Monday, December 27, 2010

प्रेम की भावना सर्वोपरि है.

प्रभु यीशु ने कहा था,'' प्रेम जीवन है और घृणा मृत्यु ''. यीशु के यह  वचन कोई नए नहीं हैं , बल्कि सभी धर्मों में प्रेम की भावना को सर्वोपरि माना गया है. संसार के समस्त ऋषि मुनिओं तथा महापुरुषों ने भी प्रेम की महिमा का अपने-अपने ढंग से बखान किया है. प्रेम मानव जीवन की वह अनमोल निधि है जो हमारे सम्पूर्ण व्यक्तित्व को निखार देती  है. प्रेम की महिमा  अपरम्पार है. कहा जाता है कि निःस्वार्थ प्रेम के वशीभूत होकर भगवान भी हमारे सामने प्रकट हो जाते हैं. प्रेम की भावना  पवित्र हो तो यह हमें नया जीवन देती  है. प्रेम अमर है जो कभी मरता नहीं है. सच्चा प्रेम इंसानों को ही नहीं, बल्कि संसार के समस्त जीव जंतुओं को भी अपना बना लेता है. जिनके दिलों में प्रेम की अनमोल भावना होती है वे कभी किसी से घृणा कर ही नहीं सकते. प्रेम में वह शक्ति है जो कठोर से कठोर हृदय वाले लोगों को भी कोमल हृदय का बना देती है. यदि हम अपने जीवन को सफल बनाना चाहते हैं, यदि हम चाहते हैं कि हमारा सम्पूर्ण व्यक्तित्व प्रभावशाली बने और लोग हमें हमारे जाने के बाद भी हमेशा याद रखें तो हमें  प्रेम के मंत्र को अपनाना ही होगा और अपने दिल  से सभी तरह की नफरत की भावना को दूर करके प्रेम की भावना को बनाये रखना होगा. --- प्रमोद कुमार अग्रवाल  

Thursday, December 23, 2010

ग़मों के बाद ख़ुशी का दौर भी आता है

जीवन को जीने का अपना-अपना अंदाज़ होता है. हर व्यक्ति अपने हिसाब से अपनी ज़िन्दगी को जीना चाहता है. यदि कोई व्यक्ति उसकी इस जिंदगी मे अनुचित हस्तक्षेप करता है तो वह इसका विरोध भी व्यक्त करता है. यदि कोई हमारे जीने के अदाज़ पर प्रतिकूल मत व्यक्त करे अथवा हमारा उपहास उडाये तो भी हमें उस पर ध्यान न देकर अपने अंदाज़ से जिंदगी को जीते रहना है. जिंदगी को बेहतर ढंग से जीने के लिए हमें अपने जीवन के हर पल को हंसी-ख़ुशी जीने की कोशिश करनी चाहिए. जब कभी जीवन में ग़मों का दौर आ भी जाये तो हमें विचलित हुए बिना उन पलों को मस्त अंदाज़ में हंसी-ख़ुशी जीना चाहिए. कहा भी गया है कि अपने लिए जीना भी क्या जीना है. जिस तरह रात के बाद दिन का उजाला होता है उसी तरह ग़मों के दौर के बाद ख़ुशी का दौर भी आता है. इस  बात पर कोई संदेह नहीं होना चाहिए. जिंदगी जीने का उद्देश्य यदि सम्पूर्ण विश्व का कल्याण हो तो कहना ही क्या. जीओ इस तरह से कि हमारी जिंदगी ताउम्र  मस्त रहे  और मरने के  बाद भी लोग हमारी जिंदादिली को  याद रखें.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल

Monday, December 20, 2010

घर से बेघर माता-पिता कानूनी कार्यवाही कर सकेगें

अपने माता-पिता को घर से बेघर करने वाले बेटों के खिलाफ भी अब बुज़ुर्ग माता-पिता कानूनी कार्यवाही कर सकेगें. इसके लिए केन्द्रीय सरकार द्वारा वरिष्ठ नागरिक भरण पोषण अधिनियम, 2007  बनाया गया है. इस कानून के विभिन्न  प्रावधानों   के तहत बुजुर्ग माता-पिता द्वारा अपनी संपत्ति अपने बेटे / बेटों के नाम कर दिए जाने के बाद यदि उनके बेटे उन्हें घर से बेघर कर देते हैं और उनका भरण-पोषण नहीं करते हैं तो वे अपने लिए दस हज़ार रुपये तक के  भरण-पोषण की मांग करते हुए अपनी संपत्ति को वापस ले सकते हैं इसके लिए जिला स्तर पर एक ट्रिबुनल के गठन का प्रावधान इस कानून में किया गया है. बुज़ुर्ग माता-पिता द्वारा ट्रिबुनल में शिकायत किये जाने की तारीख से 90  दिन के अन्दर भरण-पोषण दिए जाने का आदेश पारित करने अथवा आधारहीन शिकायत को ख़ारिज किए जाने का  अधिकार ट्रिबुनल को प्राप्त है.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल

Tuesday, December 14, 2010

अधिक शोर करना दंडनीय अपराध

वैज्ञानिकों ने यह सिद्ध किया है कि एक सीमा से ज्यादा शोर हमारे तन और मन दोनों पर प्रतिकूल एवं खतरनाक असर डालता है.डॉक्टरों के अनुसार  अधिक शोर मानसिक अवसाद, तनाव, हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटेक, थकान, बहरापन, गर्भपात, स्ट्रोक, पेट के रोग आदि जैसी  समस्याएं उत्पन्न करता  है. अधिक शोर पर काबू पाने के लिए सरकार द्वारा न सिर्फ कानून बनाये गए हैं बल्कि प्रदूषण नियंत्रण विभाग भी कार्य कर रहे हैं. ध्वनि प्रदूषण विनियमन एवं नियंत्रण अधिनियम,2000 में संशोधन करके निर्धारित सीमा से अधिक शोर करने के लिए दोष सिद्ध व्यक्ति को पांच वर्ष के कारावास एवं एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत भी मुकदमा दर्ज करके अपराधी व्यक्ति को सजा दिलाई जा सकती है. भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी अपने एक निर्णय में रात दस बजे से प्रातः छह बजे के मध्य किसी भी प्रकार के शोर को प्रतिबंधित करते हुए इसे दंडनीय अपराध घोषित किया है.
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आवासीय क्षेत्र में पचपन डेसिबल तक के शोर को ही उचित माना है इससे ज्यादा शोर को स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया है.  भारत सरकार द्वारा देश में निर्धारित सीमा से अधिक शोर पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से नेशनल शोर मॉनिटरिंग नेटवर्क स्थापित करने का निर्णय लिया गया है. आगामी तीन वर्षों में यह नेटवर्क पूरे देश में काम करना शुरू कर दे इसके लिए सरकार प्रयासरत है. यह नेटवर्क शहरों के सभी क्षत्रों में ध्वनि की तीव्रता की लगातार मॉनिटरिंग करेगा तथा ध्वनि प्रदूषण करने वालों को सजा दिलवाएगा. --प्रमोद कुमार अग्रवाल

Sunday, December 12, 2010

ग्राहकों को प्राप्त अधिकार

प्रत्येक व्यक्ति एक ग्राहक या उपभोक्ता है. सरकार द्वारा बनाये गए विभिन्न कानूनों के तहत ग्राहकों के अधिकारों के संरक्षण का प्रयास किया गया है तथा इन अधिकारों के उल्लंघन की दशा में ग्राहकों को समुचित हर्जाना और वाद का खर्चा दिलाये जाने की व्यवस्था भी की गयी है. सन 1986  में बनाये गए उपभोक्ता संरक्षण कानून के अंतर्गत ग्राहकों के लिए निम्नलिखित  छह अधिकारों का उल्लेख किया गया है जिनकी जानकारी प्रत्येक ग्राहक को होनी ही चाहिए  :- 
@  सुरक्षा का अधिकार 
@  सूचना का अधिकार 
@  चयन का अधिकार
@  सुनवाई का अधिकार
@  हर्जाना पाने का अधिकार
@  उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार. 
यहाँ यह चर्चा करना समीचीन होगा कि कोई भी ग्राहक अपने आर्थिक, मानसिक एवं शारीरिक उत्पीडन के खिलाफ समुचित हर्जाना प्राप्त करने के लिए विशेष रूप से बनाये गए जिला उपभोक्ता फोरम, राज्य उपभोक्ता आयोग अथवा राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग में आर्थिक क्षेत्राधिकार के अनुसार मामूली फीस अदा करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है. उपभोक्ता मंच एवं आयोगों में शिकायत करने की प्रक्रिया आदि की जानकारी हम अपने पूर्व में प्रकाशित लेखों में दे चुके हैं. सुधी पाठक इन लेखों का अवलोकन कर सकते हैं. -- प्रमोदकुमार अग्रवाल

Tuesday, December 7, 2010

लेन-देन न करने पर निष्क्रिय हो सकता है खाता

बैंक में खाता खोलकर उसमें दो वर्ष तक लेन-देन न करने वाले खाता धारक अब सावधान हो जाएँ, अन्यथा उनका खाता निष्क्रिय हो सकता है. भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार बैंक खाते में लगातार दो वर्ष तक लेन-देन न करने पर वह खाता स्वतः ही बंद माना जायेगा. इस लेन-देन का मतलब खाते में पैसा जमा करना, पैसा निकलना, किसी अन्य व्यक्ति द्वारा पैसा जमा कराना या किसी अन्य को पैसा देना है. लगातार दो वर्ष तक खाता धारक द्वारा खाते का सञ्चालन  न करने पर बैंक उस खाता  धारक को पत्र लिखेंगी और इसके बावजूद यदि इस तरह का कोई भी क्रिया-कलाप खाता धारक द्वारा नहीं किया जायेगा तो वह खाता निष्क्रिय हो जायेगा.[न्यूज़लाइन आगरा]  

Monday, December 6, 2010

म्युचुअल फंड निवेशकों के लिए पैन का उल्लेख करना अनिवार्य

म्युचुअल फंड में निवेश करने पर अब  वर्ष 2011  में निवेशकों को आय कर विभाग द्वारा जारी स्थाई लेखा संख्या [पैन] का अनिवार्य रूप से उल्लेख करना होगा. यह नियम नए पुराने सभी निवेशकों पर लागू होगा. म्युचुअल फंड उद्योग  की संस्था ए.एम्.ऍफ़.आई. ने सभी फंड हाउसों को निर्देश दिए हैं कि वे सभी निवेशकर्ताओं से पैन मांगें. इसका उद्देश्य धोखाधडी  तथा धन के गैर क़ानूनी  लेन-देन [मनी लौन्डरिंग]  पर रोक लगाना है. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड [सेबी] द्वारा भी वर्ष 2007  में शेयर बाज़ार से जुड़े सभी तरह के लेन-देन के लिए पैन का उल्लेख करना अनिवार्य बनाया गया है.-- प्रमोदकुमार अग्रवाल, एडवोकेट [न्यूज़लाइन आगरा]  

Saturday, December 4, 2010

गैर बेंकिग कम्पनियों की योजनाओं में सोच-समझ कर पैसा लगायें

भारतीय रिजर्व बैंक ने विभिन्न गैर बेंकिग कम्पनियों की जमा योजनाओं में  अपनी मेहनत की कमाई  की रकम निवेश करने वाले लोगों को चेतावनी दी है कि वे इन योजनाओं में  सोच-समझ कर पूरी सावधानी बरतते हुए ही पैसा  लगायें वरना अधिक ब्याज के लालच में उनकी कमाई  डूब सकती है. रिजर्व बैंक के अनुसार अधिकांश कम्पनियां ऊंचे रिटर्न का लालच देकर निवेशकों का पैसा जमा कराती हैं और बाद में चम्पत हो जाती हैं. इस तरह की कम्पनियां अवैध रूप से बैंक के समान काम करती हैं, जबकि इन्हें चेक जारी करने या डिमांड ड्राफ्ट स्वीकार करने का कोई अधिकार नहीं होता है. 
भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि प्राइज़  चिट और मनी  सर्कुलेशन स्कीम [ प्रतिबन्ध] कानून, 1978  के अंतर्गत धन प्रसार योजनाओं पर प्रतिबन्ध है. इस तरह के मामलों की शिकायतें मिलने पर ऐसी योजनाओं में शामिल कम्पनियों एवं उससे जुड़े लोगों के खिलाफ राज्य सरकारों को कार्यवाही करने का अधिकार है. गैर बैंकिंग कम्पनियों की मनमानी और धोखाधड़ी के खिलाफ पीड़ित व्यक्ति आर्थिक क्षेत्राधिकार के अनुसार अपने जिले के उपभोक्ता मंच अथवा राज्य आयोग या राष्ट्रीय आयोग में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं अथवा भारतीय रिजर्व बैंक या सम्बंधित राज्य सरकार को भी शिकायत भेज सकते हैं. -- प्रमोद कुमार अग्रवाल

Thursday, December 2, 2010

बैंकिंग लोकपाल के समक्ष शिकायत

बैंक ग्राहकों और बैंक के मध्य होने वाले विवादों के समाधान के लिए भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बेंकिंग लोकपाल योजना, 2006  की शुरुआत की गयी, जहाँ बैंक ग्राहक बैंक की सेवाओं से असंतुष्ट होने पर बैंक के खिलाफ  अपनी शिकायतों के समाधान हेतु आवेदन  कर सकते हैं. देश में इस समय पंद्रह बैंकिंग लोकपाल कार्यालय बनाये गए हैं. अहमदाबाद, बेंगलुरु, भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़, चेन्नई, गुवाहाटी, हैदराबाद, जयपुर, कानपुर, कोलकाता, मुंबई, नई दिल्ली, पटना और तिरुवनंतपुरम में भारतीय रिजर्व बैंक के कार्यालयों में बैंकिंग लोकपाल काम कर रहे हैं.
 बैंकिंग लोकपाल के समक्ष कोई भी बैंक ग्राहक जमा खातों  में लेनदेन, खाता खोलने या बंद करने में देरी या मना करने, बैंकिंग सुविधाएँ  देने में वादा खिलाफी, चेक, ड्राफ्ट, बिल आदि की वसूली में विलम्ब करने, पहले से सूचना दिए बिना सेवा प्रभार लगाने, ए.टी.एम्. अथवा क्रेडिट कार्ड से किये जाने वाले लेन-देन के सम्बन्ध में कोई विवाद होने, बैंक द्वारा छोटे मूल्य वर्ग के रूपए या सिक्के लेने से मना करने, ब्याज दर के बारे में रिजर्व बैंक के नियम-निर्देशों का पालन न करने, लोन स्वीकृत करने या देने में अनुचित देरी करने अथवा लोन के प्रार्थना पत्र को बिना कारण अस्वीकार करने आदि मामलों  में शिकायत कर  सकता है.
बैंकिंग लोकपाल के समक्ष शिकायत करने पर कोई फीस अदा नहीं करनी पड़ती है. ग्राहक अपनी शिकायत बैंक से संपर्क किये जाने के एक वर्ष की अवधि में समस्त प्रमाणों सहित अपने क्षेत्र के बैंकिंग लोकपाल के समक्ष भेज सकता है अथवा बैंकिंग लोकपाल के वेब साईट [ www.bankingombudsman.rbi.org.in ]पर ईमेल से या ऑन लाइन दर्ज करा सकता है. बेंकिंग लोकपाल अपने यहाँ प्राप्त शिकायतों का निपटारा पक्षकारों में समझौता  कराकर अथवा गुण-दोष के आधार पर करते हैं. बेंकिंग लोकपाल के निर्णय के विरुद्ध भारतीय रिजर्व बैंक के   समक्ष अपील  की जा सकती है.  -- प्रमोदकुमार अग्रवाल

Tuesday, November 30, 2010

विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत विवाह की प्रक्रिया

विशेष  विवाह अधिनियम,1954 के प्राविधानों के अंतर्गत किसी भी धर्म को मानने वाले  लड़का और लड़की  विधिवत विवाह कर सकते हैं. ऐसा विवाह क़ानूनी रूप से मान्य होता है. इस विवाह को भारत के साथ-साथ विदेशों में भी मान्यता दी जाती है. इस प्रकार के विवाह को संपन्न कराने के लिए प्रत्येक जिले में विवाह अधिकारी  को नियुक्त किया गया है. इक्कीस वर्ष की आयु पूरी  कर चुका कोई भी लड़का तथा अठारह वर्ष की आयु पूरी कर चुकी  कोई भी लड़की जो इस कानून के तहत विवाह करना चाहते हैं, निर्धारित प्रारूप में एक प्रार्थना-पत्र [शपथ-पत्र  एवं आयु और निवास के प्रमाण सहित ]निर्धारित शुल्क अदा करते हुए जिला विवाह  अधिकारी  के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं. विवाह अधिकारी इस आवेदन को प्राप्त करने के बाद तीस दिन का समय देते हुए उस विवाह के सम्बन्ध में आपत्ति की अपेक्षा करते हुए नोटिस जारी करते हैं. यदि तीस दिन के अन्दर उस विवाह के खिलाफ कोई आपत्ति प्राप्त नहीं होती है तो विवाह अधिकारी संतुष्ट होने के उपरांत विवाह संपन्न कराते हैं. विवाह की इस प्रक्रिया के समय  विवाह के दोनों पक्षकारों और तीन गवाहों के हस्ताक्षर कराये  जाते हैं और विवाह प्रमाण-पत्र जारी कर दिया जाता है. इस विवाह की विधिक मान्यता के लिए यह भी आवश्यक है कि लड़का और लड़की प्रतिषिद्ध सम्बन्ध की कोटि में न आते हों, वे पागल या जड़ न हों तथा उनकी पहले से कोई जीवित पत्नी या पति न हो. यदि इस विवाह के नोटिस के बाद कोई आपत्ति प्राप्त होती है तो विवाह अधिकारी उस आपत्ति के निस्तारण के बाद ही विवाह की कार्यवाही संपन्न कराते हैं.
विशेष विवाह अधिनियम के प्राविधानों के तहत किसी भी धर्म के पहले से ही विवाहित पति और पत्नी भी अपने विवाह का पंजीकरण करा सकते हैं, लेकिन इसके लिए यह आवश्यक है कि वे विवाह संपन्न होने के बाद पति-पत्नी के रूप में एक साथ रह रहे हों,  पागल,विकृत या अस्वस्थ  मस्तिष्क के न हों, दोनों की उम्र इक्कीस वर्ष से कम न हो तथा वे प्रतिषिद्ध सम्बन्ध के दायरे में न आते हों. पहले से विवाहित पति-पत्नी के विवाह को पंजीकृत कराने की प्रक्रिया पूर्ववत है. -- PRAMOD KUMAR AGRAWAL

Monday, November 29, 2010

बैंक भी लोकपाल के दायरे में

भारतीय रिजर्व बैंक के उप महा प्रबंधक के अनुसार अब बैंक भी लोकपाल के दायरे में आ गए हैं. यदि बैंकों की कार्य प्रणाली से किसी उपभोक्ता को किसी प्रकार का कोई नुक्सान होता है तो वह हर्जाना प्राप्त करने के लिए अपनी शिकायत सभी साक्ष्य सहित सम्बंधित बैंक के खिलाफ अपने क्षेत्र के बैंकिंग लोकपाल को भेज सकता है.

मानसिक तनाव से बीमारियाँ

### लम्बे समय तक रहने वाला मानसिक तनाव शरीर में कई प्रकार की घातक बीमारियों को जन्म देता है. स्पेन के शोधकर्ताओं के अनुसार ज्यादा दिनों तक यदि हम मानसिक और शारीरिक तनाव मे रहते हैं तो कार्टिसोल नामक हार्मोन के स्तर में वृद्धि हो जाती है, जिससे माँयोपेथी, डायबिटीज, हायपरटेंशन, कमजोरी और दिल का दौरा पड़ने की आशंका रहती है.

अनुकम्पा नियुक्ति का दावा नहीं

### मृतक कर्मचारी के साथ कानूनी रूप से विवाह न करने वाली महिला परिवार की परिभाषा में नहीं आती है. ऐसी महिला उस कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके स्थान पर अनुकम्पा नियुक्ति दिए जाने का दावा नहीं कर सकती. मृतक कर्मचारी की कानूनी रूपसे विवाहित पत्नी और उससे उत्पन्न बच्चे ही अनुकम्पा नियुक्ति के लिए सक्षम हैं. - 2006 (3) ए एल जे 774*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL


Saturday, November 27, 2010

बेरोजगार श्रमिकों के लिए राजीव गाँधी श्रमिक कल्याण योजना

कर्मचारी राज्य बीमा निगम के क़ानूनी प्रावधानों के अंतर्गत आने वाले किसी कारखाने अथवा स्थापना के बंद हो जाने या गैर रोज़गार चोट  लगने के कारण   कम से कम चालीस प्रतिशत हुई निशक्तता के कारण बेरोजगार हुए श्रमिकों को बेरोज़गारी भत्ता प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा ' राजीव गाँधी श्रमिक कल्याण योजना ' चलाई जा रही है. इस योजना का लाभ लेने के लिए यह आवश्यक है कि बेरोजगार हुए श्रमिक ने बेरोजगार होने  की  तारीख से न्यूनतम तीन वर्ष पहले  की  अवधि के लिए निर्धारित अंशदान किया हो तथा वह कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम के तहत बीमाकृत व्यक्ति की  परिभाषा में आता हो.  बेरोजगार हुए श्रमिक को नियमानुसार एक वर्ष तक की अवधि के लिए बेरोज़गारी भत्ता दिया जाता है. बेरोज़गारी भत्ता प्राप्त करने के लिए उस श्रमिक को अपना दावा  बेरोजगार होने की तारीख से तीन माह के अन्दर निर्धारित प्रारूप यू. ए. - 1 में अपने सम्बंधित कर्मचारी राज्य बीमा निगम के कार्यालय में जमा करना अनिवार्य है. बेरोजगार हुए श्रमिक को बेरोज़गारी भत्ता उस दशा में नहीं दिया जायेगा यदि उसने तीन वर्ष तक अंशदान नहीं किया  हो, उसकी सेवा करने की अवधि [उम्र]  पूरी हो चुकी हो, उसे किसी अनुशासन कार्यवाही के अंतर्गत सेवा से हटाया गया हो अथवा उस कर्मचारी की मृत्यु हो गयी हो. बेरोजगार हुए बीमाकृत श्रमिक को बेरोज़गारी भत्ते का भुगतान केवल रेखांकित चेक द्वारा ही किया जाता है.  -- प्रमोदकुमार अग्रवाल

Thursday, November 25, 2010

चेक का भुगतान न होने पर क़ानूनी कार्यवाही

खाते में धनराशि न होने के आधार पर यदि किसी चेक की रकम खाता धारक को प्राप्त नहीं होती है तो वह चेक जारी करने वाले व्यक्ति के खिलाफ परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138  के अंतर्गत सक्षम न्यायालय में परिवाद- पत्र दाखिल कर सकता है, लेकिन इससे पहले उसे चेक जारी करने वाले व्यक्ति को एक क़ानूनी नोटिस भिजवाना होगा. यह नोटिस रिटर्न मीमो के साथ चेक के बेंक से लौटा दिए जाने के बाद रिटर्न मीमो की तारीख से एक महीने की अवधि में दिया जाना  आवश्यक है. इस नोटिस में  उस चेक के बेंक से लौट दिए जाने [ अनादृत होने ] का विवरण देते हुए चेक की रकम पंद्रह दिन के अन्दर अदा करने और रकम अदा न करने की दशा में क़ानूनी कार्यवाही किये जाने का उल्लेख करना होगा. नोटिस भिजवाते समय इस समय सीमा का विशेष ध्यान  रखना अनिवार्य है अन्यथा दोष पूर्ण नोटिस के आधार पर  की जाने वाली क़ानूनी कार्यवाही अवैध हो जाएगी. चेक से भुगतान के मामले में यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि  चेक को उस पर दी गयी तारीख से छह माह की अवधि में भुगतान हेतु बेंक में प्रस्तुत किया जाना चाहिए. यदि चेक की अवधि समाप्त हो जाये तो चेक जारी करने वाले से उस चेक की अवधि बढ़वा ली जाये अथवा उसके बदले नया चेक ले लिया जाये. चेक पर किसी तरह की काटपीट भी नहीं  होनी चाहिए वरना बेंक चेक की रकम अदा करने से मना कर सकता है. 
-- प्रमोदकुमार अग्रवाल, एडवोकेट , सदस्य : हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद. 

Saturday, November 20, 2010

COMPLAINT AGAINST DISHONEST ADVERTISEMENT

IF YOU THINK AN ADVERTISEMENT OF ANY NEWS PAPER, MAGAZINE, NEWS CHANNEL OR ANY OTHER  CHANNEL ETC.IS MISLEADING, DISHONEST OR INDECENT , YOU  MAY MAKE COMPLAINT OR CONTACT TO :

] THE ADVERTISING STANDARDS COUNCIL OF INDIA,
  78, TARDEO ROAD, MUMBAI - 400 034
   Website : http: //www.ascionline.org
    Phone : 022- 23513982
   email : asci@vsnl.com
             --- PRAMOD KUMAR AGRAWAL, ADVOCATE        [ MEMBER : HIGH COURT BAR ASSOCIATION, ALLAHABAD ] [NEWSLINE AGRA]

Friday, November 19, 2010

लाभदायक होता है रस्सी कूदना

वज़न कम करने, क़द बढ़ाने और मांस पेशियों को मज़बूत बनाने के लिए रस्सी कूदना लाभदायक होता है. डॉक्टरों की राय में रस्सी कूदने से शरीर में जमा चर्बी तेज़ी से घटने लगती है और भविष्य मे हड्डियों की कमजोरी / ऑस्टिओपोरोसिस का खतरा कम हो जाता है. सेहत के लिए रस्सी कूदने के दौरान आराम करना, एथलेटिक जूते पहनना और रस्सी कूदने की जगह का खुला होना ज़रूरी है. रस्सी कूदने के आधा घंटे के बाद अंकुरित चना या मूंग, नीबू पानी, दूध या ताज़ा फलों का रस लेना उपयोगी रहता है. हाई ब्लड प्रेशर, हर्निया तथा दिल के मरीजों को रस्सी कूदने से बचना चाहिए अथवा अपने डॉक्टर की सलाह के बाद ही रस्सी कूदनी चाहिए.[ न्यूज़लाइन आगरा ]  




Tuesday, November 16, 2010

यात्री के परिजनों को हर्जाना

रेल अथवा परिवहन निगम की बस में यात्र कर रहे यात्री के चोट लग जाने  अथवा उसकी मृत्यु हो जाने की दशा में उसे अथवा उसके परिजनों को हर्जाना दिए जाने के सम्बन्ध में इलाहाबाद हाई कोर्ट द्वारा दो अलग-अलग निर्णय पारित किये गए हैं. एक मामले में ट्रेन में चढ़ते समय ट्रेन के चल देने के कारण गंभीर रूप से घायल यात्री के अस्पताल में मृत्यु हो गयी. रेलवे का कहना था कि  यात्री ने आत्महत्या की  थी. हाई कोर्ट ने रेलवे के तर्क को निरस्त करते हुए यात्री के परिजनों को हर्जाना दिलाया. (2010 (5)ALJ535)
दूसरे मामले मे बस की छत पर यात्रा कर रहे यात्री की बस दुर्घटना में मृत्यु हो जाने पर हाई कोर्ट ने उसके परिवार वालों को हर्जाना पाने का अधिकारी माना और सम्बंधित बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह मृत यात्री के परिजनों को हर्जाना अदा करे. (2010 (5)ALJ405)-प्रमोद कुमार अग्रवाल, एडवोकेट

Thursday, November 11, 2010

थाने पर नहीं बिठाये जा सकते गवाह

 किसी महिला, नाबालिग युवती अथवा अन्य व्यक्ति को जो किसी आपराधिक मामले में गवाह या पीड़ित हो, पुलिस द्वारा मेडिकल जांच या मेडिकल रिपोर्ट या अन्य उद्देश्य के लिए चौबीस घंटे से ज्यादा समय तक पुलिस थाना अथवा चौकी पर बिठाये  नहीं रखा जा सकता है. दंड प्रक्रिया संहिता अथवा किसी अन्य कानून के अंतर्गत इस तरह से पीड़ित पक्ष या गवाह को मेडिकल रिपोर्ट के नाम पर पुलिस द्वारा रोके रखने का कोई अधिकार नहीं दिया गया है. यदि पुलिस द्वारा ऐसा किया जाता है तो उसका यह कृत्य भारतीय संविधान के अनुच्छेद  21 के अंतर्गत दिए गए आज़ादी के अधिकार का हनन है. इलाहाबाद हाई कोर्ट [ 2010 [ 5 ] एएलजे 92  ] ने एक मामले में  यह मत व्यक्त करते हुए पीड़ित पक्ष को राज्य सरकार से बतौर हर्जाना 25  हज़ार  रुपये दिलाने का आदेश पारित किया -- प्रमोद कुमार अग्रवाल [ न्यूज़लाइन आगरा ]

Saturday, October 30, 2010

उपभोक्ता संरक्षण कानून और उपभोक्ता

  ###  उपभोक्ता संरक्षण कानून के प्रावधान आम व्यक्ति के उपभोक्ता अधिकारों की सुरक्षा हेतु बनाये गए हैं. इस कानून के तहत कोई भी उपभोक्ता अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए आर्थिक क्षेत्राधिकार के अनुसार जिला उपभोक्ता फोरम, राज्य आयोग अथवा राष्ट्रीय आयोग में वाद का कारण उत्पन्न होने की तिथि से  दो  वर्ष की अवधि में अपनी शिकायत दर्ज  करा सकता है. शिकायत के साथ उपभोक्ता को शिकायत के तथ्यों के समर्थन में एक शपथ पत्र तथा सभी अभिलेखीय सबूत दाखिल करना ज़रूरी है. 
###  उपभोक्ता कानून की परिधि में आने वाले किसी विभाग जैसे -  बीमा निगम, टेलीफोन विभाग, विद्युत कारपोरेशन, आवास-विकास, विकास प्राधिकरण, रोडवेज, रेलवे और अन्य सेवाए प्रदान करने वाले विभाग, कोई दूकानदार, वितरक, निर्माता कम्पनी,डॉक्टर,नर्सिंग होम, होस्पीटल आदि के खिलाफ  सेवा में कमी या लापरवाही के कारण हुए नुकसान की भरपाई, हर्जाना  व वाद का खर्चा मांगते हुए अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है लेकिन इसके लिए ये ज़रूरी है कि उस विभाग या विपक्षी द्वारा जो सेवाएँ उपलब्ध कराई गयी  हो उसके लिए कोई भुगतान अदा किया गया हो.
###  जिला उपभोक्ता फोरम द्वारा दिए गए आदेश के खिलाफ व्यथित पक्ष उपभोक्ता राज्य आयोग में, राज्य आयोग के आदेश के खिलाफ नेशनल कमीशन में और नेशनल कमीशन के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है. अपील के लिए आदेश की तारीख़ से तीस दिन का समय निर्धारित है.
###  उपभोक्ता कानून के तहत पारित आदेश का जान-बूझ कर अनुपालन न करने वाले व्यक्ति को सजा दिए जाने का भी प्रावधान है. इसी प्रकार महज़ परेशान करने और उत्पीडन करने के लिए  दायर की गयी शिकायत के मामलों में शिकायत निरस्त करने के साथ-साथ शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्ति के खिलाफ  भी दस हज़ार रुपये तक के हर्जाने का आदेश किया जा सकता है. यह हर्जाना  उस व्यक्ति को दिलाया जाता है जिसके खिलाफ वह शिकायत की गयी हो. 
 ---- प्रमोदकुमार अग्रवाल

Tuesday, October 26, 2010

भरण - पोषण का अधिकार

दंड प्रक्रिया सहिंता की धारा 125 के प्राविधानों के अंतर्गत कानूनी रूप से विवाहित पत्नी, माता-पिता, नाबालिग अथवा मानसिक व शारीरिक रूप से अपना भरण पोषण करने में असक्षम पुत्र और पुत्री अपने पति, पुत्र या पुत्री अथवा माता-पिता से भरण- पोषण [ गुज़ारा- भत्ता ] प्राप्त करने के लिए अपने क्षेत्र के न्यायालय में एक परिवाद  पत्र [ प्रार्थना- पत्र ]दाखिल कर सकते हैं. न्यायालय उस प्रार्थना- पत्र को अपने यहाँ रजिस्टर्ड करने के बाद विपक्षी पति, पुत्र या पुत्री अथवा माता- पिता को निर्धारित तिथि पर अपना जवाब देने के लिए सूचना भेजने का आदेश पारित करता है .
न्यायालय में दोनों पक्षों द्वारा प्रस्तुत अभिलेखों का अवलोकन करने और बहस सुनने के बाद यदि यह पता चलत़ा है कि विपक्षी बिना किसी उचित कारण के परिवादी का भरण- पोषण नहीं कर रहा है तो न्यायालय विपक्षी की आमदनी को ध्यान में रखते हुए उसे यह आदेश दे सकता है कि  वह परिवादी को आदेशित धनराशि भरण- पोषण के रूप मे प्रतिमाह अदा करे.
 परिवादी अथवा विपक्षी यदि न्यायालय के आदेश से संतुष्ट न हों तो वे उस आदेश के विरुद्ध प्रवर  न्यायालय में जा सकते हैं. न्यायालय द्वारा पारित भरण- पोषण की रकम को कम या समाप्त कराने अथवा उसमे वृद्धि करने के निवेदन के साथ इसी कानून के प्रावधानों के अंतर्गत एक नया प्रार्थना- पत्र दिया जा सकता है. ऐसी दशा मे पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य व बहस के आधार पर उचित आदेश पारित कर सकेगा.
अभी हाल ही में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में यह निर्णय दिया है कि लम्बे समय तक पति- पत्नी के रूप में लिव एंड रिलेशनशिप में रही महिला भी भरण- पोषण के लिए न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल कर सकती है यदि विपक्षी द्वारा उसके भरण- पोषण से इनकार कर दिया गया हो अथवा उसका   उत्पीडन किया गया हो.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल

Monday, October 25, 2010

ऍफ़.आई.आर. दर्ज करना हमारा अधिकार

हमारे साथ घटित होने वाली प्रत्येक आपराधिक घटना की प्रथम सूचना रिपोर्ट [ ऍफ़.आई.आर.] सम्बंधित पुलिस थाने में दर्ज करना हमारा अधिकार है. थाने के पुलिस अधिकारी का ये कर्त्तव्य है कि वह प्रत्येक घटना की रिपोर्ट दर्ज करके उसकी एक प्रति रिपोर्ट दर्ज कराने वाले व्यक्ति को अनिवार्य रूप से दे. 
यदि कोई पुलिस अधिकारी रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी करता है या मना करता है अथवा आधी अधूरी या गलत रिपोर्ट दर्ज करता है तो पीड़ित व्यक्ति [ रिपोर्ट कराने वाला अभियोगी ] अपने साथ घटित वारदात की पूरी जानकारी लिखित में सम्बंधित पुलिस अधिकारी [ पुलिस अधीक्षक या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ] को रजिस्टर्ड डाक से भेज सकता है.यह प्राविधान दंड प्रक्रिया सहिंता के अंतर्गत दिया हुआ है.
 डाक से रिपोर्ट भेजने के बाद भी यदि पीड़ित व्यक्ति की रिपोर्ट दर्ज नहीं होती है तो वह दंड प्रक्रिया सहिंता की धारा 156 [3 ]  के अंतर्गत सक्षम न्यायिक अधिकारी के समक्ष एक प्रार्थना पत्र देकर रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश पारित किये जाने की प्रार्थना कर सकता है. प्रार्थना पत्र के साथ पुलिस अधिकारी को डाक से भेजी गयी रिपोर्ट और डाक विभाग से मिली रसीद की फोटोस्टेट प्रति सलग्न करना ज़रूरी है
 रिपोर्ट में दिए गए तथ्यों से यदि घटना का होना पाया जाता है तो न्यायिक अधिकारी उस मामले की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश सम्बंधित पुलिस थाने को करते हैं. न्यायालय द्वारा पारित आदेश का अनुपालन करने के लिए पुलिस अधिकारी बाध्य हैं और ये उस रिपोर्ट को दर्ज करने से मना नहीं कर सकते हैं.---- प्रमोद कुमार अग्रवाल

रिक्शे चलाना है मौलिक अधिकार

नोएडा के ओद्योगिक एरिया में  सड़कों पर रिक्शा चालकों द्वारा अपने रिक्शे चलाना उनकी आजीविका है जो भारतीय संविधान के अंतर्गत मौलिक अधिकार है . रिक्शा चालकों को समुचित क़ानूनी प्रतिबन्ध के बिना रिक्शा चलने से रोका नहीं जा सकता. संविधान के अनुच्छेद 19 [6 ] के तहत रिक्शा चालकों के इस अधिकार पर समुचित प्रतिबन्ध लगाया जा सकता है.यह मत इलाहाबाद हाई कोर्ट का है.--2010 [ 4 ] ए .एल.जे . पृष्ठ 390  -- प्रमोद कुमार अग्रवाल

Wednesday, October 13, 2010

गीता सार

बेकार की चिंता हम क्यों करते हैं
बेकार में ही हम किसी से क्यों डरते हैं
कोई भी हमें  मार नहीं सकता .आत्म अज़र अमर है.
आत्म न कभी जन्म लेती है और न ही कभी मरती है.
इस संसार में जो हो रहा है  अच्छा ही हो रहा है.
जो भी अब तक हुआ है वो भी  अच्छा ही हुआ है.
और आगे भी जो होगा वो अच्छा ही होगा.
जो बीत गया उसके लिए पश्चाताप करने से
 कुछ भी हासिल होने वाला नहीं है.
आने वाले वक़्त की चिंता हमें नहीं करनी चाहिए .
अपने वर्तमान को जीने में  ही समझदारी है.
जो हाथ से निकल गया 
उसके लिए बेकार में ही हम  क्यों रोते हैं .
हमारा क्या चला गया.
हम अपने साथ न कुछ लाये थे 
और न ही हमने कुछ उत्पन्न किया.
जो भी हमने लिया , यहीं से लिया.
और जो हमने दिया, यहीं से दिया.
हम खाली हाथ आये थे 
और हमें खाली हाथ ही चले जाना है
जो आज हमारा है वो कल किसी और का होगा.
उसे अपना समझकर खुश होने से कोई लाभ नहीं.
परिवर्तन इस संसार का नियम है.
और मृत्यु जीवन का अटल सत्य है.
एक पल में हम अपार दौलत के मालिक बन जाते हैं
तो अगले ही पल हम बिल्कुल कंगाल हो जाते हैं.
तेरा-मेरा, छोटा-बड़ा , अपना-पराया
अपने मन से दूर करने में ही हमारी भलाई है.
ये शरीर तक हमारा नहीं है.
और न ही हम इस शरीर के हैं.
ये शरीर पांच तत्वों अग्नि, जल, वायु, पृथ्वी
और आकाश से मिलकर बना है
और अंत में इन्ही तत्वों में मिल जाएगा.
हम अपने आप को भगवान् के समक्ष अर्पित कर दें.
यही सबसे उत्तम सहारा है.
और भय ,चिंता और शोक से मुक्ति पाने का
एक सर्वश्रेष्ठ मार्ग भी है .
हम जो कुछ भी करें भगवान् को अर्पण करें.
यही जीवन मुक्ति का सरल और सच्चा मार्ग है.

 --  प्रस्तुति :  प्रमोदकुमार अग्रवाल, 

Wednesday, September 1, 2010

रेलवे यात्री को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए जिम्मेदार

 ###  आरक्षित रेलवे बोगी में यात्रा के दौरान यदि किसी यात्री का सामान चोरी हो जाता है और रेल प्रशासन व पुलिस बल चोर को पकड़ने या सामान बरामद करने का कोई प्रयास नही करते तो रेलवे यात्री को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए जिम्मेदार है. - 2006  एन सी जे 140  नॅशनल कमीशन  *** PRAMOD KUMAR AGRAWAL

Monday, August 9, 2010

HEALTHLINE PLUS [ हैल्थलाइन प्लस ]

###  मोबाइल फ़ोन और कंप्यूटर  के कीबोर्ड पर लगातार काम करने से हाथों में झनझनाहट, दर्द व सूज़न,  मांसपेशियों में दर्द, थकान, तनाव, सरदर्द, कान में दर्द, कम सुनाई देना,इन्फेक्शन जैसी  समस्याएँ होने की संभावनाएं रहती हैं.अंगुलिओं पर लगातार दवाब पड़ने से उनमें महसूस करने की क्षमता भी प्रभावित होती है. मोबाइल फ़ोन से निकलने वाली विद्युत् चुम्बकीय तरंगों के कारण हमारे मस्तिष्क के ऊतकों को नुक्सान पहुँचने की सम्भावना रहती है. इनसे बचने के लिए हमें मोबाइल फ़ोन और कंप्यूटर के अधिक एवं लगातार प्रयोग से बचना चाहिए.
###  मोटापा और वज़न कम करने के लिए डायटिंग करना जानलेवा भी हो सकता है. अमेरिकन शोध के अनुसार डायटिंग करने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन कार्टिसोल के स्तर में वृद्धि होने लगती है जिससे दिल की बीमारी, मधुमेह, केंसर, ऊर्जा की कमी, चिडचिडापन जेसी समस्याएं होने लगती हैं. अपनी मर्ज़ी से डायटिंग न करके अपने डाक्टर या आहार विशेषज्ञ की सलाह से ही डायटिंग को अपनाना चाहिए.
###  मन पसंद संगीत का आनंद लेने से हमारे शरीर को रक्त संचार बेहतर होने लगता है तथा रक्त में कोलिस्ट्रोल का स्तर घटने से दिल के रोगों  से बचाव भी होता है. डाक्टरों के अनुसार अपनी पसंद का  संगीत सुनने से शरीर में नाइट्रिक आक्साइड का स्राव होता है जो हमें तनाव मुक्त रखने में सहायक है. 
###   वज़न कम करने, भूख को कंट्रोल करने, सांस की बदबू दूर करने और याददाश्त को बढ़ाने के लिए चुइंगम चबाना लाभकारी हो सकताहै. एक नए शोध के अनुसार चुइंगम खाने से दिमाग तेज़ होता है. भोजन करने के बाद चुइंगम चबाने से दांतों मे छुपे भोजन के छोटे छोटे कण आसानी से बाहर निकल जाते हैं. चुइंगम के कारण मुहं में ज्यादा लार बनती है जो दांतों को साफ़ रखने तथा बेक्टीरिया जनित अम्ल को बनने से रोकने में भी उपयोगी है. सेहत की दृष्टि से चुइंगम को कम से कम बीस मिनुत चबाना आवश्यक है वर्ना इसमें पाई जाने वाली शर्करा दांतों को नुक्सान पहुँचाने के अलावा हमें डायबिटीज का शिकार बना सकती है.
###  लम्बे समय तक रहने वाला मानसिक तनाव शरीर में कई प्रकार की घातक बीमारियों को जन्म देता है. स्पेन के शोधकर्ताओं के अनुसार ज्यादा दिनों तक यदि हम मानसिक और शारीरिक तनाव मे रहते हैं तो कार्टिसोल नामक हार्मोन के स्तर में वृद्धि हो जाती है, जिससे माँयोपेथी, डायबिटीज, हायपरटेंशन, कमजोरी और दिल का दौरा पड़ने की आशंका रहती है.   
  

Sunday, August 8, 2010

विज्ञापनों के लिए मानक तय

अपने उत्पादों का विज्ञापनों के माध्यम से प्रचार करने वालीं कम्पनियाँ अब बढ़ा - चढ़ा कर अपने उत्पादों के बारे में दावा नहीं  कर सकेंगी. इस सम्बन्ध में भारतीय विज्ञापन मानक परिषद् ने ऑटो -  मोबाइल, खाद्य एवं पेय उत्पादों के विज्ञापनों के लिए मानक तय कर दिए हैं. परिषद् के नए नियमों के तहत विज्ञापनों के ज़रिये वाहन चालकों को हेलमेट पहनने, सीट बेल्ट बाँधने, ड्राइविंग करते समय मोबाइल पर बातें न करने सम्बन्धी सुरक्षात्मक क़दम अपनाने को प्रोत्साहित किया जाएगा. विभिन्न उत्पादों के विज्ञापनों में खतरनाक स्टंट या एक्शन दृश्य दिखाने पर भी रोक  लगाईं   जाएगी. इसके अलावा परिषद् ने खाद्य एवं पेय पदार्थों के विज्ञापनों  में पोषण और स्वास्थ्य लाभ के दावे न करने के भी निर्देश दिए हैं. 

मंत्र शक्ति का चमत्कार

दुःख व चिंताओं को दूर करके शांति और आनंद का अनुभव करने, तन व मन को स्वस्थ बनाये रखने, बुद्धि एवं कार्य करने की शक्ति में वृद्धि  करने तथा वृद्धावस्था को दूर रखने के लिए एक चमत्कारी मंत्र है :  
                             " ॐ श्री प्रकाशम् "  .     
 दिल्ली के योगाचार्य श्री कृष्ण गोयल द्वारा हमें यह मंत्र भेजा गया है. श्री गोयल के अनुसार इस मंत्र का मन ही मन जाप करने के लिए एकांत जगह को चुनें और अपनी आँखों को धीमे से मूँद कर अपने ध्यान को मंत्र की शांत तरंगों पर केन्द्रित करें. जाप करते समय अपने होंठ व जीभ को न हिलाएं. पांच मिनट जाप करने के बाद आराम से बैठ कर महसूस करें कि आपका शरीर शांति की मूर्ति बन गया है , शरीर में अपार ऊर्जा व शक्ति का संचार हो गया है तथा सम्पूर्ण शरीर में एक अनोखा प्रकाश भर गया है. इस मंत्र के निरंतर जाप एवं अभ्यास से हमें आन्तरिक प्रकाश का दर्शन होने  लगेगा और तब धीरे - धीरे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में आशातीत लाभ होगा.

पालिसी धारकों की शिकायतों को दो सप्ताह में निपटाने के निर्देश

बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण [ इरडा ] ने सभी बीमा कम्पनियों को पालिसी धारकों के हित में उनकी शिकायतों को दो सप्ताह में निपटाने के निर्देश दिए हैं. इरडा के अनुसार शिकायत मिलने के तीन कार्य दिवसों में पावती भेजनी  होगी जिसमें अधिकारी का नाम.व उसका पद, शिकायत निपटने वाले अधिकारी का नाम और शिकायत निपटने में लगने वाले समय का उल्लेख करना होगा. पावती भेजने के दो सप्ताह के अन्दर शिकायत का निपटारा कर दिया जायेगा. यदि बीमा कंपनी शिकायत को ख़ारिज करती है तो उसे इसका कारण भी बताना होगा. निर्धारित प्रक्रिया न अपनाने या समय सीमा में शिकायत का निपटारा न करने की दशा में बीमा कंपनी को दण्डित किया जा सकता है. पालिसी  धारक इरडा में अपनी शिकायत दर्ज कराने, शिकायत का समाधान न होने अथवा शिकायत की स्थिति का पता लगाने के लिए इरडा के कॉल सेंटर के टोल फ्री नम्बर 155255 पर अथवा E MAIL : complaints @irda.gov.in पर संपर्क कर सकते हैं.  

Saturday, July 31, 2010

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005

भारत सरकार द्वारा पारित सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 आम जनता को किसी भी केंद्रीय अथवा राज्य सरकार के विभाग से कोई भी जानकारी एवं दस्तावेज की प्रतियाँ प्राप्त करने का अधिकार प्रदान करता है. इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत कोई भी व्यक्ति मात्र दस रुपये का शुल्क अदा करके उक्त सूचनाये अथवा जानकारी हासिल कर सकता है. इसके लिए आवेदक  को मांगी जाने वाली सूचनाये, अपना नाम, पता, फोन या मोबाइल नंबर आदि का विवरण  देते हुए शुल्क के साथ आवेदन करना होता है. यह शुल्क पोस्टल आर्डर, नगद या बैंक ड्राफ्ट के रूप में दिया जा सकता है. आवेदन की तिथि से एक माह के अन्दर संबधित विभाग आवेदक को मांगी गई सूचनाये उपलब्ध कराता है.  यदि आवेदक को एक माह में सूचनाये प्राप्त नहीं होती हैं अथवा आधी अधूरी सूचनाये या गलत सूचनाये प्राप्त होती हैं तो वह अपील अधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है. इसके बाद भी यदि उसे सूचनाये नहीं मिलती हैं तो वह केंद्रीय सूचना  आयोग अथवा  राज्य सुचना आयोग में समस्त प्रमाण सहित अपनी शिकायत भेज सकता है.  आयोग शिकायत की सुनवाई के बाद यदि शिकायत को सही पाता है तो वह सूचना न देने के लिए ज़िम्मेदार अधिकारी पर 250 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से  जुर्माना   सूचनाएं   देने तक लगा सकता है. जुर्माने की यह रकम  अधिकतम 25000 /-रुपये तक हो सकती है. जागरूक नागरिक होने के नाते हमें इस अधिकार का प्रयोग अवश्य करना चाहिए. इससे हम और आप मिलकर सरकारी धन के दुरुपयोग को कम कर सकते हैं. - प्रमोदकुमार अग्रवाल, एडवोकेट, सदस्य, हाई कोर्ट बार एसोसियेशन, इलाहाबाद.

Friday, July 30, 2010

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986

उपभोक्ताओं के अधिकारों के संरक्षण के लिए भारत सरकार ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 पारित किया है. इस कानून के अंतर्गत प्रत्येक उपभोक्ता को सुरक्षा, सूचना, चयन, सुनवाई, हर्जाना पाने तथा उपभोक्ता शिक्षा के अधिकार दिए गए हैं. इस कानून के प्रावधान इतने सरल और प्रभावशाली हैं कि कोई भी उपभोक्ता अपने अधिकारों की  रक्षा के लिए उपभोक्ता अदालतों में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है. इसके लिए जिला स्तर पर उपभोक्ता फोरम, राज्य स्तर पर राज्य आयोग और राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आयोग कार्य कर रहे हैं. जिला फोरम में बीस लाख रुपये तक के वाद, राज्य आयोग में एक करोड़ रुपये तक के वाद तथा राष्ट्रीय आयोग में एक करोड़ से अधिक के वाद दायर किये जा सकते हैं.
विद्युत् विभाग, टेलीफोन, बीमा, रोडवेज, रेलवे, ट्रांसपोर्ट, विकास प्राधिकरण, नगर निगम, जल निगम,  कंपनी, दुकानदार] स्कूल कॉलेज, बेंक आदि विभागों की सेवा में कमी अथवा लापरवाही से पीड़ित कोई भी उपभोक्ता  अपनी शिकायत सभी साक्ष्यों सहित दर्ज करा सकता है. शिकायत के साथ मामूली शुल्क की अदायगी भी करनी पड़ती है. उपभोक्ता अदालतें मामले की पूरी सुनवाई के बाद निर्णय देती हैं. शिकायत सही पाए जाने पर उपभोक्ता की प्रार्थना के अनुसार निर्णय देते हुए समुचित हर्जाना भी दिलाया जाता हैं. यदि कोई उपभोक्ता/विपक्षी  निर्णय से संतुष्ट नहीं होता तो वह राज्य आयोग अथवा राष्ट्रीय आयोग में अपील कर सकता है. - प्रमोदकुमार अग्रवाल, एडवोकेट, सदस्य : हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद.

Saturday, July 24, 2010

आयुर्वेदिक दवाओं की पेकिंग पर एक्स्पाएरी की तारीख

भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी आयुर्वेदिक, यूनानी एवं सिद्ध दवाओं की पेकिंग पर  एक्स्पाएरी की तारीख लिखना अनिवार्य कर दिया है. ऐसा न करने वाली कम्पनियों एवं दवा विक्रेताओं के खिलाफ  कठोर कार्यवाही की जाएगी. मंत्रालय के अनुसार च्वनप्राश, गोली, जैल, क्रीम तथा केप्सूलों के लिए तीन  वर्ष, सभी प्रकार के चूर्ण, दन्त मंजन और इअर ड्राप्स के लिए दो वर्ष तथा आई ड्राप्स के लिए एक्स्पाएरी की तारीख एक वर्ष निर्धारित की गयी है. भस्म, आसव एवं आरिष्ठ के लिए कोई एक्स्पाएरी की तारीख निर्धारित नहीं की गयी  है.

Tuesday, July 20, 2010

कटिंग वाले चेक स्वीकार नहीं होंगें

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा जारी नए  निर्देशों के अनुसार अब कोई भी बैंक कटिंग वाले चेक स्वीकार नहीं करेगी. अभी तक चेक काटते समय यदि उसमें कोई गलती हो जाती है तो चेक जारी करने वाला उस गलत शब्द या संख्या को काट कर उस पर अपने हस्ताक्षर कर देता है.लेकिन अब आगामी एक दिसंबर से इस तरह के चेकों का चलन बंद हो जायेगा . इस सम्बन्ध में रिजर्व बैंक ने  कहा है कि यदि निर्धरित तिथि के बाद कोई भी बैंक कटिंग किये गए चेक को स्वीकार करके धनराशि का भुगतान कर देता है तो उसके लिए बैंक पूरी तरह ज़िम्मेदार होंगीं .[ न्यूज़लाइन फीचर्स एंड प्रेस एजेंसी, आगरा]

Monday, July 19, 2010

शिक्षा का अधिकार कानून

एक अप्रेल से देश भर में 6 से 14 आयु वर्ग के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देना क़ानूनी रूप से सरकार के लिए ज़रूरी हो गया है. सरकार द्वारा पारित राईट टू एजुकेशन एक्ट ,2009   के अनुसार अब स्कूलों  में एक अध्यापक पर चालीस से अधिक विद्यार्थी नहीं होंगे .राज्य सरकारों को बच्चों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए लाइब्रेरी ,क्लास रूम ,खेल का मैदान और अन्य ज़रूरी चीजें उपलब्ध करानी होंगी. कोई भी विद्यालय किसी भी बच्चे को सत्र के दोरान किसी भी कारण से मना नहीं कर सकता है. निजी विद्यालयों  में 25 प्रतिशत सीटें गरीब बच्चों के लिए होंगी.[ न्यूज़लाइन फीचर्स एंड प्रेस एजेंसी, आगरा ]

कमीशन भुगतान की जानकारी इरडा को देना ज़रूरी

बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण [ इरडा ] द्वारा जारी एक सर्कुलर के अनुसार बीमा कंपनियों को निर्देश दिया है कि यदि उनके द्वारा किसी एजेंट अथवा किसी भी व्यक्ति को कमीशन या अन्य रूप में एक लाख से अधिक के पारिश्रमिक का  भुगतान  किया गया है तो वे इसकी  सूचना अनिवार्य रूप से  इरडा को दें. 31  मार्च को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए यह जानकारी हर साल 30 अप्रेल को देना ज़रूरी होगा.[ न्यूज़लाइन फीचर्स एंड प्रेस एजेंसी, आगरा]

Sunday, July 18, 2010

लोकपाल निपटायेंगे शिकायतें

बीमा पालिसी धारकों की शिकायतों का समाधान करने के लिए पूरे भारत में 12 शहरों में बीमा लोकपाल की नियुक्ति कर दी गयी है.बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण [ इरडा ] के अनुसार बीमा कर्ता द्वारा उपभोक्ता को पालिसी न देने, प्रीमियम में कोई विवाद होने अथवा बीमा दावा को आंशिक या पूर्ण रूप से नामंज़ूर करने की दशा में विवाद की तारीख से एक वर्ष के अन्दर बीमा लोकपाल को अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.                        

       

अब डाक्टर नहीं ले सकेंगे गिफ्ट

भारतीय चिकित्सा परिषद् ने पेशेवर डाक्टरों पर लागू होने वाली आचार संहिता कानून, 2002 में संशोधन करके नई आचार संहिता बनाई है जिसके तहत अब कोई भी डाक्टर दवा निर्माता कम्पनी अथवा स्वास्थ्य की देखभाल से जुड़े उद्योगों से किसी भी तरह का कोई गिफ्ट या यात्रा सुविधा लाभ नहीं ले सकेगा.,लेकिन फार्मा कंपनी द्वारा प्रायोजित विशेष अनुसन्धान  कार्यों में योग्य अधिकारी से अनुमति लेने के बाद डाक्टर उसमें भाग ले सकते हैं.

ऍफ़ डी कराने पर देना होगा पेन नंबर

बैंकों में निर्धारित समय के लिए धनराशि ऍफ़ डी के रूप में जमा कराने पर अब उपभोक्ताओं को आय कर विभाग द्वारा जारी पेन कार्ड का नंबर अनिवार्य रूप से देना होगा. पेन का उल्लेख न करने पर उस उपभोक्ता से दस हज़ार रूपया से अधिक सालाना ब्याज होने पर बीस प्रतिशत की दर से टी.डी.एस.वसूल किया जाएगा. भारतीय जीवन बीमा निगम ने भी अपने प्रतिनिधियों से कहा है कि वे अनिवार्य रूप से अपना पेन नंबर निगम को दें वरना  उनका कमीशन नहीं  दिया जायेगा.

गैस रिफिल की बुकिंग के लिए कोई समय सीमा नहीं

गैस रिफिल की बुकिंग के लिए कोई समय सीमा नहीं है एक बार गैस मिलने के बाद उपभोक्ता अपनी घरेलू जरूरत के अनुसार गैस की बुकिंग करा सकता है.अवकाश के दिन और आपात स्थिति को छोड़कर सामान्यतया रिफिल बुक कराने के 48 घंटे के अन्दर उपभोक्ता को गैस की आपूर्ति करनी होगी. सूचना का अधिकार अधिनियम ,2005 के अंतर्गत मांगी गयी जानकारी के उत्तर में इंडियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड [ मार्केटिंग डिवीजन ] नॉएडा के उप महा प्रबंधक एवं जन सूचना अधिकारी वाई. के. गुप्ता के पत्र दिनांक 26 नवम्बर, 2009 द्वारा उक्त जानकारी दी गयी है. पत्र में यह भी कहा गया है कि यदि किसी उपभोक्ता क़ी ओर से गैस की आपूर्ति एवं बुकिंग के सम्बन्ध में कोई शिकायत हो तो कारपोरेशन की नीतियों के अनुसार उचित कार्यवाही की जाती है.- प्रमोदकुमार अग्रवाल, एडवोकेट[ सदस्य: हाई कोर्ट बार एसोसिएशन,इलाहाबाद]

रेगिंग की तो मिलेगी सजा

उत्तर प्रदेश में किसी भी शिक्षा संस्थान या कोचिंग में रेगिंग को दंडनीय अपराध घोषित कर दिया गया है.प्रदेश के गवर्नर द्वारा जारी एक विधेयक के अनुसार रेगिंग की शिकायत मिलने के सात दिन के अन्दर उस संस्थान के प्रधान को जांच करनी होगी और शिकायत सही पाए जाने पर दोषी छात्र को संस्थान से निकलना होगा. किसी भी रूप मे रेगिंग का प्रचार करना अथवा उसमे भाग लेना भी अपराध होगा.इसके लिए दो साल की सजा या दस हज़ार रुपया जुर्माना हो सकेगा.

एक से ज्यादा गैस कनेकशन की अनुमति नहीं

भारत सरकार द्वारा जारी संशोधित गैस कण्ट्रोल आर्डर के अनुसार पति,पत्नी,अविवाहित बच्चे और आश्रित माता-पिता वाले घर मे एक ही रसोई का इस्तेमाल करने वाले परिवार को अब एक ही एलपीजी कनेकशन डीबीसी के साथ रखने की अनुमति होगी. एक घर में एक से अधिक गैस कनेकशन का प्रयोग अवैध होगा.ऐसी दशा में अतिरिक्त कनेकशन को सम्बंधित गैस कंपनी को वापस करना होगा.अधिक जानकारी, शिकायत और सुझावों के लिए तोल फ्री नंबर 155233 अथवा 18002333555 पर संपर्क किया जा सकता है.






Saturday, July 17, 2010

CASE LAW : SERVICE MATTER

### PROMOTION CAN BE DENIED TO PERSON NOT COMPLYING WITH REQURIMENTS OF SUCH HIGER MEDICAL STANDARDS UNDER SECTION 47 [2] OF PERSONS WITH DISABILITIES[EQUAL OPPORTUNITIES,PROTECTION OF RIGHTS AND FULL PARTICIPATION]ACT.1966.THIS IS THE VIEW OF SUPREME COURT.


### DAILY WAGERS ARA NOT INCLUDED IN GOVT. EMPLOYEE. DEPENDENT OF DAILY WAGER CAN NOT CLAIM COMPASSIONATE APPOINTMENT OF DEPENDENTS OF GOVT. SERVENTS DYING IN HARNESS RULES,1974. IT IS HELD BY HIGH COURT ALLAHABAD.


### THE RIGHT OF ELIGIBLE EMPLOYEES TO BE CONSIDERED FOR PROMOTION IS VIRTUALLY A PART OF THEIR FUNDAMENTAL RIGHT GUARANTEED UNDER ARTICLE 16 OF CONSTITUTION OF INDIA. SUPREME COURT HELD THAT THE GURANTEE OF A FAIR CONSIDERATION IN MATTER OF PROMOTION VIRTUALLY FLOWS FROM GUARANTEE OF EQUALITY UNDER ARTICLE 14 OF CONSTITUTION.


*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL, ADVOCATE, MEMBER: HIGH COURT BAR ASSOCIATION, ALLAHABAD

CASE LAW : CONSUMER PROTECTION

### CONSUMER COMPANY HAS RIGHT TO PAY ELECTRICITY DUES ONLY ON THE BASIS OF METRE READING NOT AS PER LOAD ,IF THE COMPANY HAS PRIVIOUSLY APPLIED TO MINIMISE THE LOAD .THIS IS THE VIEWOF ALLAHABAD HIGH COURT.


### NON SUPPLY OF ELECTRICITY WITHIN THE PRESCRIBED PERIOD TO CONSUMER IS LACK OF SERVICES ON PART OF ELECTRICITY DEPTT. SUPREME COURT HELD THAT ELECTRICITY DEPTT. IS RESPONSIBLE FOR COMPENSATION.


### VARIOUS HIGH COURTS AND NATIONAL COMMISSION HELD IN MANY CASES THAT THE GOVT. AND DEPARTMENTS ARE DUTY BOUND AND RESPONSIBLE TO PAY ALL BALANCED MONEY / PAYMENT REGARDING PRAVIDENT FUND ETC.WITHIN REASONABLE TIME. IN CASE OF NON PAMENT OR LATE PAYMENT , THEY WILL BE RESPONSIBLE FOR SUCH PAYMENT WITH INTEREST AND COMPENSATION.


### IF ANY RAIL PASSANGER FELLDOWN AND INJURED DUE TO CROWED OF OTHER PASSENGERS OR ANY LOSS OF GOODS OF PASSENGERS OCCUR BY THEFT OR OTHER CRIMINAL ACTIVITY,RAILWAY AUTHORITIES ARE LIABLE TO PAY COMPENSATION .THIS VIEW IS GIVEN BY HIGH COURTS AND NATIONAL COMMISSION.


### NON ISSUANCE OF PASS BOOK BY POSTAL DEPARTMENT AFTER TAKING MONEY, IS LACK OF SERVICES ON PART OF POSTAL DEPTT. NATIONAL COMMISSION PASSED AN ORDER TO PAY COMPENSATION.


### IF ANY PERSON OR ANIMAL INJURED OR DIED DUE TO MIS HANDLING OF ELECTRIC WIRING, ELECTRICITY DEPTT. IS RESPONSIBLE TO PAY COMPENSATION . THIS VIEW IS OF ALLAHABAD HIGH COURT.


#### SUPPLY OF NON HIGHGENIC AND UNHEALTHY FOOD MATERIAL TO ITS PASSANGERS BY AIRWAYS COMPANY, IS LACK OF SERVICES AND NEGLIGENCY . NATIONAL COMMISSION PASSED AN ORDER FOR COMPRNSATION. .


#### IF THE INJURED OR DEAD DRIVER OF A VEHICLE HAS NO VALID LICENCE AT THE TIME OF ACCIDENT, INSURANCE COMPANY IS NOT LIABLE TO PAY ANY AMOUNT TO SUCH PERSON THIS VIEW IS GIVEN BY ALLAHABAD HIGH COURT.


### LEAKAGE OF WATER IN VEHICLE DUE TO THE DEFECTIVE GLASS IS LACK OF SERVICES.NATIONAL COMMISSION HELD THAT MANUFACTIRING COMPANY IS RESPONSIBLE FOR LOSS AND COMPENSATION TO CONSUMER.


### CANCELLATION OF CONFIRM TICKET BY AIRWAYS COMPANY WITHOT ANY REASION AND INFIOMATION TO PASSANGER IS LACK OF SERVICES ON PART OF COMPANY. HIGH COURT / NATIONAL COMMISSION HELD THAT COMPANY IS RESPONSIBLE TO REFUND THE MONEY WITH COMPENSATION.


### NON PAYMENT OF AMOUNT OF KISAN VIKAS PATRA ON MATURITY IS LACK OF SERVICE ON PART OF POSTAL DEPARTMENT.NATIONAL COMMISSION HELD THAT POST OFFICE IS LIABLE TO PAY THE AMOUNT WITH INTEREST.


#### IN CASE OF NON DELIVERY OF BOOKED CONSIGNMENT OR DENY TO MAKE PAMENT IN LUE OF COST OF GOODS OF CONSIGNMENT, TRANSPORT COMPANY IS LIABLE FOR COMPENSATION. THIS IS THE VIEW OF NATIONAL COMMISSION.


### IF ANY LOSS , INJURY OR DEATH OF A PERSON OCCURED DUE TO DEFECTED REGULATOR OR GAS CYLENDER , GAS AGENCY IS RESPONSIBLE FOR COMPENSATION TO THE AFFECTED PERSON OR HIS FAMILY.THIS VIEW IS OF ALLAHABAD HIGH COURT.


*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL, ADVOCATE, MEMBER: HIGH COURT BAR ASSOCIATION, ALLAHABAD.

CASE LAW : RIGHT TO INFORMATION

### ACCORDING TO A JUDGEMENT OF ALLAHABAD HIGH COURT NO PERSON CAN GET PHOTOSTATE COPIES OF ANSWERSHEET UNDER RIGHT TO INFORMATION ACT ,2005.


### GOVERNMENT ADDED PRIVATE EDUCATIONAL INSTITUTIONS ARE IN THE VIEW OF PUBLIC AUTHORITY. THEY ARE BOUND TO GIVE [ FURNISH ] INFORMATIONS TO THE APPLICANTS UNDER THE PROVISIONS OF RIGHT TO INFORMATION ACT, 2005. THIS VIEW IS GIVEN BY ALLAHABAD / PUNJAB & HARYANA HIGH COURT.


### PRAMOD KUMAR AGRAWAL, ADVOCATE, MEMBER : HIGH COURT BAR ASSOCIATION, ALLAHABAD.

CASE LAW : HUMAN RIGHT AND CONSTITUTION

### ILLEGAL DETENTION OF A PRISIONER IN JAIL WITHOUT ANY ORDER IS LIKELY TO BE AN INFRIDGMENT OF FUNDAMENTAL RIGHT GIVEN UNDER OUR CONSTITUTION. ALLAHABAD HIGH COURT PASSED AN ORDER FOR THREE LAC COMENSATION AGAINST STATE GOVERNMENT. .


### BLOCKEDGE OF PUBLIC PLACE BY ANY ACT IS TOTALLY INFRIDGEMENT OF FUNDAMENTAL RIGHT GIVEN UNDER ART. 19[1][d] OF INDIAN CONSTITUTION. ACCORDING TO ORRISSA HIGH COURT , STATE GOVT. IS RESPONSIBLE FOR COMPENSATION TO AFFECTED PERSON. THIS AMOUNT MAY BE RECOVERED FROM RESPONSIBLE PERSON.


### STATE GOVT. IS DUTY BOUND TO PROTECT THE PONDS OF VILLAGES . IF ANY LOSS OR DEATH OCCURED DUE TO UNSAFE PONDS STATE GOVT . IS RESPONSIBLE TO PAY COMPENSATION . THIS VIEW IS OF RAJSTHAN HIGH COURT.


### ELECTRICITY IS INCLUDE IN THE RIGHT OF LIFE UNDER ART. 21 OF THE INDIAN CONSTITUTION.BECAUSE WITHOUT EIECTRICITY THERE IS NO LIFE.THIS IS THE VIEW OF ALLAHABAD HIGH COURT.


### IT IS THE CONSTITUTIONL OBLIGATION OF THE STATE TO PROTECT THE LIFE, LIBERTY AND PROPERTY OF A PERSON .MADRAS HIGH COURT HELD THAT THAT IF ANY PERSON'S PROPERTY IS TAKEN AWAY WITHOUT AUTHORITY OF LAW BY ANY PRRSON , SUCH PERSON CAN PROTECT HIS RIGHT BY APPROACHING HIGH COURT UNDER ART. 226 OF THE CONSTITUTION OF INDIA.. NOT WITHSTANDING DELITION OF ART. 19[1][f] AND ART.32.


### DEATH OF UNDER TRIAL PRISONER IN JAIL DUE TO FAILURE OF JAIL AUTHORITIES TO PROVIDE TIMELY MEDICAL TREATMENT IS AMOUNTING TO BREACH OF HIS RIGHT OF LIFE. ALLAHABAD AND BOMBAY HIGH COURTS HELD THAT THE STATE GOVT. IS HELD LIABLE TO PAY COMPENSATION TO HIS DEPENDENTS.




*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL , ADVOCATE MEMBER : HIGH COURT BAR ASSOCIATION , ALLAHABAD.

Friday, July 16, 2010

CASE LAW : FAMILY AND MATRIMONIAL DISPUTES

### ILLEGAL SON HAS RIGHT TO TAKE HIS SHARE FROM HIS FATHER'S PROPERTY.THIS IS THE VIEW OF ANDHRA PRADESH HIGH COURT.


### AN AGREEMENT BETWEEN HUSBAND AND WIFE REGARDING NOT TO CLAIM ANY MAINTENANCE BY WIFE IN FUTURE IS AGAINST PUBLIC POLICY. ALLAHABAD HIGH COURT HELD THAT WIFE CAN CLAIM FOR MAINTENANCE UNDER SEC.125 OF CRIMINAL PROCEDURE CODE.


 ### DENY FOR SEXUAL RELATIONSHIP BY WIFE IS CRUELTY TOWARDS HER HUSBAND. THIS RELATIONSHIP IS MUST FOR HAPPY MARRIED LIFE. HUSBAND HAS RIGHT TO DIVORCE. THIS IS THE VIEW OF GUWAHATI HIGH COURT


### MENTALLY ILL MOTHER CAN FILE A SUIT AGAINST HER SON THROUGH HER DEVER UNDER SEC. 125 OF CRIMINSL PROCEDURE CODE. THIS IS THE VIEW OF CHATTISGARH HIGH COURT.


### REMARRIAGE OF THE MOTHER CAN NOT BE TAKEN AS A GROUND FOR NOT GRANTING THE CUSTODY OF THE CHIELD TO THE MOTHER. THIS VIEW IS OF SUPREME COURT .


*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL, ADVOCATE, MEMBER: HIGH COURT BAR ASSOCIATION, ALLAHABAD.

Thursday, July 15, 2010

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम में हुए संशोधन

कर्मचारी राज्य बीमा अधिनियम में हुए नए संशोधनों के अनुसार अब उन सभी कारखानों और प्रतिष्ठानों को इस कानून के  दायरे मे ले लिया गया है जिनमे दस या अधिक कर्मचारी 15  हज़ार तक के मासिक वेतन  पर  काम करते हैं.25  वर्ष तक की उम्र वाले पुत्र को भी कर्मचारी का आश्रित माना जायेगा और वह सभी हित लाभों को पाने का अधिकारी होगा. घर से कार्यस्थल और कार्यस्थल से घर जाते समय होने वाली दुर्घटना को सेवाकाल की दुर्घटना माना जाएगा और ऐसी दशा मे कर्मचारी या उसके आश्रित उचित हर्जाना और हित लाभ पाने के अधिकारी होंगे.
प्रत्येक कर्मचारी को ये मालूम होना चाहिए की इस कानून के तहत उसे मिलने वाले वेतन मे से 1 .75 प्रतिशत की कटौती अंशदान के रूप मे की जाती है, जबकि मालिक या नियोजक द्वारा  4 .75 प्रतिशत अंशदान दिया जाता है जो ईएसआई निगम मे जमा होता है     [--प्रमोदकुमार अग्रवाल,एड्वोकेट, [ सदस्य : हाई कोर्ट बार एसोसिएशन,इलाहाबाद]

Wednesday, July 14, 2010

पोस्ट ऑफिस में भी देना होगा पेन कार्ड

सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार अब पोस्ट ऑफिस में 50 हज़ार या अधिक राशि जमा कराने के लिए  आय कर विभाग द्वारा जारी पेन कार्ड नंबर और आई डी  एवं निवास प्रमाण पत्र की छाया प्रति  लगाना अनिवार्य कर दिया गया है.50 हज़ार से कम रकम जमा करने की दशा में आई डी एवं निवास प्रमाण पत्र की छाया प्रति लगाना अनिवार्य  है.

Tuesday, June 29, 2010

NO LICENCE FOR AYURVEDIC SHOP

 TO START OR OPEN AN AYURVEDIC , YUNANI AND PATENT MEDICAL SHOP , NO LICENCE OR REGISTRATION IS NECESSERY FROM ANY WHERE BUT FOR MANUFACTURING OF SUCH MEDICINES, A LICENCE AND REGISTRATION MUST BE OBTAINED FROM CONCERNED DEPARTMENT UNDER DRUGS AND COSMETIC RULES. THIS INFORMATION IS RECIEVED BY DR. V.K. KHULLAR , PRADHAN , AKHIL BHARTIYA AYURVED SEWA SANGH , NEW DELHI UNDER RIGHT TO INFORMATION ACT , 2005 [ NEWSLINE AGRA]

Monday, June 28, 2010

IMPORTANT DECISIONS

                                                             FAMILY MATTERS
### ILLEGAL SON HAS RIGHT TO TAKE HIS SHARE FROM HIS FATHER'S PROPERTY.THIS IS THE VIEW OF ANDHRA PRADESH HIGH COURT.


### AN AGREEMENT BETWEEN HUSBAND AND WIFE REGARDING NOT TO CLAIM ANY MAINTENANCE BY WIFE IN FUTURE IS AGAINST PUBLIC POLICY. ALLAHABAD HIGH COURT HELD THAT WIFE CAN CLAIM FOR MAINTENANCE UNDER SEC.125 OF CRIMINAL PROCEDURE CODE.

### DENY FOR SEXUAL RELATIONSHIP BY WIFE IS CRUELTY TOWARDS HER HUSBAND. THIS RELATIONSHIP IS MUST FOR HAPPY MARRIED LIFE. HUSBAND HAS RIGHT TO DIVORCE. THIS IS THE VIEW OF GUWAHATI HIGH COURT.

### REMARRIAGE OF THE MOTHER CAN NOT BE TAKEN AS A GROUND FOR NOT GRANTING THE CUSTODY OF THE CHIELD TO THE MOTHER. THIS VIEW IS OF SUPREME COURT .


### REMARRIAGE OF THE MOTHER CAN NOT BE TAKEN AS A GROUND FOR NOT GRANTING THE CUSTODY OF THE CHIELD TO THE MOTHER. THIS VIEW IS OF SUPREME COURT .



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### ILLEGAL SON HAS RIGHT TO TAKE HIS SHARE FROM HIS FATHER'S PROPERTY.THIS IS THE VIEW OF ANDHRA PRADESH HIGH COURT.



### AN AGREEMENT BETWEEN HUSBAND AND WIFE REGARDING NOT TO CLAIM ANY MAINTENANCE BY WIFE IN FUTURE IS AGAINST PUBLIC POLICY. ALLAHABAD HIGH COURT HELD THAT WIFE CAN CLAIM FOR MAINTENANCE UNDER SEC.125 OF CRIMINAL PROCEDURE CODE.



### DENY FOR SEXUAL RELATIONSHIP BY WIFE IS CRUELTY TOWARDS HER HUSBAND. THIS RELATIONSHIP IS MUST FOR HAPPY MARRIED LIFE. HUSBAND HAS RIGHT TO DIVORCE. THIS IS THE VIEW OF GUWAHATI HIGH COURT.



### MENTALLY ILL MOTHER CAN FILE A SUIT AGAINST HER SON THROUGH HER DEVER UNDER SEC. 125 OF CRIMINSL PROCEDURE CODE. THIS VIEW IS OF CHATTISGARH HIGH COIRT.



### REMARRIAGE OF THE MOTHER CAN NOT BE TAKEN AS A GROUND FOR NOT GRANTING THE CUSTODY OF THE CHIELD TO THE MOTHER. THIS VIEW IS OF SUPREME COURT .









*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL, ADVOCATE, MEMBER: HIGH COURT BAR ASSOCIATION, ALLAHABAD [MOBILE: 09359442230]

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ILLEGAL DETENTION OF A PRISIONER IN JAIL WITHOUT ANY ORDER IS LIKELY TO BE AN INFRIDGMENT OF FUNDAMRNTAL RIGHT GIVEN UNDER OUR CONSTITUTION. ALLAHABAD HIGH COURT PASSED AN ORDER FOR THREE LAC COMENSATION AGAINST STATE GOVERNMENT. .



### BLOCKEDGE OF PUBLIC PLACE BY ANY ACT IS TOTALLY INFRIDGEMENT OF FUNDAMENTAL RIGHT GIVEN UNDER ART. 19[1][d] OF INDIAN CONSTITUTION. ACCORDING TO ORRISSA HIGH COURT , STATE GOVT. IS RESPONSIBLE FOR COMPENSATION TO AFFECTED PERSON. THIS AMOUNT MAY BE RECOVERED FROM RESPONSIBLE PERSON.



### STATE GOVT. IS DUTY BOUND TO PROTECT THE PONDS OF VILLAGES . IF ANY LOSS OR DEATH OCCURED DUE TO UNSAFE PONDS STATE GOVT . IS RESPONSIBLE TO PAY COMPENSATION . THIS VIEW IS OF RAJSTHAN HIGH COURT.



### ELECTRICITY IS INCLUDE IN THE RIGHT OF LIFE UNDER ART. 21 OF THE INDIAN CONSTITUTION.BECAUSE WITHOUT EIECTRICITY THERE IS NO LIFE.THIS IS THE VIEW OF ALLAHABAD HIGH COURT.



### IT IS THE CONSTITUTIONL OBLIGATION OF THE STATE TO PROTECT THE LIFE, LIBERTY AND PROPERTY OF A PERSON .MADRAS HIGH COURT HELD THAT THAT IF ANY PERSON'S PROPERTY IS TAKEN AWAY WITHOUT AUTHORITY OF LAW BY ANY PRRSON , SUCH PERSON CAN PROTECT HIS RIGHT BY APPROACHING HIGH COURT UNDER ART. 226 OF THE CONSTITUTION OF INDIA.. NOT WITHSTANDING DELITION OF ART. 19[1][f] AND ART.32.



### DEATH OF UNDER TRIAL PRISONER IN JAIL DUE TO FAILURE OF JAIL AUTHORITIES TO PROVIDE TIMELY MEDICAL TREATMENT IS AMOUNTING TO BREACH OF HIS RIGHT OF LIFE. ALLAHABAD AND BOMBAY HIGH COURTS HELD THAT THE STATE GOVT. IS HELD LIABLE TO PAY COMPENSATION TO HIS DEPENDENTS.



*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL , ADVOCATE MEMBER : HIGH COURT BAR ASSOCIATION , ALLAHABAD[ MOB.: 09359442230]

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TO START OR OPEN AN AYURVEDIC , YUNANI AND PATENT MEDICAL SHOP , NO LICENCE OR REGISTRATION IS NECESSERY FROM ANY WHERE BUT FOR MANUFACTURING OF SUCH MEDICINES, A LICENCE AND REGISTRATION MUST BE OBTAINED FROM CONCERNED DEPARTMENT UNDER DRUGS AND COSMETIC SULE. THIS INFORMATION IS RECIEVED BY DR. V.K. KHULLAR , PRADHAN , AKHIL BHARTIYA AYURVED SEWA SANGH , NEW DELHI UNDER RIGHT TO INFIRMATION ACT , 2005 [ NEWSLINE AGRA ]

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### ACCORDING TO A JUDGEMENT OF ALLAHABAD HIGH COURT NO PERSON CAN GET PHOTOSTATE COPIES OF ANSWERSHEET UNDER RIGHT TO INFORMATION ACT ,2005.



### GOVERNMENT ADDED PRIVATE EDUCATIONAL INSTITUTIONS ARE IN THE VIEW OF PUBLIC AUTHORITY. THEY ARE BOUND TO GIVE [ FURNISH ] INFORMATIONS TO THE APPLICANTS UNDER THE PROVISIONS OF RIGHT TO INFORMATION ACT, 2005. THIS VIEW IS GIVEN BY ALLAHABAD / PUNJAB & HARYANA HIGH COURT.



### PRAMOD KUMAR AGRAWAL, ADVOCATE, MEMBER : HIGH COURT BAR ASSOCIATION, ALLAHABAD [ MOBILE : 09359442230]

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### CONSUMER COMPANY HAS RIGHT TO PAY ELECTRICITY DUES ONLY ON THE BASIS OF METRE READING NOT AS PER LOAD ,IF THE COMPANY HAS PRIVIOUSLY APPLIED TO MINIMISE THE LOAD .THIS IS THE VIEWOF ALLAHABAD HIGH COURT.



### NON SUPPLY OF ELECTRICITY WITHIN THE PRESCRIBED PERIOD TO CONSUMER IS LACK OF SERVICES ON PART OF ELECTRICITY DEPTT. SUPREME COURT HELD THAT ELECTRICITY DEPTT. IS RESPONSIBLE FOR COMPENSATION.



### VARIOUS HIGH COURTS AND NATIONAL COMMISSION HELD IN MANY CASES THAT THE GOVT. AND DEPARTMENTS ARE DUTY BOUND AND RESPONSIBLE TO PAY ALL BALANCED MONEY / PAYMENT REGARDING PRAVIDENT FUND ETC.WITHIN REASONABLE TIME. IN CASE OF NON PAMENT OR LATE PAYMENT , THEY WILL BE RESPONSIBLE FOR SUCH PAYMENT WITH INTEREST AND COMPENSATION.



### IF ANY RAIL PASSANGER FELLDOWN AND INJURED DUE TO CROWED OF OTHER PASSENGERS OR ANY LOSS OF GOODS OF PASSENGERS OCCUR BY THEFT OR OTHER CRIMINAL ACTIVITY,RAILWAY AUTHORITIES ARE LIABLE TO PAY COMPENSATION .THIS VIEW IS GIVEN BY HIGH COURTS AND NATIONAL COMMISSION.



### NON ISSUANCE OF PASS BOOK BY POSTAL DEPARTMENT AFTER TAKING MONEY, IS LACK OF SERVICES ON PART OF POSTAL DEPTT. NATIONAL COMMISSION PASSED AN ORDER TO PAY COMPENSATION.



### IF ANY PERSON OR ANIMAL INJURED OR DIED DUE TO MIS HANDLING OF ELECTRIC WIRING, ELECTRICITY DEPTT. IS RESPONSIBLE TO PAY COMPENSATION . THIS VIEW IS OF ALLAHABAD HIGH COURT.



#### SUPPLY OF NON HIGHGENIC AND UNHEALTHY FOOD MATERIAL TO ITS PASSANGERS BY AIRWAYS COMPANY, IS LACK OF SERVICES AND NEGLIGENCY . NATIONAL COMMISSION PASSED AN ORDER FOR COMPRNSATION. .



#### IF THE INJURED OR DEAD DRIVER OF A VEHICLE HAS NO VALID LICENCE AT THE TIME OF ACCIDENT, INSURANCE COMPANY IS NOT LIABLE TO PAY ANY AMOUNT TO SUCH PERSON THIS VIEW IS GIVEN BY ALLAHABAD HIGH COURT.



### LEAKAGE OF WATER IN VEHICLE DUE TO THE DEFECTIVE GLASS IS LACK OF SERVICES.NATIONAL COMMISSION HELD THAT MANUFACTIRING COMPANY IS RESPONSIBLE FOR LOSS AND COMPENSATION TO CONSUMER.



### CANCELLATION OF CONFIRM TICKET BY AIRWAYS COMPANY WITHOT ANY REASION AND INFIOMATION TO PASSANGER IS LACK OF SERVICES ON PART OF COMPANY. HIGH COURT / NATIONAL COMMISSION HELD THAT COMPANY IS RESPONSIBLE TO REFUND THE MONEY WITH COMPENSATION.



### NON PAYMENT OF AMOUNT OF KISAN VIKAS PATRA ON MATURITY IS LACK OF SERVICE ON PART OF POSTAL DEPARTMENT.NATIONAL COMMISSION HELD THAT POST OFFICE IS LIABLE TO PAY THE AMOUNT WITH INTEREST.



#### IN CASE OF NON DELIVERY OF BOOKED CONSIGNMENT OR DENY TO MAKE PAMENT IN LUE OF COST OF GOODS OF CONSIGNMENT, TRANSPORT COMPANY IS LIABLE FOR COMPENSATION. THIS IS THE VIEW OF NATIONAL COMMISSION.



### IF ANY LOSS , INJURY OR DEATH OF A PERSON OCCURED DUE TO DEFECTED REGULATOR OR GAS CYLENDER , GAS AGENCY IS RESPONSIBLE FOR COMPENSATION TO THE AFFECTED PERSON OR HIS FAMILY.THIS VIEW IS OF ALLAHABAD HIGH COURT.









*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL ,ADVOCATE ,MEMBER : HIGH COURT BAR ASSOCIATION , ALLAHABAD [ MOBILE: 09359442230]







*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL, ADVOCATE, MEMBER: HIGH COURT BAR ASSOCIATION, ALLAHABAD [MOBILE: 09359442230]







*** PRAMOD KUMAR AGRAWAL, ADVOCATE, MEMBER: HIGH COURT BAR ASSOCIATION, ALLAHABAD [MOBILE: 09359442230]

Saturday, April 10, 2010

LEGAL ADVISOR OF AKHIL BHARTIYA AYURVED SEWA SANGH

आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, होमोपथिक , नेचुरोपेथी, चिकित्सा पद्धति में प्रेक्टिस कर रहे डाक्टरों की सेवा एवं सहायता के लिए समर्पित अखिल भारतीय आयुर्वेद सेवा संघ, ऋषि नगर, दिल्ली के प्रधान डॉक्टर वी के खुल्लर ने अधिवक्ता एवं पत्रकार प्रमोदकुमार अग्रवाल को संघ का मानद क़ानूनी सलाहकार नियुक्त किया है. श्री अग्रवाल को संघ से जुड़े डाक्टरों को क़ानूनी सलाह एवं सहायता उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी सौपी गयी है. श्री अग्रवाल हाई कोर्ट बार  असोसिएशन इलाहाबाद के सदस्य , अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत के क़ानूनी सलाहकार , पीपुल फॉर एनीमल के स्थाई सदस्य , न्यूज़लाइन फीचर्स एंड प्रेस एजेंसी के संपादक , आल इंडिया न्यूज़ पेपर एडिटर  कोंफ्रेंस  के सदस्य , पत्रकार परिषद्  उत्तर प्रदेश तथा ताज प्रेस क्लब के सदस्य हैं. श्री अग्रवाल से उनके मोबाइल नंबर  09412155627 पर संपर्क किया जा सकता है.     

Wednesday, March 17, 2010

धर्म का अर्थ है आत्म शुद्धि

धर्म का हमारे जीवन के साथ जन्म से ही गहरा रिश्ता रहा है. धर्म हमारे जीवन को बदल देने की ताक़त रखता है. धर्म का अर्थ किसी धार्मिक या तीर्थ स्थल की यात्रा करना, धार्मिक ग्रन्थ का पाठ करना  अथवा धार्मिक रीति रिवाजों का  कट्टरता से पालन करना या  धर्म  के नाम पर अन्य कोई अनुष्ठान करना मात्र नहीं है, बल्कि धर्म का वास्तविक अर्थ है अपने मन को पवित्र बनाए रखना, हर वक़्त जरूरतमंदों की मदद को तत्पर रहना,जीवन के विकास के लिए जरूरी नैतिक सिद्धांतों का अनुपालन करना. धर्म हमें गलत मार्ग से हटाकर सही रास्ते पर लाता है. धर्म के नीतिगत सिद्धांत हमें सदेव ये याद दिलाते हैं कि हम कभी भी कोई गलत कार्य न करें. यदि भूल से भी हमसे कोई गलत कार्य हो भी गया हो तो हम उसका सच्चे ह्रदय से भगवान्  के सामने पश्चाताप करें.धर्म से बढ़कर कोई और ऐसा साधन नहीं है जो हमारा वास्तव में सही मार्ग दर्शन  करता हो बशर्ते कि धर्म के वास्तविक अर्थ को समझते हुए हम सही रास्ते का चयन करें और उस पर चलें.हमें समझ लेना चाहिए कि धर्म का अर्थ है आत्म शुद्धि . --- प्रमोद कुमार अग्रवाल, एडवोकेट  एवं पत्रकार 

हँसना ही जिंदगी है

एक दार्शनिक का कथन है कि किसी को नाराज करने में  एक मिनट भी नहीं लगता है,  लेकिन किसी को हंसाने मैं घंटो बीत जाते हैं . इस कथन में सच्चाई है कि हमें किसी को नाराज नहीं करना चाहिए क्योंकि दूसरो की नाराजगी से हमारे दिल को भी ठेस पहुँचती है .हमें दूसरो को बेमतलब नाराज करने की  मानसिकता छोडनी होगी . हम खुद भी हँसे और दूसरो को भी हँसाते रहे . हमें याद रखना चाहिए कि हँसना ही जिंदगी है . हमेशा  हँसते रहना सेहत के लिए एक अच्छा टोनिक हे. जिसके लिए हमें कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता हे. हम हमेशा प्रसन्न रहें इसके लिए यह जरुरी है  कि हम अपने अंदर से क्रोध, गुस्सा, आलोचना और नकारात्मक विचारों को हमेशा के लिए दूर कर दें,  दूसरों के हित का चिंतन करें और दूसरों के साथ उसी प्रकार का व्यवहार करें जैसा  कि हम अपने  लिए चाहते  हैं-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, एडवोकेट एवं पत्रकार
एक दार्शनिक का कथन है कि किसी को नाराज करने मै एक मिनट भी नहीं लगता है लेकिन किसी को हंसाने मैं घंटो बीत जाते हैं . इस कथन में सच्चाई है कि हमें किसी को नाराज नहीं करना चाहिए क्योंकि दूसरो की नाराजगी से हमारे दिल को भी ठेस पहुँचती है .हमें दूसरो को बेमतलब नाराज करने कि मानसिकता छोडनी होगी . हम खुद भी हँसे और दूसरो को भी हँसाते रहे . हमें याद रखना चाहिए कि हँसाना ही जिंदगी हे. सदेव हँसते रहना सेहत के लिए एक अच्छा टोनिक हे. जिसके लिए हमें कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता हे. हम हमेशा प्रसन्न रहें इसके लिए यह जरुरी हे कि हम अपने अंदर से क्रोध, गुस्सा, आलोचना और नकारात्मक विचारों को हमेशा के लिए दूर कर दें दूसरों के हित का चिंतन करें और दूसरों के साथ उसी प्रकार का व्यवहार करें जेसा कि हम आपने लिए चाटें हैं. (न्यूज़लाइन आगरा)- प्रमोद कुमार अग्रवाल,एडवोकेट
रेलवे प्रशासन यात्री को हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए उत्तरदायी है.





















  
एक दार्शनिक का कथन है कि किसी को नाराज करने मै   एक मिनट भी नहीं लगता है लेकिन किसी को हंसाने मैं घंटो बीत जाते हैं . इस कथन में सच्चाई है कि हमें किसी को नाराज नहीं करना चाहिए क्योंकि दूसरो की नाराजगी से हमारे दिल को भी ठेस पहुँचती है .हमें दूसरो को बेमतलब नाराज करने कि मानसिकता छोडनी होगी . हम खुद भी हँसे और दूसरो को भी हँसाते रहे . हमें याद रखना चाहिए कि हँसाना ही जिंदगी हे. सदेव हँसते रहना सेहत के लिए एक अच्छा टोनिक हे. जिसके लिए हमें कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता हे. हम हमेशा प्रसन्न रहें इसके लिए यह जरुरी हे कि हम अपने अंदर से क्रोध, गुस्सा, आलोचना और नकारात्मक विचारों को हमेशा के लिए दूर कर दें दूसरों के हित का चिंतन करें और दूसरों के साथ उसी प्रकार का व्यवहार करें जेसा कि हम आपने लिए चाटें हैं. (न्यूज़लाइन आगरा)- प्रमोद कुमार अग्रवाल,एडवोकेट

























एक दार्शनिक का कथन है कि किसी को नाराज करने मैएक मिनट भी नहीं लगता है लेकिन किसी को हंसाने मैं घंटो बीत जाते हैं . इस कथन में सच्चाई है कि हमें किसी को नाराज नहीं करना चाहिए क्योंकि दूसरो की नाराजगी से हमारे दिल को भी ठेस पहुँचती है .हमें दूसरो को बेमतलब नाराज करने कि मानसिकता छोडनी होगी . हम खुद भी हँसे और दूसरो को भी हँसाते रहे . हमें याद रखना चाहिए कि हँसाना ही जिंदगी हे. सदेव हँसते रहना सेहत के लिए एक अच्छा टोनिक हे. जिसके लिए हमें कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता हे. हम हमेशा प्रसन्न रहें इसके लिए यह जरुरी हे कि हम अपने अंदर से क्रोध, गुस्सा, आलोचना और नकारात्मक विचारों को हमेशा के लिए दूर कर दें दूसरों के हित का चिंतन करें और दूसरों के साथ उसी प्रकार का व्यवहार करें जेसा कि हम आपने लिए चाटें हैं. (न्यूज़लाइन आगरा)- प्रमोद कुमार अग्रवाल,एडवोकेट

























एक दार्शनिक का कथन है कि किसी को नाराज करने मैएक मिनट भी नहीं लगता है लेकिन किसी को हंसाने मैं घंटो बीत जाते हैं . इस कथन में सच्चाई है कि हमें किसी को नाराज नहीं करना चाहिए क्योंकि दूसरो की नाराजगी से हमारे दिल को भी ठेस पहुँचती है .हमें दूसरो को बेमतलब नाराज करने कि मानसिकता छोडनी होगी . हम खुद भी हँसे और दूसरो को भी हँसाते रहे . हमें याद रखना चाहिए कि हँसाना ही जिंदगी हे. सदेव हँसते रहना सेहत के लिए एक अच्छा टोनिक हे. जिसके लिए हमें कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ता हे. हम हमेशा प्रसन्न रहें इसके लिए यह जरुरी हे कि हम अपने अंदर से क्रोध, गुस्सा, आलोचना और नकारात्मक विचारों को हमेशा के लिए दूर कर दें दूसरों के हित का चिंतन करें और दूसरों के साथ उसी प्रकार का व्यवहार करें जेसा कि हम आपने लिए चाटें हैं. (न्यूज़लाइन आगरा)- प्रमोद कुमार अग्रवाल,एडवोकेट

Monday, March 15, 2010

चलना ही जिंदगी है

जीवन भगवान का दिया गया एक ऐसा आशीर्वाद है जिसे यदि सही ढंग से जिया जाए तो असीम सुख की प्राप्ति होतीहै. जीवन जीने के क्या मायने हैइसे समझने में हमारा सारा जीवनबीत जाता है,लेकिन हम समझ ही नहीं पाते हैं' क्या सुबह से लेकर रात तक हम दिनभर में जो कुछ भी करते हैं वही जीवन का सार है.में मानता हूँ कि ये कोई जीना नहीं है इस तरह क़ी जिन्दगी को जीने से ऐसा लगता है कि जिन्दगी थम सी गयी है.जीवन तो हमेशा से ही चलने के लिए बना है. इसमें रुकने का कोई काम ही नहीं है. हम  अपनी प्रकृति को देखें, नदी, हवा, समय, जीव-जन्तु सभी चलते ही रहते हैं. जीवन तो चलने का दूसरा नाम है. यदि हम अपनी मंजिल को पाना चाहते हैं, अपने लक्ष्य तक पहुंचना चाहते हैं तो हमें सदैव चलते रहने के मंत्र को अपनाना ही होगा. हमारे इस निश्चय के साथ हम यक़ीनन जीवन को बेहतर ढंग से जी सकते हैं और इसी में हमारा हित है.-- प्रमोद कुमार अग्रवाल,एडवोकेट

Saturday, March 13, 2010

व्यक्तित्व के विकास में बाधक दोहरी मानसिकता

लोग कहते हैं कि हम अपनी मर्ज़ी के मालिक हैं, जैसा हमारे मन में आता है करते हैं. लेकिन ये सच नहीं है क्योंकि हम अक्सर दूसरों  के  अनुसार चलते हैं .जब हम अपनी मर्ज़ी से चलने क़ी कोशिश करना चाहते हैं तो लोग हमारे रास्ते में तरह-तरह क़ी रुकावटें पैदा करने में लग जाते हैं.वे कभी सामजिक  तो कभी पारिवारिक रीतिरिवाजों का उदाहरण देकर हमें अपनी मर्ज़ी से चलाने लगते हैं और हम खुश होकर अपने अस्तित्व को भुला बैठते हैं ये दोहरी मानसिकता हमारे व्यक्तित्व के विकास में बाधक बन जाती है और हम जीवन क़ी दौड़ में पिछड़ जाते हैं. एक तरफ तो हम कबीरदास के दोहों में बचपन से रटते हैं कि पत्थर क़ी बजाय आटा पीसने वाली चक्की क़ी पूजा करना कहीं अधिक अच्छा है इसी प्रकार लाउडस्पीकर लगाकर शोरगुल करने से भगवान क्या  जल्दी सुन लेते हैं., वहीँ दूसरी ओर हम जगह-जगह तेज आवाज़ वाले वाद्य यन्त्र दिन रात  बजाकर दूसरों की सुख सुविधा में बाधा उत्पन्न करते हैं.ये उचित नहीं है.हमें कोई हक नहीं क़ी हम किसी क़ी आज़ादी में दखल दें यदि हम अपना विकास चाहते हैं तो हमें दोहरी मानसिकता का परित्याग करना ही होगा . इसी में हम सबकी भलाई है-- प्रमोद कुमार अग्रवाल, एडवोकेट एवं पत्रकार .

Tuesday, March 9, 2010

आयुर्वेदिक मेडिकल शॉप खोलने के लिए लाइसेंस ज़रूरी नहीं

आयुर्वेद,यूनानी एवं पेटेंट दवाओं को बेचने के लिए मेडिकल स्टोर खोलने हेतु किसी भी लाइसेंस अथवा पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है , लेकिन इन दवाओं के निर्माण के लिए ड्रग्स एवं कोस्मेटिक नियम के अंतर्गत लाइसेंस अनिवार्य है. उक्त जानकारी सूचना का अधिकार कानून के तहत भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आयुर्वेद, योगा एवं नेचुरोपैथी, यूनानी, सिद्ध तथा होमयोपेथी [आयुष] विभाग के टेक्नीकल अधिकारी [ आयुर्वेद] डाक्टर जी.जी गोड़ द्वारा दिनांक 18 अगस्त, 2009  के पत्र के माध्यम से दी गयी है.यह जानकारी अखिल भारतीय आयुर्वेद सेवा संघ , ऋषि नगर , दिल्ली के प्रधान डाक्टर वी. के. खुल्लर  द्वारा मांगी गयी थी.

Monday, March 8, 2010

हमारे अधिकार

अधिकार हमारे संपूर्ण विकास के आधारभूत तत्त्व हैं. अधिकारों के बिना मनुष्य का विकास कतई संभव नहीं है. भारतीय संविधान में प्रत्येक भारतीय नागरिक को कुछ मौलिक अधिकार प्रदान किये गए हैं जैसे   समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, जीवन का अधिकार, व्यक्तिगत सुरक्षा का अधिकार, संस्कृति और शिक्षा का अधिकार, शोषण के विरूद्ध अधिकार, धार्मिक स्वंतंत्रता का अधिकार, न्यायालय में मुकदमा करने का अधिकार, आदि . यदि कोई व्यक्ति किसी के अधिकारों का हनन करता है तो पीड़ित पक्ष अपने अधिकारों के संरक्षण के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226  के अंतर्गत हाई कोर्ट में तथा अनुच्छेद 32  के अंतर्गत सुप्रीम कोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकता है. -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, एडवोकेट एवं पत्रकार  [ न्यूज़लाइन आगरा ]

Thursday, February 11, 2010

सबकी सहायता है अपनी सहायता

कहते हैं जो व्यक्ति दूसरों की सहायता के लिए हमेशा तैयार रहता  है, भगवान भी उसकी सहायता करते हैं. सबकी सहायता करने का सीधा मतलब है अपनी सहायता क्योंकि जब हम जरूरतमंदों की सहायता सच्चे मन से करते हैं तो हमें दिली ख़ुशी मिलती है. सहायता का अर्थ ये नहीं है कि हम रुपये पैसे या कपडे लत्ते लुटा दें , बल्कि सहायता में वो मदद भी शामिल है जो शरीर से की जा सकती हो. किसी घायल को अस्पताल पहुँचाना , किसी नेत्रहीन को अपनी मंजिल तक पहुँचाना , जरुरत पड़ने पर रक्तदान करना, भूख -  प्यास से तड़फते व्यक्ति को भोजन पानी देने  जैसे कार्यों से जो तसल्ली मन को मिलती है वो और किसी काम से कभी हासिल नहीं हो सकती. आत्मप्रेरणा एवं निःस्वार्थ भाव  से दूसरों की मदद के लिए किये गए सभी कार्य किसी न किसी रूप में  हमारे जीवन के लिए शुभ फलदायी होते हैं और हमारे व्यक्तित्व  को महान बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है.