवीजन ] नॉएडा के उप महा प्रबंधक एवं जन सूचना अधिकारी वाई. के. गुप्ता के पत्र दिनांक 26 नवम्बर, 2009 द्वारा उक्त जानकारी दी गयी है. पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि किसी उपभोक्ता क़ी ओर से गैस की आपूर्ति एवं बुकिंग के सम्बन्ध में कोई शिकायत हो तो कारपोरेशन की नीतियों के अनुसार उचित कार्यवाही की जाती है.- प्रमोदकुमार अग्रवाल, एडवोकेट[ सदस्य: हाई कोर्ट बार एसोसिएशन,इलाहाबाद]

रेगिंग की तो मिलेगी सजा

उत्तर प्रदेश में किसी भी शिक्षा संस्थान या कोचिंग में रेगिंग को दंडनीय अपराध घोषित कर दिया गया है.प्रदेश के गवर्नर द्वारा जारी एक विधेयक के अनुसार रेगिंग की शिकायत मिलने के सात दिन के अन्दर उस संस्थान के प्रधान को जांच करनी होगी और शिकायत सही पाए जाने पर दोषी छात्र को संस्थान से निकलना होगा. किसी भी रूप मे रेगिंग का प्रचार करना अथवा उसमे भाग लेना भी अपराध होगा.इसके लिए दो साल की सजा या दस हज़ार रुपया जुर्माना हो सकेगा.

एक से ज्यादा गैस कनेकशन की अनुमति नहीं

भारत सरकार द्वारा जारी संशोधित गैस कण्ट्रोल आर्डर के अनुसार पति,पत्नी,अविवाहित बच्चे और आश्रित माता-पिता वाले घर मे एक ही रसोई का इस्तेमाल करने वाले परिवार को अब एक ही एलपीजी कनेकशन डीबीसी के साथ रखने की अनुमति होगी. एक घर में एक से अधिक गैस कनेकशन का प्रयोग अवैध होगा.ऐसी दशा में अतिरिक्त कनेकशन को सम्बंधित गैस कंपनी को वापस करना होगा.अधिक जानकारी, शिकायत और सुझावों के लिए तोल फ्री नंबर 155233 अथवा 18002333555 पर संपर्क किया जा सकता है.






Saturday, July 17, 2010

CASE LAW : SERVICE MATTER

### PROMOTION CAN BE DENIED TO PERSON NOT COMPLYING WITH REQURIMENTS OF SUCH HIGER MEDICAL STANDARDS UNDER SECTION 47 [2] OF PERSONS WITH DISABILITIES[EQUAL OPPORTUNITIES,PROTECTION OF RIGHTS AND FULL PARTICIPATION]ACT.1966.THIS IS THE VIEW OF SUPREME COURT.


### DAILY WAGERS ARA NOT INCLUDED IN GOVT. EMPLOYEE. DEPENDENT OF DAILY WAGER CAN NOT CLAIM COMPASSIONATE APPOINTMENT OF DEPENDENTS OF GOVT. SERVENTS DYING IN HARNESS RULES,1974. IT IS HELD BY HIGH COURT ALLAHABAD.


### THE RIGHT OF ELIGIBLE EMPLOYEES TO BE CONSIDERED FOR PROMOTION IS VIRTUALLY A PART OF THEIR FUNDAMENTAL RIGHT GUARANTEED UNDER ARTICLE 16 OF CONSTITUTION OF INDIA. SUPREME COURT HELD THAT THE GURANTEE OF A FAIR CONSIDERATION IN MATTER OF PROMOTION VIRTUALLY FLOWS FROM GUARANTEE OF EQUALITY UNDER ARTICLE 14 OF CONSTITUTION.


*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL, ADVOCATE, MEMBER: HIGH COURT BAR ASSOCIATION, ALLAHABAD

CASE LAW : CONSUMER PROTECTION

### CONSUMER COMPANY HAS RIGHT TO PAY ELECTRICITY DUES ONLY ON THE BASIS OF METRE READING NOT AS PER LOAD ,IF THE COMPANY HAS PRIVIOUSLY APPLIED TO MINIMISE THE LOAD .THIS IS THE VIEWOF ALLAHABAD HIGH COURT.


### NON SUPPLY OF ELECTRICITY WITHIN THE PRESCRIBED PERIOD TO CONSUMER IS LACK OF SERVICES ON PART OF ELECTRICITY DEPTT. SUPREME COURT HELD THAT ELECTRICITY DEPTT. IS RESPONSIBLE FOR COMPENSATION.


### VARIOUS HIGH COURTS AND NATIONAL COMMISSION HELD IN MANY CASES THAT THE GOVT. AND DEPARTMENTS ARE DUTY BOUND AND RESPONSIBLE TO PAY ALL BALANCED MONEY / PAYMENT REGARDING PRAVIDENT FUND ETC.WITHIN REASONABLE TIME. IN CASE OF NON PAMENT OR LATE PAYMENT , THEY WILL BE RESPONSIBLE FOR SUCH PAYMENT WITH INTEREST AND COMPENSATION.


### IF ANY RAIL PASSANGER FELLDOWN AND INJURED DUE TO CROWED OF OTHER PASSENGERS OR ANY LOSS OF GOODS OF PASSENGERS OCCUR BY THEFT OR OTHER CRIMINAL ACTIVITY,RAILWAY AUTHORITIES ARE LIABLE TO PAY COMPENSATION .THIS VIEW IS GIVEN BY HIGH COURTS AND NATIONAL COMMISSION.


### NON ISSUANCE OF PASS BOOK BY POSTAL DEPARTMENT AFTER TAKING MONEY, IS LACK OF SERVICES ON PART OF POSTAL DEPTT. NATIONAL COMMISSION PASSED AN ORDER TO PAY COMPENSATION.


### IF ANY PERSON OR ANIMAL INJURED OR DIED DUE TO MIS HANDLING OF ELECTRIC WIRING, ELECTRICITY DEPTT. IS RESPONSIBLE TO PAY COMPENSATION . THIS VIEW IS OF ALLAHABAD HIGH COURT.


#### SUPPLY OF NON HIGHGENIC AND UNHEALTHY FOOD MATERIAL TO ITS PASSANGERS BY AIRWAYS COMPANY, IS LACK OF SERVICES AND NEGLIGENCY . NATIONAL COMMISSION PASSED AN ORDER FOR COMPRNSATION. .


#### IF THE INJURED OR DEAD DRIVER OF A VEHICLE HAS NO VALID LICENCE AT THE TIME OF ACCIDENT, INSURANCE COMPANY IS NOT LIABLE TO PAY ANY AMOUNT TO SUCH PERSON THIS VIEW IS GIVEN BY ALLAHABAD HIGH COURT.


### LEAKAGE OF WATER IN VEHICLE DUE TO THE DEFECTIVE GLASS IS LACK OF SERVICES.NATIONAL COMMISSION HELD THAT MANUFACTIRING COMPANY IS RESPONSIBLE FOR LOSS AND COMPENSATION TO CONSUMER.


### CANCELLATION OF CONFIRM TICKET BY AIRWAYS COMPANY WITHOT ANY REASION AND INFIOMATION TO PASSANGER IS LACK OF SERVICES ON PART OF COMPANY. HIGH COURT / NATIONAL COMMISSION HELD THAT COMPANY IS RESPONSIBLE TO REFUND THE MONEY WITH COMPENSATION.


### NON PAYMENT OF AMOUNT OF KISAN VIKAS PATRA ON MATURITY IS LACK OF SERVICE ON PART OF POSTAL DEPARTMENT.NATIONAL COMMISSION HELD THAT POST OFFICE IS LIABLE TO PAY THE AMOUNT WITH INTEREST.


#### IN CASE OF NON DELIVERY OF BOOKED CONSIGNMENT OR DENY TO MAKE PAMENT IN LUE OF COST OF GOODS OF CONSIGNMENT, TRANSPORT COMPANY IS LIABLE FOR COMPENSATION. THIS IS THE VIEW OF NATIONAL COMMISSION.


### IF ANY LOSS , INJURY OR DEATH OF A PERSON OCCURED DUE TO DEFECTED REGULATOR OR GAS CYLENDER , GAS AGENCY IS RESPONSIBLE FOR COMPENSATION TO THE AFFECTED PERSON OR HIS FAMILY.THIS VIEW IS OF ALLAHABAD HIGH COURT.


*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL, ADVOCATE, MEMBER: HIGH COURT BAR ASSOCIATION, ALLAHABAD.

CASE LAW : RIGHT TO INFORMATION

### ACCORDING TO A JUDGEMENT OF ALLAHABAD HIGH COURT NO PERSON CAN GET PHOTOSTATE COPIES OF ANSWERSHEET UNDER RIGHT TO INFORMATION ACT ,2005.


### GOVERNMENT ADDED PRIVATE EDUCATIONAL INSTITUTIONS ARE IN THE VIEW OF PUBLIC AUTHORITY. THEY ARE BOUND TO GIVE [ FURNISH ] INFORMATIONS TO THE APPLICANTS UNDER THE PROVISIONS OF RIGHT TO INFORMATION ACT, 2005. THIS VIEW IS GIVEN BY ALLAHABAD / PUNJAB & HARYANA HIGH COURT.


### PRAMOD KUMAR AGRAWAL, ADVOCATE, MEMBER : HIGH COURT BAR ASSOCIATION, ALLAHABAD.

CASE LAW : HUMAN RIGHT AND CONSTITUTION

### ILLEGAL DETENTION OF A PRISIONER IN JAIL WITHOUT ANY ORDER IS LIKELY TO BE AN INFRIDGMENT OF FUNDAMENTAL RIGHT GIVEN UNDER OUR CONSTITUTION. ALLAHABAD HIGH COURT PASSED AN ORDER FOR THREE LAC COMENSATION AGAINST STATE GOVERNMENT. .


### BLOCKEDGE OF PUBLIC PLACE BY ANY ACT IS TOTALLY INFRIDGEMENT OF FUNDAMENTAL RIGHT GIVEN UNDER ART. 19[1][d] OF INDIAN CONSTITUTION. ACCORDING TO ORRISSA HIGH COURT , STATE GOVT. IS RESPONSIBLE FOR COMPENSATION TO AFFECTED PERSON. THIS AMOUNT MAY BE RECOVERED FROM RESPONSIBLE PERSON.


### STATE GOVT. IS DUTY BOUND TO PROTECT THE PONDS OF VILLAGES . IF ANY LOSS OR DEATH OCCURED DUE TO UNSAFE PONDS STATE GOVT . IS RESPONSIBLE TO PAY COMPENSATION . THIS VIEW IS OF RAJSTHAN HIGH COURT.


### ELECTRICITY IS INCLUDE IN THE RIGHT OF LIFE UNDER ART. 21 OF THE INDIAN CONSTITUTION.BECAUSE WITHOUT EIECTRICITY THERE IS NO LIFE.THIS IS THE VIEW OF ALLAHABAD HIGH COURT.


### IT IS THE CONSTITUTIONL OBLIGATION OF THE STATE TO PROTECT THE LIFE, LIBERTY AND PROPERTY OF A PERSON .MADRAS HIGH COURT HELD THAT THAT IF ANY PERSON'S PROPERTY IS TAKEN AWAY WITHOUT AUTHORITY OF LAW BY ANY PRRSON , SUCH PERSON CAN PROTECT HIS RIGHT BY APPROACHING HIGH COURT UNDER ART. 226 OF THE CONSTITUTION OF INDIA.. NOT WITHSTANDING DELITION OF ART. 19[1][f] AND ART.32.


### DEATH OF UNDER TRIAL PRISONER IN JAIL DUE TO FAILURE OF JAIL AUTHORITIES TO PROVIDE TIMELY MEDICAL TREATMENT IS AMOUNTING TO BREACH OF HIS RIGHT OF LIFE. ALLAHABAD AND BOMBAY HIGH COURTS HELD THAT THE STATE GOVT. IS HELD LIABLE TO PAY COMPENSATION TO HIS DEPENDENTS.




*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL , ADVOCATE MEMBER : HIGH COURT BAR ASSOCIATION , ALLAHABAD.

Friday, July 16, 2010

CASE LAW : FAMILY AND MATRIMONIAL DISPUTES

### ILLEGAL SON HAS RIGHT TO TAKE HIS SHARE FROM HIS FATHER'S PROPERTY.THIS IS THE VIEW OF ANDHRA PRADESH HIGH COURT.


### AN AGREEMENT BETWEEN HUSBAND AND WIFE REGARDING NOT TO CLAIM ANY MAINTENANCE BY WIFE IN FUTURE IS AGAINST PUBLIC POLICY. ALLAHABAD HIGH COURT HELD THAT WIFE CAN CLAIM FOR MAINTENANCE UNDER SEC.125 OF CRIMINAL PROCEDURE CODE.


 ### DENY FOR SEXUAL RELATIONSHIP BY WIFE IS CRUELTY TOWARDS HER HUSBAND. THIS RELATIONSHIP IS MUST FOR HAPPY MARRIED LIFE. HUSBAND HAS RIGHT TO DIVORCE. THIS IS THE VIEW OF GUWAHATI HIGH COURT


### MENTALLY ILL MOTHER CAN FILE A SUIT AGAINST HER SON THROUGH HER DEVER UNDER SEC. 125 OF CRIMINSL PROCEDURE CODE. THIS IS THE VIEW OF CHATTISGARH HIGH COURT.


### REMARRIAGE OF THE MOTHER CAN NOT BE TAKEN AS A GROUND FOR NOT GRANTING THE CUSTODY OF THE CHIELD TO THE MOTHER. THIS VIEW IS OF SUPREME COURT .


*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL, ADVOCATE, MEMBER: HIGH COURT BAR ASSOCIATION, ALLAHABAD.

Thursday, July 15, 2010

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम में हुए संशोधन

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम में हुए नए संशोधनों के अनुसार अब उन सभी कारखानों और प्रतिष्ठानों को इस कानून के  दायरे मे ले लिया गया है जिनमे दस या अधिक कर्मचारी 15  हज़ार तक के मासिक वेतन  पर  काम करते हैं.25  वर्ष तक की उम्र वाले पुत्र को भी कर्मचारी का आश्रित माना जायेगा और वह सभी हित लाभों को पाने का अधिकारी होगा. घर से कार्यस्थल और कार्यस्थल से घर जाते समय होने वाली दुर्घटना को सेवाकाल की दुर्घटना माना जाएगा और ऐसी दशा मे कर्मचारी या उसके आश्रित उचित हर्जाना और हित लाभ पाने के अधिकारी होंगे.
प्रत्येक कर्मचारी को ये मालूम होना चाहिए की इस कानून के तहत उसे मिलने वाले वेतन मे से 1 .75 प्रतिशत की कटौती अंशदान के रूप मे की जाती है, जबकि मालिक या नियोजक द्वारा  4 .75 प्रतिशत अंशदान दिया जाता है जो ईएसआई निगम मे जमा होता है     [--प्रमोदकुमार अग्रवाल,एड्वोकेट, [ सदस्य : हाई कोर्ट बार एसोसिएशन,इलाहाबाद]

Wednesday, July 14, 2010

पोस्ट ऑफिस में भी देना होगा पेन कार्ड

सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार अब पोस्ट ऑफिस में 50 हज़ार या अधिक राशि जमा कराने के लिए  आय कर विभाग द्वारा जारी पेन कार्ड नंबर और आई डी  एवं निवास प्रमाण पत्र की छाया प्रति  लगाना अनिवार्य कर दिया गया है.50 हज़ार से कम रकम जमा करने की दशा में आई डी एवं निवास प्रमाण पत्र की छाया प्रति लगाना अनिवार्य  है.