Monday, February 27, 2017

भगवान शिव की महापूजा का पर्व है शिवरात्रि
त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की महापूजा का पावन पर्व है शिवरात्रि, जिसमें व्रत, उपवास, पूजापाठ, मंत्र साधना, रात्रि जागरण आदि के द्वारा अपनी इंद्रियों को नियंत्रित कर शिव तत्व को प्राप्त किया जा सकता है। शिव सौम्य हैं, सरल हैं तो काल रूप में महाकाल हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड में आध्यात्मिक चेतना के महाशिखर हैं शिव। सृष्टि के आरम्भ में मध्य रात्रि में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को ब्रह्मा से रूद्र के रूप में शिव का अवतरण हुआ, इसलिए शिव रौद्र रूप भी हैं। पौराणिक अभिव्यक्ति में शिवरात्रि शिव और पार्वती के विवाह की शुभ रात्रि है, वहीं शिव ने प्रलय काल में शिवलिंग के रूप में जन्म लिया और ब्रह्मा एवं विष्णु ने रात्रि में ही शिवलिंग की आराधना की, इसलिए शिव को शिवरात्रि विशेष प्रिय है।
शिवपूजन एवं उपवास की विधि 
शिवरात्रि के दिन व्रत और उपवास रखते हुए श्रद्धानुसार शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, गन्ने का रस, सरसों या तिल का तेल, केसर, भांग, धतूरा, आक, बेलपत्र, अक्षत, काले तिल, पुष्प आदि अर्पित करते हुए रुद्राभिषेक किया जाता है। शिव पूजन के समय रुद्राक्ष धारण करना और ॐ नमः शिवाय एवं महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप करना शुभ होता है। भगवान शिव की पूजा में तुलसी पत्र, हल्दी, शंख का जल, चंपा, कदंब, सेमल, अनार, मदंती, बहेड़ा, जूही, कैथ आदि के पुष्प अर्पित करना निषिद्ध है। शिव पूजन के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान शिवालय अर्थात शिव मंदिर है परंतु शिव मंदिर न होने की दशा में बेलपत्र या पीपल के वृक्ष के पास भी शिव पूजन किया जा सकता है। 
 शिव पूजन का महत्व
शिवरात्रि पर व्रत, उपवास, मंत्रोच्चार,और रात्रि जागरण करने से तन और मन की शुद्धि तो होती ही है, भय, रोग, कष्ट, दुघटना भय और अन्य समस्याओं से भी छुटकारा मिलने लगता है। जिन जातकों की कुंडली में पीड़ादायक ग्रहों की दशा या अंतर्दशा के कारण घर-परिवार में वियोग, कलह, अशांति, धन की कमी, दुःख, असहनीय कष्ट आदि आ रहे हों तो उन्हें शिवरात्रि पर शिव की आराधना अवश्य करनी चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके शिवलिंग पर बेलपत्र और जलधारा चढ़ाने से जीवन में सुख, शांति, धन-संपदा, प्रसन्नता, अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। अयोध्या कांड के आरंभ में वर्णित शिव के दिव्य स्वरुप का नियमित पाठ करने से सभी कष्ट, परेशानियां, तनाव और समस्याओं का निदान होने लगता है। काल सर्प दोष वाली कुंडली के जातकों को शिवरात्रि पर प्रातः स्नान के बाद चांदी और तांबे के सर्प का एक-एक जोड़ा अपने शरीर से ग्यारह या इक्कीस बार उसार कर बहते जल में प्रवाहित करने और फिर नियम पूर्वक हर सोमवार को शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से लाभ मिलता है।जिन कन्याओं के विवाह में किन्हीं  परेशानियों की वजह से विलंब हो रहा हो तो उन्हें भी शिवरात्रि  के दिन शिव एवं पार्वती का पूजन कर सोलह सोमवार के व्रत रखने चाहिए तथा रामचरित मानस ,इन वर्णित शिव-पार्वती विवाह के प्रसंग का पाठ करना चाहिए। शनि की साढ़े साती या ढईया से प्रभावित जातकों को शिवलिंग का सरसों के तेल से अभिषेक करते हुए महामृत्युंजय मंत्र का जप करना चाहिए। राहु एवं केतु के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए शिवलिंग पर काले तिल और पंचामृत अर्पित करने से लाभ होता है।--- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषविद, आगरा 
   

Saturday, July 2, 2016

30 अक्टूबर के बाद शहर में यूरो-2 के आॅटो लोडर नहीं चलेंगे

आॅटो लोडर के डीजल इंजन को सीएनजी में कराने का मौका
 सम्भागीय परिवहन अधिकारी जगदीश सिंह कुशवाह ने अवगत कराया है कि टीटीजेड के पूर्व में निर्णयानुसार वर्ष 2005-2006, 2006-2007 तक के यूरो-2 वाले आॅटो लोडर (जीबीडब्ल्यू-3000 कि0ग्रा तक) 31 मार्च 2016 के बाद नगर निगम सीमा में संचालन से बाहर किया जा चुका है। अपर जिलाधिकारी (नगर) की अध्यक्षता एवं पुलिस अधीक्षक (नगर) की उपस्थिति, आॅटो लोडर यूनियन के पदाधिकारियों की मौजूदगी में 21 जून को पुनः आॅटो लोडर संचालन के सम्बन्ध में बैठक की गयी। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यूरो-2 के आॅटो लोडर, जो नगर निगम सीमा में 31 मार्च के बाद बाहर किये गये थे यदि सीएनजी से इंजन प्रतिस्थापित करा लेते हैं तो उन्हें शहर के अन्दर चलाने की अनुमति दे दी जायेगी। उन्होंने बताया कि 01 अप्रैल 2007 से 31 मार्च 2010 के मध्य पंजीकृत यूरो-2 डीजल चलित आॅटो लोडर को शहर सीमा में संचालन की तिथि 30 अक्टूबर 2016 तक नियत की गयी है। इस अवधि में अपने आॅटो लोडर के डीजल इंजन को सीएनजी से प्रतिस्थापित करा लें अन्यथा 30 अक्टूबर के बाद कोई भी यूरो-2 के आॅटो लोडर शहर सीमा में संचालित नहीं होगा। 

Tuesday, June 14, 2016

जीवन धारा है-गंगा

गंगा तेरा पानी अमृत.......

भारत की परंपरा और संस्कृति को अपने में समाहित किये पतित पावनी गंगा सदियों से समस्त प्राणियों के कल्याण का पर्याय बनकर इस धरा पर प्रवाहित हो  रही है। गंगा महज एक नदी मात्र ही नहीं है, बल्कि इस धरती को सिंचित कर अन्न उत्पादन करने वाली वह जीवन धारा है जिसका अमृत तुल्य जल लाखों-करोडों लोगों की आस्था का प्रतीक है। गंगा के पवित्र जल में डुबकी लगाकर एवं उसका आचमन करके लोग अपने को धन्य मानते हैं। माना जाता है कि गंगा का अवतरण ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को
हुआ था इसलिए यह तिथि  दशहरा के नाम से जानी जाती है।
गंगा के  विभिन्न नाम
पौराणिक कथा के अनुसार कपिल मुनि के श्राप से भस्म हुए अपने साठ हजार पूर्वजों की मुक्ति के लिए राजा भगीरथ ने कठोर तप करके देवनदी गंगा को धरती पर उतारने का वरदान प्राप्त था। तत्पश्चात गंगा के वेग को सहन करने के लिए भगवान शिव की तपस्या करके उन्हें प्रसन्न किया। शिव की जटाओं से होती हुई गंगा ब्रह्मा द्वारा निर्मित बिन्दुसर सरोवर में उतरीं और वहां से पृथ्वीलोक पर अवतरित हुई। अपने पवित्र जल के स्पर्श से राजा भगीरथ के पूर्वजों को मोक्ष देने के कारण गंगा भागीरथी कहलायी। पाताल लोक में नाग योनियों के जीवों का तारण करने के कारण गंगा को भोगवती कहा गया। राजश्री जहु को पिता के समान सम्मान देने से गंगा का एक नाम जाह्नवी भी है। त्रिलोक में त्रिपथगा, स्वर्ग में मंदाकिनी एवं सुरसरि तथा भगवान विष्णु के बाएं पैर के अंगुष्ठ से प्रादुर्भाव होने से गंगा का नामकरण विष्णुपदी भी हुआ।
गंगा के पूजन की विधि
गंगा दशहरा पर गंगा नदी में स्नान करना अत्यंत ही शुभ माना गया है। अगर किसी कारण से गंगा में स्नान का अवसर न मिले तो  सादा जल में गंगा जल मिलाकर स्नान करना भी शुभ होता है। गंगा स्नान के बाद गंगा जी का पूजन दस प्रकार के पुष्प, दस प्रकार के फल, दस दीपक, दस तांबूल, दशांग धूप  आदि के साथ करना चाहिए तथा श्रद्धानुसार दस गरीबों एवं जरूरतमंदों को दान-दक्षिणा देना चाहिए। 

Wednesday, April 27, 2016

मंगल के लिए मंगल की आराधना

नवग्रहों में पराक्रमी शौर्य के प्रतीक भौम अर्थात मंगल ग्रह को भूमि पुत्र कहा गया है, इसलिए भूमि से जुड़े मामलों में मंगल का विशेष योगदान है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल को युद्ध का देवता सेनापति माना गया है। मेष और वृश्चिक राशियों के स्वामी ग्रह मंगल मकर राशि में उच्च के तथा कर्क राशि में नीच के होते हैं। दुर्घटना, हथियार, रोग, साहस, पराक्रम, वीरता, भाई-बंधु, गृहस्थ सुख, शासक, शत्रु, आचरण, क्रोध, छल-कपट, चौर्य कर्म आदि के बारे में जानकारी के लिए मंगल ग्रह की स्थिति  का ही सहारा लिया जाता है।
मंगल का स्वरुप एवं प्रभाव
उग्र प्रकृति के मंगल की चार भुजाएं हैं, जो अभय मुद्रा, त्रिशूल, गदा एवं वर मुद्रा में दर्शित हैं। लाल वस्त्र और लाल माला धारण करने वाले मंगल का वाहन भेड़ा है। इनके मस्तक पर स्वर्ण मुकुट है। जन्म कुंडली में पहले, चौथे, सातवें, आठवें और बारहवें भाव में विराजमान मंगल की स्थिति जातक को मांगलिक बनाती है , वहीं मंगल कुंडली के जिस भाव में बैठे होते हैं, वहां से वे चौथे, सातवें एवं आठवें भाव को पूर्ण दृष्टि से देखते हैं।
अंक ज्योतिष में मंगल 
अंक ज्योतिष के अनुसार 9 का अंक मंगल का प्रतिनिधित्व करता है। जिन जातकों का जन्म किसी भी मास की 9, 18 और 27 तारीख को होता है, उनका जन्मांक 9 है और वे जीवन भर मंगल से प्रभावित रहते हैं। ऐसे जातक कठिन परिश्रम, लगन, साहस, और दृढ़ इच्छा शक्ति के बल पर ही जीवन में सफल हो पाते हैं। ऐसे जातकों को जीवन में शुभ प्रभाव के लिए अपने भोजन में प्याज, अनार, तिल, सरसों, अदरक, काली मिर्च, चुकंदर, गाजर, सेब आदि का सेवन अवश्य करना चाहिए।
मंगल के शुभ-अशुभ प्रभाव
मंगल के शुभ एवं बली होने पर जातक अनुशासन प्रिय, सर्जन, मजबूत, आकर्षक, जमींदार, सैन्यकर्मी, पुलिस अधिकारी, गुप्तचर विभाग आदि में साहसपूर्ण कार्य करने वाला अधिकारी होता है। जबकि अशुभ एवं दोषपूर्ण मंगल के प्रभाव से जातक आपराधिक कार्य करने लगता है तथा अक्सर चेचक, ज्वर, पित्त विकार, घाव, फोड़ा-फुंसी, रक्तस्राव जैसी बीमारियों से ग्रस्त बना रहता है।
मंगल की शांति के उपाय
मंगल ग्रह की शांति एवं प्रसन्नता के लिए भगवान शिव और हनुमान जी की उपासना की जाती है। स्वास्थ्य लाभ एवं प्रसन्नता के लिए नियमित रूप से "ॐ अंगारकाय नमः" अथवा "ॐ भौं भौमाय नमः" मंत्र का जप करना चाहिए। मंगल के अशुभ प्रभावों को काम करने के लिए स्वर्ण, तांबा, गुड, गेहूं, लाल वस्त्र, लाल चंदन, लाल पुष्प, लाल फल, मसूर की दाल आदि का दान किया जाता है। भूमि लाभ के लिए मंगलवार को गुड की रेवडिया मछलियों को अथवा गुड चना बंदरों को खिलाना चाहिए। पराक्रमी संतान प्राप्ति के लिए घर में गुड का मीठा पराठा बनाकर मंगलवार को गरीब बच्चों को खिलाना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल

Saturday, February 27, 2016

ज्योतिष में पेड़-पौधों की उपयोगिता

 पर्यावरण को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त बनाये रखने में वृक्षों का महत्वपूर्ण योगदान है। एक वृक्ष सौ पुत्रों से भी बढ़कर है क्योंकि वह जीवन भर अपने पालक को समान एवं निःस्वार्थ भाव से लाभ पहुंचाता रहता है। भविष्य पुराण के अनुसार संतानहीन मनुष्य द्वारा लगाया गया वृक्ष लौकिक और पारलौकिक कर्म करता है। लोमेश संहिता में कहा गया है कि जहां पर तुलसी का वृक्ष स्वयं उत्पन्न होता है तथा निंब, अश्वत्थ आदि के वृक्ष हों, वहां निश्चित ही देवता निवास करते हैं। आचार्य वराहमिहिर ने वृक्षों को वस्त्र से ढककर चंदन और पुष्पमाला अर्पित कर उनके नीचे हवन करने को श्रेष्ठ बताया है। पितरों की संतुष्टि के लिए भी वृक्ष लगाने की परंपरा है।
ज्योतिष में वृक्ष 
ज्योतिष शास्त्र में वृक्षों को देवताओं और ग्रहों के निमित्त लगाकर उनसे शुभ लाभ प्राप्त किये जाने का उल्लेख मिलता है। पीपल के वृक्ष में सभी देवताओं का तो आंवला और तुलसी में विष्णु का, बेल और बरगद में भगवान शिव का जबकि कमल में महालक्ष्मी का वास माना गया है। जामुन का वृक्ष धन दिलाता है तो पाकड़ ज्ञान और सुयोग्य पत्नी दिलाने में मदद करता है। बकुल को पापनाशक, तेंदु को कुलवृद्धि, अनार को विवाह कराने में सहायक और अशोक को शोक मिटाने वाला बताया गया है। श्रद्धा भाव से लगाया गया वृक्ष कई मनोकामनाओं की पूर्ति करता है। कन्या के विवाह में देरी हो रही हो तो कदली वृक्ष की सूखी पत्तियों से बने आसान पर बैठकर कात्यायनी देवी की पूजा करने चाहिए। शनि ग्रह के अशुभ फल को दूर करने हेतु शमी वृक्ष के पूजन से लाभ मिलता है। कदंब व आंवला वृक्ष के नीचे बैठकर यज्ञ करने से लक्ष्मी जी कृपा मिलती है।
हवन समिधा हेतु वृक्ष 
नवग्रहों को प्रसन्न करने के लिए ज्योतिष में मंत्रजाप के साथ हवन किया जाता है। इस हेतु जिस समिधा का प्रयोग होता है वह वृक्ष से ही मिलती है। सूर्य के लिए मदार, चंद्र के लिए पलाश, मंगल के लिए खैर, बुध के लिए अपामार्ग, गुरु के लिए पीपल, शुक्र के लिए गूलर, शनि के लिए शमी, राहु के लिए दूर्वा और केतु के लिए कुश वृक्ष की समिधा प्रयुक्त होती है।
सही नक्षत्र में वृक्षारोपण और कृषि कार्य 
फसल की कटाई, मढ़ाई, बुवाई, हल जोतने, बीज डालने, वृक्ष लगाने तथा अन्य कृषि कार्यों के लिए ज्योतिष में कृत्तिका, मृगशिरा, श्लेषा, मघा, उत्तराषाढ़ श्रवण धनिष्ठा, शतभिषा, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों को शुभ माना गया है।
 ग्रह शांति हेतु जड़ी बूटी 
अशुभ प्रभाव देने वाले ग्रहों की शांति और प्रसन्नता के लिए ज्योतिष में रत्नों के स्थान पर जड़ी बूटी धारण करने की सलाह दी जाती है जो वृक्षों से ही प्राप्त होती है। सूर्य के लिए बेलपत्र, चंद्र के लिए खजूर या खिरनी, मंगल के लिए अनंतमूल, बुध के लिए विधारा, गुरु के लिए भृंगराज, शुक्र के लिए अश्वगंध, शनि के लिए शमी, राहु के लिए श्वेत चंदन और केतु के लिए असगंध की जड़ को शुभ दिन और नक्षत्र में लाकर विधि-विधान से धारण कर सकते हैं।
स्वप्न विचार और वृक्ष 
स्वप्न में पेड़-पौधे, फल, पुष्प, पुष्पों की माला, गेंहू, जौ, सरसों, बेलपत्र आदि का दिखना राजपद, धन, सम्मान, और विद्या प्राप्ति का संकेत है , वहीँ स्वप्न में काला पुष्प, कपास और आक का वृक्ष देखना कष्टकर, रोगदायी एवं समस्याओं का संकेत  देता  है।
दान हेतु वृक्ष और उत्पाद 
ज्योतिष में नवग्रहों को प्रसन्न करने और उनके शुभ प्रभाव के लिए दान करना उपयुक्त उपाय है। इस हेतु वृक्ष और उनसे मिलने वाले उत्पादों का दान भी किया जाता है। सूर्य हेतु गेंहू, लाल कमल, चना, मसूर की दाल, गुड़, चंद्र हेतु चीनी, मैदा, सूजी, रसदार फल, मंगल हेतु गैंहू. मसूर, कनेर, मुनक्का, छुआरा, मोठ, बुध हेतु हरे फल और हरी सब्जियां, मूंग, हरी मटर, सौंफ, गुरु हेतु पीले फल, बेसन, प्याज,अदरक, शहद, हल्दी, चने की दाल, शुक्र के लिए चावल, मिश्री, रुई, कच्चा नारियल, शनि, राहु एवं केतु के लिए उड़द, काले तिल, जाता वाला नारियल, कली मिर्च आदि का दान किया जाता है।-- ज्योतिषविद प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा  

Friday, January 22, 2016

ग्रहों की गति से जानें जीवन में प्रभाव

 संसार में पाये जाने वाले समस्त प्राणी, पेड़-पौधे , नदी, पर्वत, मृदा आदि ग्रहों के अधीन होते  हैं। कर्मों के अनुसार अच्छा-बुरा जैसा भी फल मिलता है, उसके लिए भी ग्रह उत्तरदायी होते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु नवग्रह कहलाते हैं। इन सभी ग्रहों का अपना-अपना शुभ-अशुभ प्रभाव होता है। इसके अलावा इन सभी ग्रहों की भाग्योदयकाल अवधि तथा विभिन्न राशियों पर भोग की अवधि भी निश्चित होती है।
सीधी और वक्री गति
सभी ग्रह सौर मंडल के सर्वाधिक सशक्त सूर्य के चारों ओर अपनी-अपनी कक्षाओं में रहकर गति करते हैं। यह गति सीधी अथवा वक्री होती है। नवग्रहों में केवल सूर्य एवं चंद्र ही ऐसे ग्रह हैं जो सदैव सीधी गति से चलते हैं। जबकि छाया ग्रह माने जाने वाले राहु और केतु ग्रह की गति हमेशा वक्री ही होती है। वहीं मंगल, बुध, गुरु, शुक्र तथा शनि ग्रह सीधी एवं वक्री दोनों प्रकार की गति से चलते हैं। ग्रहों की गति सीधी है या वक्री, इसकी जानकारी जन्म कुंडली से आसानी से मिल जाती है।
वक्री गति के प्रभाव
नवग्रहों में वक्री गति से चलने वाले ग्रहों का प्रभाव शुभ होता है अथवा अशुभ, इस संबंध में ज्योतिष शास्त्र के जानकारों में एकमत नहीं है। "जातकतत्व " ग्रंथ के अनुसार वक्री ग्रहों का शुभ-अशुभ प्रभाव सीधी गति से चलने वाले ग्रहों से सामान ही होता है। इसका अर्थ यह हुआ कि अगर वक्री ग्रह अपनी उच्च राशि में है अथवा शुभ स्थान का स्वामी है तो जातक पर उसका प्रभाव भी शुभ होगा जिससे उसके जीवन में धन, सुख, यश, सफलता, और सम्मांन आदि प्राप्त होते रहेंगे वहीं वक्री ग्रह के अपनी नीच या शत्रु राशि में होने अथवा पाप स्थान में होने के प्रभाव से जातक का जीवन कष्टमय होगा।
"सारावली "ग्रंथ में कहा गया है कि वक्री ग्रह के कुंडली में शुभ स्थान का स्वामी बनकर उच्च, स्व राशि, मूल त्रिकोण या मित्र राशि में होने से वह जातक के जीवन में शुभ प्रभाव ही देगा। "फलप्रदीपिका" ग्रंथ के अनुसार वक्री ग्रह प्रत्येक दशा में उच्च दशा के ग्रहों के समान ही शुभ फल देते हैं। नीच या शत्रु राशि में होने के बावजूद अगर वक्री ग्रह शुभ स्थान का स्वामी हो तो सदैव शुभ फल ही देगा। 
कहने का अर्थ यह है कि वक्री ग्रह का शुभ या अशुभ प्रभाव जानने के लिए लग्न कुंडली का सघनतापूर्वक विश्लेषण आवश्यक है जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वक्री ग्रह की स्थिति क्या है। नीच या शत्रु राशि में वक्री ग्रह का होना दुःख, रोग या कष्ट का कारण बन सकता है।
अशुभ प्रभाव को करें दूर
वक्री ग्रह के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए उस ग्रह से सम्बंधित वस्तुओं का दान, पूजा-पाठ, मंत्र जप और रत्न धारण करना उपयुक्त होता है लेकिन इसके लिए कुंडली की सटीक मीमांसा और उचित ज्योतिष परामर्श अनिवार्य है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल, ज्योतिषविद, आगरा 

भद्रा में न करें मंगल कार्य

ज्योतिष शास्त्र में तिथि, वार, नक्षत्र, योग तथा करण के स्पष्ट मान आदि को पंचांग कहा जाता है।  कोई भी मंगल कार्य करने से पहले पंचांग का अध्ययन करके शुभ मुहूर्त निकाला जाता है, परंतु पंचांग में कुछ समय या अवधि ऐसी भी होती है जिसमें कोई भी मंगल कार्य करना निषिद्ध माना जाता है अन्यथा इसके करने से अनिष्ट होने की संभावना रहती है।  ऐसा ही निषिद्ध समय है "भद्रा"। भगवान सूर्य और उनकी पत्नी छाया से उत्पन्न भद्रा शनि देव की सगी बहिन हैं।  विश्वकर्मा के पुत्र विश्वस्वरूप भद्रा के पति हैं। भद्रा के बारह नाम हैं - धन्या, दधिमुखी, कुलपुत्रिका, भैरवी, महाकाली, असुराणा, महामारी, विष्टि, खरानना, कालरात्रि, महारुद्र और क्षयंकरी।
भद्रा का स्वरुप 
भद्रा का स्वरुप अत्यंत विकराल बताया गया है। इनका रंग काला, केश लंबे और दांत बड़े-बड़े हैं। ब्रह्मा जी के आदेश से भद्रा, काल के एक अंश के रूप में विराजमान रहती है  अपनी उपेक्षा या अपमान करने वालों के कार्यों में विघ्न पैदा करके विपरीत परिणाम देती है। यही कारण है कि विवाह, गृह प्रवेश, कृषि, उद्योग, रक्षा बंधन, होलिका दहन, दाह कर्म जैसे कार्य भद्रा के दौरान नहीं किये जाते हैं।
भद्रा के प्रकार
मुहूर्त ग्रंथ के अनुसार शुक्ल पक्ष की भद्रा बृश्चिकी तथा कृष्ण पक्ष की भद्रा सर्पिणीकहलाती है। बृश्चिकी भद्रा के पुच्छ भाग में एवं सर्पिणी भद्रा के मुख भाग में किसी प्रकार का मंगल कार्य नहीं करना चाहिए। महिर्षि भृगु की संहिता में कहा गया है कि सोमवार और शुक्रवार की भद्रा कल्याणकारी, गुरूवार की पुण्यकारी, शनिवार की बृश्चिकी और मंगलवार, बुधवार तथा रविवार की भद्रा भद्रिका होती है। इसलिए अगर सोमवार, गुरूवार एवं शुक्रवार के दिन भद्रा  हो तो उसका दोष नहीं होता है।
कहां और कब रहती है भद्रा 
 माना जाता है कि भद्रा स्वर्ग लोक, पाताल लोक तथा पृथ्वी लोक में रहकर वहां के लोगों को सुख-दुःख का अनुभव कराती है। जब चंद्रमा मेष, वृष, मिथुन और वृश्चिक राशि में होते हैं तब भद्रा स्वर्ग लोक में रहती है। चंद्रमा के कुंभ, मीन, कर्क और सिंह राशि में होने पर भद्रा पृथ्वी लोक में तथा चंद्रमा के कन्या, तुला, धनु एवं मकर राशि में होने पर भद्रा पाताल लोक में निवास करती है। किसी भी मुहूर्त काल में भद्रा का वास पांच घटी मुख में, दो घटी कंठ में, ग्यारह घटी ह्रदय में, चार घटी नाभि में, पांच घटी कमर में तथा तीन घटी पुच्छ में होता है। इस स्थिति में भद्रा क्रमशः कार्य, धन, प्राण आदि को नुक्सान पहुंचाती है परंतु पुच्छ में भद्रा का प्रभाव मंगलकारी होने से विजय और कार्यसिद्धि दायक होता है। शुक्ल पक्ष की अष्टमी, पूर्णिमा के पूर्वार्ध, चतुर्थी एवं एकादशी के उत्तरार्ध में तथा कृष्ण पक्ष की तृतीया, दशमी के उत्तरार्ध, सप्तमी और चतुर्थी के पूर्वार्ध में भद्रा का वास रहता है।
भद्रा व्रत से परिहार
 भविष्य पुराण के अनुसार भद्रा दोष के परिहार के लिए भद्रा का व्रत और उद्यापन किया जाता है। इससे व्रत करने वालों को भद्रा का कोप भाजन नहीं होना पड़ता और उनके कार्य निर्विघ्न संपन्न हो जाते हैं। भद्रा  के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए प्रतिदिन स्नान आदि के बाद भद्रा के बारह नामों का उच्चारण करना चाहिए। ऐसा करने से आरोग्य, धन एवं कार्यों में सफलता मिलती है। भद्रा के कारण होने वाले विघ्न से बचने के लिए "छायासूर्यसुते देवि विष्टिरिष्टार्थदायनी। पूजितासि यथाशक्त्या भद्रे भाद्रप्रदाभव।" मंत्र का जप करना चाहिए। --- ज्योतिषविद प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा 

Friday, September 18, 2015

सौभाग्य के लिए हरतालिका तीज व्रत

भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथिको हस्त नक्षत्र में हरतालिका तीज मनायी जाती है। इस तिथि को महिलायें भगवान शिव और माता पार्वती का विधि-विध न से पूजन करके सौभाग्य के लिए कामना करती हैं। भविष्योत्तर पुराण के अनुसार जो महिलायें हरतालिका तीज व्रत करती हैं उन्हें जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। हरतालिका तीज को बूढ़ी तीज भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन विवाहित महिलायें महिलाओं को उनकी सास सुहाग का सिंधारा देती हैं और महिलाये अपनी सास के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।
ऐसे करे पूजा 
हरतालिका तीज वाले दिन महिलाओं को चाहिए कि वे संध्या काल में स्नान करके धुले हुए वस्त्र धारण करें और पीली व पवित्र मिट्टी से पार्वती और शिव की प्रतिमा बनाकर उनका पूजन सामिग्री से श्रद्धा भाव से पूजन करें। पूजन के उपरान्त एक सुहाग की पिटारी में सुहाग की समस्त वस्तुएं रखकर माता पार्वती के समक्ष चढ़ाना चाहिए और फल, मिष्ठान और पकवान आदि का भोग लगाना चाहिए।इसके अलावा भगवान शिव को धोती और अंगोछा चढ़ाना चहिये।  तत्पश्चात सुहाग पिटारी को किसी भी ब्राह्मण स्त्री को तथा धोती और अंगोछा किसे ब्राह्मण को दान करके उनका शुभ आशीर्वाद लेना चाहिए। सौभाग्यवती महिलाओं को इस दिन व्रत खोलने से पूर्व अपनी सासु मां को अपनी श्रद्धानुसार मिष्ठान, फल और व्यंजन आदि और कुछ धनराशि देकर उनके चरण स्पर्श करना चाहिए। इस प्रकार किये गए व्रत-विधान से माता पार्वती और भगवान शिव की कृपा से सौभाग्य सुख मिलता है।
हरतालिका तीज व्रत कथा 
हरतालिका तीज व्रत के सम्बन्ध में जो कथा प्रचलित है उसके अनुसार भगवान शिव ने पार्वती को उनके पूर्वजन्म का स्मरण कराने के उद्देश्य से इस व्रत के माहात्म्य की कथा कही थी। पूर्वजन्म में भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए गौरी ने हिमालय पर्वत पर गंगा के तट पर बाल्यावस्था में कठोर तप किया था। जिससे उनके पिता गिरिराज को बहुत कष्ट होता था। एक दिन नारद मुनि गौरी के पिता के घर आये और उन्होंने गिरिराज से कहा कि भगवान विष्णु ने गौरी की तपस्या से प्रसन्न होकर उनके साथ विवाह करने का प्रस्ताव भिजवाया है। नारदजी की बात सुनकर गिरिराज तो प्रसन्न हुए परन्तु गौरी ने विवाह प्रस्ताव से मना करते हुए कहा कि उन्होंने तो भगवान शिव को ही अपने पति के रूप में वरण किया है इसलिय वे किसी और से विवाह करने के बारे में सोच भी नहीं सकती।
गौरी की एक सखी के कहने पर गौरी ने अपने पिता का घर त्याग दिया और एक गुफा में भगवान शिव की उपासना में लीन हो गयी। गौरी ने गंगा की रेत से शिवलिंग का निर्माण करके व्रत किया और रात्रि में जागरण करते हुए शिव का स्तुतिगान किया। गौरी द्वारा की गयी पूजा-अर्चना से भगवान शिव प्रसन्न होकर उनके समक्स प्रकट हुए और उनसे वर मांगने को कहा। गौरी ने भगवान शिव को ही अपने पति के रूप में मांग लिया। शिव के अंतर्ध्यान होने के बाद गौरी ने समस्त पूजा सामिग्री को गंगा में अर्पित करके व्रत का पारण किया। गौरी के पिता को जब उनकी तपस्या के बारे में जानकारी हुयी तो उन्होंने गौरी का विवाह भगवान शिव के साथ करने की सहर्ष अनुमति प्रदान करदी। समय आने पर शास्त्रोक्त विधि से भगवान शिव के साथ गौरी का विवाह संपन्न हो गया।
जिस दिन गौरी ने शिव को पति के रूप में पाने के लिए व्रत और उपवास किया था उस दिन भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि थी। तभी से ये तिथि हरतालिका तीज व्रत के रूप में मनई जाती है।
व्रत का माहात्म्य 
पुराणों के अनुसार जो सौभाग्यवती महिलाये इस व्रत को विधि-विधान से करती हैं उनका वैवाहिक जीवन सुखमय बना रहता है। वहीं जो अविवाहित युवतियां इस व्रत को करके उपवास रखती हैं, उन्हें मनवांछित वार की प्राप्ति होती है तथा उनका विवाह भी शीघ्र होता है। इस व्रत को सभी महिलाये कर सकती हैं।  --- प्रमोद कुमार अग्रवाल


Thursday, September 10, 2015

वास्तु के अनुसार लगाएं बोनसाई पौधे

अपने पर्यावरण को हरा-भरा और प्रदूषणमुक्त बनाये रखने के लिए पेड़-पौधों का बड़ा महत्त्व है। इनके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। परंतु जगह की कमी को देखते हुए आज के समय में घर, कार्यालय, भवन, फैक्टरी, काम्प्लेक्स, पिकनिक स्पॉट, पार्क और चौराहों, मल्टी स्टोरी बिल्डिंग आदि में गमलों में पेड़-पौधे लगाने का चलन बढ़ता जा रहा है। ऐसे बड़े पेड़-पौधे जिन्हें विशेष तकनीक के द्वारा गमलों में लगाया जाता है, बोनसाई पौधे कहलाते हैं। इन पौधों की ऊंचाई और फैलाव बहुत कम होता है, परंतु इनमें फल और पुष्प आदि सामान्य पौधों के समान ही प्राप्त किये जा सकते हैं।
वास्तु दोषों के निवारण के लिए लगाएं बोनसाई पौधे 
वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार अगर आवासीय भवन और कार्यालयों में बोनसाई पौधे लगाए जा रहे हों तो इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है कि उन्हें पर्याप्त खाद और सूरज की धूप मिलती रहे। क्योंकि इन पौधों के लिए विशेष देखरेख की आवश्यकता होती है। बोनसाई पौधों की समुचित वृद्धि के लिए इनमें सड़ने वाली रेशेदार वनस्पति, गिरे हुए कोमल पत्ते, नीम की खली, गोबर से बनी खाद का प्रयोग ही करना चाहिए। कीटनाशक दवाओं और रासायनिक खाद के प्रयोग से बचना चाहिए। सही देखरेख के साथ उचित दिशा में लगाए गए बोनसाई पौधे भवन में सकारात्मक ऊर्जा देते हैं और वास्तु दोषों का निवारण भी करते हैं।
शुभ और अशुभ पौधे 
वास्तु  नियमों के अनुसार घर एवं कार्यालयों में आम, संतरे, सेब, अंगूर, अनार, केसर, नीम, मौलश्री, चंदन, जयंती, गुड़हल, अशोक, नीम, चंपा, तुलसी, बेल, गुलाब, चमेली आदि के बोनसाई पौधे लगाए जा सकते हैं। जबकि भवन और उसके आस-पास कांटेयुक्त पेड़-पौधे, बेर, दूध निकलने वाले पौधे, कैथल, बरगद, पीपल, बांस, कैक्टस, ढाक आदि लगाना अशुभ फलदायी होता है। इस तरह के बोनसाई पौधे न सिर्फ नकारात्मक ऊर्जा देते हैं बल्कि कई तरह की समस्याओं जैसे अर्थाभाव, घरेलू विवाद, रोग आदि का कारण भी बनते हैं।
सही दिशा का रखें ध्यान 
वास्तु नियमों के अनुसार अगर घर या कार्यालय में उचित दिशा का ध्यान रखते हुए बोनसाई पौधे लगाए जाएं तो इनका शुभ प्रभाव देखने को मिलता है। पूर्व दिशा में तुलसी, पश्चिम में शाक-सब्ज़ी, उत्तर में हरी कोमल दूब या घास और दक्षिण में बड़े पत्तों वाले पौधे जैसे मनी प्लांट लगाने चाहिए। इसी प्रकार उत्तर-पूर्व दिशा (ईशान कोण) में हरी दूब घास, दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) में जलीय छायादार पौधे, दक्षिण-पश्चिम दिशा (नैऋत्य कोण) में भारी तने या पत्ते वाले पौधे तथा उत्तर-पश्चिम दिशा (वायव्य कोण) में वायु को शुद्ध करने वाले पौधे लगाना शुभ एवं श्रेष्ठ रहता है। 

Monday, August 3, 2015

श्रावण मास में शिव आराधना

देवाधिदेव भगवान शिव को अत्यंत प्रिय श्रावण मास का शुभारम्भ 1 अगस्त, 2015 से हो रहा है। इस मास में आशुतोष शंकर जी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करके नियमित रूप से अभिषेक करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है।
कल्याणकारी हैं शिव
शिव का अर्थ है "कल्याण"। श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना करके सभी के कल्याण की कामना की जाती है तथा तन और मन से शिवोपासना में रुद्राभिषेक, अर्चना, भोग, श्रृंगार आदि करते हुए प्रार्थना, स्तुति, जप, भजन, कीर्तन, मंत्रोच्चारण आदि द्वारा कल्याणकारी कार्यों में प्रवृत्त होकर "शिवमय" होने का शुभ प्रयास किया जाता है।
ऐसे करें शिव आराधना
कहते हैं कि श्रावण मास में भगवान शंकर को प्रसन्न करने से समस्त देवताओं की पूजा का फल मिलता है। पुराणों के अनुसार, श्रावण मास में शिवलिंग पर प्रतिदिन एक बिल्वपत्र अर्पित करने से मनुष्य के तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं। वहीँ भगवान शिव को सर्वाधिक प्रिय सोमवार के दिन शिव साधना करने एवं पूर्ण भक्ति-भाव से पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख रखते हुए शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, बूरा, गन्ने का रस, सरसों या तिल का तेल, घी, पंचामृत, पंचमेवा, चन्दन, भांग, धतूरा, फल, पुष्प, इलायची, मोली, श्वेत वस्त्र, यज्ञोपवीत, तुलसी मंजरी, दूर्वा, रुद्राक्ष आदि सामग्री अर्पित करने से धन, धान्य, संतान, शांति, निर्मलता की प्राप्ति होती है तथा जीवन से रोग और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
भोले हैं भोले शंकर
भगवान शिव को भक्त भोले शंकर और भोले भंडारी कहकर भी पुकारते हैं क्योंकि भगवान शंकर साधारण पूजा-पाठ से सहज ही प्रसन्न होने वाले देवता हैं। श्रावण मास में भगवान शिव की पूजा भी उन्हें प्रसन्न  करने के लिए की जाती है जिससे कि भक्तों को उनकी कृपा मिले और वे शिवमय होकर सबका कल्याण कर सकें। भगवान शिव की आराधना करते समय "ॐ नमः शिवाय", "बम-बम भोले", "नमो नीलकंठाय", "ॐ पार्वतीपतये नमः", "ॐ किरुकुल्ये हुं फट स्वाहा", "ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय" आदि मंत्रों का उच्चारण अवश्य करना चाहिए। इसके अलावा श्रावण मास में भगवान शिव का आशीर्वाद पाने के लिए शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जप भी करना चाहिए।
नाग पूजन से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव 
भगवान शिव का स्वरुप अद्भुत है। संपूर्ण शरीर पर भस्म, जटाओं में पवित्र गंगा, भाल पर अर्ध चंद्रमा, गले में रुद्राक्ष और सर्पों की माला, हाथ में डमरू एवं त्रिशूल। जो भी उन्हें देखता है , मंत्रमुग्ध रह जाता है। नाग देवता भगवान शिव के गले का श्रृंगार होते हैं, इसलिए श्रावण मास में भगवान शिव के साथ-साथ शिव परिवार और नाग देवता की पूजन किये जाने का विधान है। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि "नाग पंचमी" के रूप में जानी जाती है। इस दिन पांच फन वाले नाग देवता की पूजा करके उन्हें चंदन, दूध, खीर, पुष्प आदि अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सर्प एवं नागों द्वारा काटे जाने का ख़तरा भी नहीं रहता है।
अशुभ ग्रहों को बनाएं शुभ
जिन जातकों की जन्म कुंडली में "कालसर्प दोष" है, उन्हें श्रावण मास में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करते हुए उन्हें प्रसन्न करना चाहिए। श्रावण मास के चारों सोमवार के दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना, उपवास रखना, बहते हुए जल में चांदी और तांबे से निर्मित नाग-नागिन के जोड़े को प्रवाहित करना तथा महामृत्यंजय मंत्र का जप करना शुभ प्रभाव देता है। जन्म कुंडली में अगर ग्रहों के अशुभ फल मिलते दिखाई दे रहे हों तो भगवान शिव की नियमित रूप से आराधना करके महामृत्युंजय मंत्र का एक माला जप श्रावण मास में प्रतिदिन करना चाहिए। इस मंत्र में अपार शक्ति है। दुर्घटना अथवा असाध्य रोग के कारण मृत्यु के मुख में जा रहे व्यक्ति के जीवन को इस मंत्र शक्ति के बल पर जीवन दान दिया जा सकता है, ऐसा धार्मिक ग्रंथ एवं पुराणों में वर्णित है।
श्रावण मास में ऐसा न करें
श्रावण मास पवित्र जीवन, सात्विक आहार एवं व्यवहार प्राप्त करने से जुड़ा है क्योंकि इस मास में भगवान शिव की आराधना करके "सत्यं शिवं सुंदरं" की भावना को अपने अंदर समाहित किया जा सकता है। श्रावण मास में भगवान शिव की अनुपम कृपा पाने के लिए अपवित्र और अनैतिक कार्य करने से बचना चाहिए। शिवलिंग पर चम्पा, केतकी, नागकेसर, केवड़ा और मालती  पुष्प अर्पित नहीं करना चाहिए।  शिव मंदिर की पूरी परिक्रमा न करके आधी परिक्रमा ही करनी चाहिए। बिल्वपत्र कटे-फटे एवं छिद्रयुक्त न हों। बिना मंत्र के शिव पूजन न करें और न ही शिव पूजन में शंख का प्रयोग करें। शिवलिंग पर शंख से जल अर्पित नहीं करना चाहिए। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल
     

Thursday, July 16, 2015

बिल्ली पालें तो रहे सावधान

     वर्त्तमान समय में घरों में बिल्ली पालने का शौक बढ़ता जा रहा है। तंत्र-मंत्र की साधना में बिल्ली को काली शक्ति का प्रतीक मानते हुए उसकी पूजा की जाती है। वहीं बिल्ली का सम्बन्ध पितरों से भी माना गया है। इसलिए घरों में बिल्ली के आने पर लोग उसे अशुभ मानते हुए घर से भगाने की कोशिश करते हैं। ज्योतिष एवं वास्तु की दृष्टि से घर में बिल्ली का बार-बार आना शुभ नहीं माना गया है। नारद पुराण के अनुसार जहां भी बिल्ली के पैरों की धूल उड़ती है, वहाँ सकारात्मक ऊर्जा की हानी होती है जिससे उस स्थान पर अशुभ प्रभाव बढ़ने लगते हैं।
     जिस घर में अक्सर बिना कारण बिल्लियों का आना-जाना लगा रहता है, उस घर में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव देखने को मिलते हैं। घर में अचानक ही बिल्लियों का आना बढ़ जाने से घर के स्वामी अथवा मुखिया को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है तथा घर में कई तरह की समस्याएं आने लगती हैं। बिल्लियों के सम्बन्ध में यह भी माना जाता है कि अगर भोजन करते समय बिल्ली आकर देखने लगे तो कष्ट होता है। इसी प्रकार बिल्ली द्वारा घर में मल-मूत्र का त्याग करने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
     कहा जाता है कि दूसरे प्राणियों की तुलना में बिल्ली की छठी इन्द्रीअधिक सक्रिय होती है। इस वजह से बिल्ली को भविष्य में होने वाली किसी भी अशुभ घटना का पूर्वाभास हो जाता है, ऐसी स्थिति में बिल्ली स्थान परिवर्तन करके दूसरी जगह पलायन कर जाती है। जो लोग अपने घरों में बिल्ली पालते हैं उन्हें इस  बात का विशेष  चाहिए कि अगर उनकी पालतू बिल्ली घर छोड़ कर अचानक चली गयी है तो यह भविष्य में घटने  किसी अशुभ घटना का संकेत हो सकता है।
     बिल्ली पालने अथवा बिल्ली के आने-जाने से अगर  घर-परिवार में किसी तरह के अशुभ संकेत या परिणाम नज़र आ रहे हों तो उससे बचाव के लिए भगवान सत्यनारायणजी की पूजा या हवन अनुष्ठान कराना चाहिए। पितरों की शान्ति और तृप्ति के लिए प्रत्येक शनिवार को दक्षिण दिशा में मुख करके काले तिल मिश्रित जल से तर्पण करना चाहिए। पीपल के वृक्ष पर जल चढाने और दीपक प्रज्वलित करने से भी बिल्ली के कारण होने वाले अशुभ परिणामों से छुटकारा मिल सकता है। -- प्रमोद कुमार अग्रवाल

Saturday, February 14, 2015

जूता गांठने वालो को मिलेंगी दुकान

 आगरा। जिला समाज कल्याण अधिकारी एस0एस0यादव ने अवगत कराया है कि जूता गांठने वाले अनुसूचित जाति के गरीबी की रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले कारीगरों के लिए निःशुल्क भूमि पर दुकान निर्माण योजना संचालित की गई है, जिसमें 13.32 वर्गमीटर साइज की दुकान हेतु प्रति व्यक्ति कुल 2.28 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत की जायेगी। सर्वप्रथम 1.50 लाख रूपये स्थल क्रय हेतु अनुदान दिया जायेगा एवं दुकान निर्माण हेतु रूपये 78 हजार रूपये पृथक से दिया जायेगा जिसमें 10 हजार शासकीय अनुदान एवं 68 हजार ब्याज मुक्त ऋण की धनराशि होगी। 
     यह योजना गरीबी रेखा से नीचे जीवन करने वाले ग्रामीण क्षेत्र के 19884/- रुपये तथा शहरी क्षेत्र के 25546/- रूपये अधिकतम आय वाले सड़कों पर जूता गांठने वाले अनुसूचित जाति के कारीगरों के लिए है। अधिक जानकारी के लिए किसी भी कार्यदिवस में  विकास भवन संजय प्लेस स्थित जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) /पदेन जिला प्रबंधक, उ0प्र0 अनु0जाति वित्त एवं विकास निगम लि0 से सम्पर्क किया जा सकता है।  

Friday, February 6, 2015

मतदान हेतु सवैतनिक अवकाश अनुमन्य

  सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी भारत सिंह ने अवगत कराया है कि दिल्ली राज्य में विधान सभा समान्य निर्वाचन-2015 के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावली में सम्मिलित ऐसे पात्र मतदाताओं, जिसमें दैनिक श्रमिक भी सम्मिलित है, तथा जो उक्त निर्वाचन क्षेत्र के बाहर के क्षेत्रों में आजीविका के संदर्भ में कार्यरत है, को अपने मत का प्रयोग करने के लिए मतदान दिवस को सवैतनिक अवकाश अनुमन्य किया जाएगा। 

विधवा पेंशन लाभाथी सी0बी0एस0 खाता संख्या दें

   जिला प्रोबेशन अधिकारी/ज्वाइन्ट मजिस्ट्रेट आर0उमा0 महेश्वरी ने अवगत कराया है कि प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न विकास योजनाओं के अन्तर्गत पात्र लाभार्थियों के डाटाबेस का डिजिटाइजेशन तथा प्रत्येक लाभार्थियों का आधार नम्बर नामांकन से लिंक किये जाने के निर्देश प्राप्त हुये है। उन्होंने बताया कि महिला कल्याण विभाग द्वारा संचालित की जा रही पति की मृत्युपरान्त निराश्रित महिला पेंशन (विधवा पेंशन) योजना के लाभार्थियों  के आच्छादन में सुधार हेतु डेटाबेजस का डिजिटाइजेशन तथा मार्च 2015 तक इस डाटा को आधार लिंक किया जाना है। 
     उन्होंने सम्बन्धित लाभार्थियों से अपेक्षा की है कि महिला का नाम, मृत पति का नाम, पता, सी0बी0एस0 खाता संख्या, मोबाइल नम्बर, दो पासपोर्ट साइज फोटो तथा आधार कार्ड नम्बर की जानकारी का विवरण तत्काल कलेक्ट्रेट स्थित उनके कार्यालय में उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें, ताकि सरकार की मंशा के अनुसार लाभार्थियों का डाटाबेस का डिजीटाइजेशन की कार्यवाही पूर्ण कर शासन को प्रेषित की जा सके।

Friday, January 30, 2015

हमारे देश में प्रतिभा की कोई कमी नहीं- मा0 राज्यपाल

जीवन में सफलता के चार मन्त्र अपनाने पर दिया जोर
05 डी लिट, 107 मेडल, 81 एमफिल तथा 495 पीएचडी उपाधि प्रदान की
   जो समाज अपने इतिहास को भूलता है और वर्तमान का ख्याल नहीं करता है तो ऐसा समाज विकास नहीं कर सकता है। हमारे पास प्रतिभा की कोई कमी नही है जरूरत है प्रतिभाओं को निखारने की, जिससे देश के लिए उपयोग हो। स्वास्थ्य लाभ के लिए विदेशों में जाते है लेकिन वहां पर इलाज करने वाले अधिकतर डाॅक्टर व नर्स तो भारतीय ही मिलते है। भारतीय विद्यार्थियों में प्रतिभा है। इस प्रकार की स्पर्धा में आगे बढ़ाने की जरूरत है।
     प्रदेश के मा0 राज्यपाल रामनाईक ने आज डा0 बी0आर0 अम्बेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित 80 वें दीक्षांत समारोह को कुलाधिपति के रूप में सम्बोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए चार मंत्र अपनाये जायें तो वह व्यक्ति निश्चित रूप से प्रगति कर सकता है। उन्होंने सफलता के चार मंत्रों में बताया कि विशेष परिस्थितियों को छोड़कर सदैव मुस्कराते रहना चाहिए, दूसरा यदि कोई अच्छा कार्य करता है तो उसे अच्छा कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करें, तीसरा किसी की अवमानना मत करो, इंसान को अंहकार बहुत जल्दी हो जाता है और जो कोई व्यक्ति दूसरे को छोटा दिखाने की कोशिश करता है वह आगे नही बढ़ सकता है। चैथा मंत्र है आप जो भी करते हो उसे और अधिक अच्छा करने की चाह करें अर्थात जो अधिक अच्छा करता है वही आगे बढ़ता है।
     मा0 राज्यपाल ने कहा इस विश्वविद्यालय की परम्परा रही है कि यहां से एक से बढ़कर एक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, चै0 चरण सिंह तथा पूर्व राष्ट्रपति डा0 शंकर दयाल शर्मा जैसे अच्छे विद्यार्थी इस वि0वि0 से निकले है जिन्होने भारत देश का नाम रोशन किया है। इस पर हर विद्यार्थी को गर्व होना चाहिए।
     उन्होंने छात्रों की संख्या के दो गुनी छात्राओं के आगे बढ़ने पर बधाई दी और छात्रों से कहा कि स्पर्धा को प्राप्त करने के लिए उन्हे कड़ी मेहनत करनी होगी। उन्होंने गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों से कहा कि आपकी एक किताबी पढ़ाई पूरी हुयी है, अब आगे चलकर जीवन की पढ़ाई करनी है अब नये क्षेत्र में जा रहे हैं, आगे बहुत स्पर्धा आपके सामने है जो खुले जगत में करनी पड़ेगी इसलिए अपना व्यक्तित्व सुधारने की हमेशा, कोशिश करते रहना चाहिए। उन्होने क्षेष्ठतम विद्यार्थियों को 05 डी0लिट, 81 एमफिल, 107 मेडल तथा 495 पीएचडी की उपाधि प्रदान करते हुए सुखद भविष्य की कामना की।
     दीक्षान्त समारोह के मुख्य अतिथि पदम श्री एम0एस0 सोढ़ा ने सम्बोधित करते हुये कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी बात इस प्रकार करनी चाहिए जो दूसरों की अच्छी तरह समझा 
सके। यदि व्यक्ति में बौद्विक क्षमता है तो वह दूसरे क्षेत्रों में भी सफल हो सकता है। उन्होंने उद्यमशीलता को बढावा देने पर जोर देते हुये कहा कि ऐसा करने से अन्य लोगो को भी नौकरी
मिलने में आसानी रहेगी। उन्होंने उच्च शिक्षा क्षेत्र में पुर्नविचार की अपेक्षा करते हुये कहा कि यदि यथास्थिति अपनाएंगे तो आने वाली पीढीयां कभी माफ नहीं करेंगी।
     दीक्षांत समारोह के विशिष्ट अतिथि प्रो0 रमाशंकर कठेरिया ने कार्यक्रम को समबोधित करते हुये कहा कि यह विश्वविद्यालय आगरा जैसे नगर में बहुत पुराना विश्वविद्यालय है इसकी गरिमा ने सदैव बढ़ती ऊंचाई प्राप्त की है। देश के सामने चुनौतियां बहुत है। जिसमें वि0वि0 की भूमिका अहम है। उन्होंने कहा कि जब प्राथमिक शिक्षा ठीक हो जायेगी तो निश्चित रूप से बहुत कुछ ठीक हो सकता है। उन्होंने कहा कि अध्यापकों की कमी जब तक बनी रहेगी तब तक अच्छे छात्रों की कल्पना करना कठिन है और जब अच्छे छात्र नही होंगे तो अच्छे समाज की कल्पना करना भी कठिन होगा। उन्होंने कहा कि हमारे सामने उच्च शिक्षा क्षेत्र में आगे बढ़ने के साथ ही हमारी शिक्षा व्यवस्था कैसे ठीक हो, की चुनौती है, जिसके लिए हम सभी को समग्रता की ओर सोचना होगा। उन्होंने कहा कि छात्रों में प्रतिभा की कमी नही है देश को आगे बढाने के लिए लोगों की सोच बदला है। उन्होंने कहा कि भारत देश की सवा सौ करोड़ आबादी के ढ़ाई सौ करोड़ हाथ बढ़ेगे तो निश्चित रूप से देश की व्यवस्था  में परिवर्तन आयेगा। 
     कुलपति प्रो0 मोहम्मद मुजम्मिल ने दीक्षान्त समारोह में मा0 राज्यपाल को शाॅल एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया।कार्यक्रम में महापौर इन्द्रजीत आर्य, विधायक छोटेलाल वर्मा, मण्डलायुक्त प्रदीप भट्नागर, जिलाधिकारी पंकज कुमार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश डी मोदक सहित विश्वविद्यालय परिवार के समस्त प्रोफेसर एवं उपाधि प्राप्त करने वाले श्रेष्ठतम विद्यार्थी भी उपस्थित थे। 

Monday, December 29, 2014

विभागीय समस्याओं का निदान तथा निर्माण कार्यों में तेजी लायें- प्रमुख सचिव

    निर्माणाधीन योजनाओं के कार्यों में तेजी लायें, यदि विभागीय समस्याएं आ रही हैं तो उनका तत्काल निदान करायें ताकि जल्द से जल्द योजनाओं के पूरा होने पर जन सामान्य द्वारा उसका उपयोग  किया जा सके। जनपद के नोडल अधिकारी/प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा संजीव मित्तल ने कलक्ट्रेट  सभागार में अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि विभागीय समस्याओं का निदान कराना सम्बंधित विभाग का दायित्व है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थाओं से संबंधित निर्माणाधीन भवनों के कार्यों में देरी होने पर कार्यदायी संस्थाओं को निर्देश दिये कि इन भवनों का निर्माण 31 मार्च 2015 तक पूर्ण कराना सुनिश्चित करें ताकि अगले शैक्षिक सत्र में  उनका सदुपयोग  सुनिश्चित हो सके और कक्षाओं को शुरू कराया जा सके।
   अस्पताल में निर्माणाधीन मेटरनिटी विंग के कार्य में आ रही समस्याओं तथा तथा दूसरे भवन के हस्तान्तरण की कार्यवाही लम्बित होने के संबंध में कहा कि यह बहुत ही संवेदनशील मामला है। उन्होंने कार्यदायी संस्था को निर्देश दिये कि इसे गम्भीरता से लें और विभागीय समस्याओं का निदान सुनिश्चित करायें। मनकेंड़ा पालिटेक्निक का निर्माण कार्य लंबित होने पर असंतोष प्रकट किया और कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिये। आईटीआई फतेहाबाद के निर्माण कार्य को 31 मार्च तक पूर्ण कराने के निर्देश दिये। 
    जिलाधिकारी पंकज कुमार ने बताया कि पैक्फेड  संस्था द्वारा धीमी गति से कार्य कराए जा रहे हैं और कार्यों की गुणवत्ता भी अच्छी नहीं है। इस पर प्रमुख सचिव ने नाराजगी प्रकट करते हुए कार्यदायी संस्था को निर्देश दिये कि कार्य की गुणवत्ता में सुधार के साथ ही कार्यों में तेजी लायें। उन्होंने सर्किट हाउस के निर्माणाधीन भवन की धीमी गति पर भी असंतोष प्रकट किया।
    इनर रिंग रोड से संबंधित दो पुलों के निर्माण समयान्तर्गत  जून 2016  तक पूर्ण कराने के निर्देश दिये। उन्हांेने ग्रामीण क्षेत्र में बन चुके पुलों के पश्चात यातायात शुरू  होने में आने वाली समस्याओं के संबंध में कहा कि संबंधित किसानों की समस्याओं का निदान कराकर  पुलों पर आवागमन की कार्यवाही सुनिश्चित करायें। 
    प्रमुख सचिव ने संपर्क मार्ग निर्माण, ग्रामीण विद्युतीकरण, स्वच्छ पेयजल आपूर्ति हेतु पाइप लाइन परियोजना तथा हैण्डपम्प रिबोर, स्वच्छ शौचालय निर्माण, सोलर लाइट, इंदिरा आवास,  मनरेगा  आजीविका मिशन, कौशल विकास मिशन, वृद्धावस्था व समाजवादी पेंशन वितरण, छात्रवृत्ति वितरण सहित विभिन्न विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए अन्य कार्यों में भी प्रगति लाने के निर्देश दिये। 
    बैठक में अपर जिलाधिकारी (प्रशा) हरनाम सिंह, अपर जिलाधिकारी (वि/रा) राजकुमार, अपर नगर मजिस्ट्रेट  ए0दिनेश सहित समस्त विभागों के  जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
    बैठक से पूर्व प्रमुख सचिव ने  प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा विकास खण्ड कार्यालय अछनेरा एवं लोहिया ग्राम भिलावटी तथा निर्माणाधीन माडल जूनियर हाईस्कूल रायभा का स्थलीय निरीक्षण किया और आवश्यक निर्देश दिये। निरीक्षण के समय प्रमख सचिव के साथ जिलाधिकारी पंकज कुमार तथा जिला विकास अधिकारी राजेन्द्र कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

Monday, October 20, 2014

मेगा लोक अदालत में 1462 वादों का निस्तारण

       जनपदीय न्यायाधीश विजय प्रताप सिंह के कुशल निर्देशन में लोक अदालत में दीवानी न्यायालयों, प्री लिटिगेशन, तहसील में लोक अदालत एवं राजस्व न्यायालयों द्वारा कुल 1462 वादों का निस्तारण किया गया।  आज की मेगा लोक अदालत में जिला जज द्वारा 06 वादों का निस्तारण किया गया जिसमें एफ.डी.आर. धनराशि रू0 30,000/- एवं प्रतिकर राशि रू0 1,14,652/- सम्मिलित है। 
           राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी अपर जिला जज जितेन्द्र कुूमार सिंह,पंकज कुमार सिंह , विशेष जज,आर्थिक अपराध अशोक कुमार मिश्रा, हसनैन करैशी, रामकृष्ण शुक्ला, नीरज निगम, के0के0 अस्थाना, विनय कुमार मिश्रा, मयंक जैन, जयशंकर मिश्रा , विनय खरे ,राममूर्ति यादव, सुशील कुमार रस्तोगी, पंकज कुमार सिंह लालता प्रसाद, राममिलन सिंह, पंकज कुमार उपाध्याय, नरेन्द्र कुमार, प्रवीन कुमार सिंह, वीरेन्द्र कुमार प्रभाकर राव, श्रीपाल आदि ने विभिन्न प्रकति 51 वादों का निस्तारण किया। विभिन्न मजिस्ट्रेट द्वारा लोक अदालत में 1208 वादों का निस्तारण किया गया साथ ही 1,00170/-रूपये की धनराशि राजकोष में जमा कराया गया। 
    आज की  लोक अदालत में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेेट खलीकुज्जुमा द्वारा 507 वाद, सचिव विविधक सेवा प्राधिकरण एवं अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट मुमताज अली, ने 125 वाद ,नरेन्द्र पाल सिंह तोमर द्वारा 152 वाद धीरेन्द्र कुमार द्वारा 200 वादों का निस्तारण किया । सिविल जज श्रीमती जया पाठक सी0डि0 द्वारा 04 वादों का निस्तारण किया गया। जिसमें उत्तराधिकार के 03 मामलों का भी निस्तारण किया गया।
   जिला जज के निर्देशानुसार जनपद की समस्त तहसीलों मे आज लोक अदालत का आयोजन किया गया जिसमें राजस्व के 105 वाद एवं फौजदारी के 52 वादों  का निस्तारण किया गया । 
     इसी प्रकार गत दिवस जनपद न्यायाधीश विजय प्रताप सिंह ने निर्देश पर जिला कारागार में जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया जिसमें अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुमताज अली ने जिला कारागार में निरूद्ध बन्दीगण से सम्बन्धित प्रकति वादों की 06 पत्रावलियों निस्तारण किया। 

Friday, October 17, 2014

निर्वाचक नामावलियों का पुनरीक्षण 15 अक्टूबर से

उप जिला निर्वाचन अधिकारी ने अवगत कराया है कि भारत निर्वाचन आयोग ने अहर्ता तिथि 01.1.2015 के आधार पर प्रदेश के समस्त विधान सभा क्षेत्र निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण कराए जाने के निर्देश दिये गये हैं जिसके अंतर्गत निर्वाचक नामावलियों का आलेख्य प्रकाशन 15 अक्टूबर को कराया जायेगा। दावे और आपत्तियां 10 नवम्बर तक प्राप्त की जायेंगी।
 ग्राम सभा, स्थानीय निकायों और रेजिडेन्ट वेलफेयर एसोसिएशन आदि की बैठकों में फोटोयुक्त नामावलियों को 17 अक्टूबर से 30 अक्टूबर तक पढ़कर नामों का सत्यापन कराया जायेगा। मान्यता प्राप्त राजनेतिक दलों के बूथ लेविल एजेंटों के साथ समस्त पदाभिहित स्थानों पर दावे और आपत्तियां प्राप्त करने के लिए विशेष अभियान के अंतर्गत 19 अक्टूबर तथा 2 नवम्बर, 2014 निर्धारित किए गये हैं। फोटोयुक्त निर्वाचक नामावलियों का अंतिम प्रकाशन 5 जनवरी 2015 को कराया जायेगा।

Saturday, August 9, 2014

शुभ नक्षत्र और वार के प्रभाव से विशेष फलदायी होगा रक्षा बंधन का पर्व 
श्रवण मास की पूर्णिमा तिथि को भाई-बहिनो के स्नेह और प्रेम का प्रतीक रक्षा बंधन का पर्व धर्म एवं वर्ग के भेद-भाव से परे सभी वर्णों के लोगों के द्वारा मनाया जाता है। रक्षा बंधन का धार्मिक और पौराणिक महत्त्व है।  भविष्य पुराण के अनुसार श्रावण मास की पूर्णिमा के दिन प्रातः काल में नित्य क्रिया से निवृत्त होने के बाद श्रुति-स्मृति विधि से स्नान करके देवताओं और पितरों का निर्मल जल से तर्पण करना चाहिए तथा वेदपाठी ब्राह्मणों के रक्षा सूत्र बांधकर उन्हें दान आदि देकर उनका आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। भगवान श्री कृष्ण ने भी रक्षा बंधन के पर्व की महत्ता को बताते हुए कहा है कि विधि-विधान से मनाया गया यह पर्व  विजय,सुख, पुत्र, आरोग्य और धन लाभ कराता है।
श्रवण मास की पूर्णिमा सभी वर्णों के लिए शुभ मानी गयी है। जिस दिन पूर्णिमा उदय काल में 6 घड़ी से अधिक हो, उस दिन भद्रारहित काल में रक्षा बंधन पर्व को मनाया जा सकता है। इस वर्ष 10 अगस्त को रविवार के दिन रक्षा बंधन पर्व मनाया जाएगा। इस दिन भद्रा काल दिन में 1 बजकर 21 मिनट तक है। इसलिए इस बार रक्षा बंधन पर्व पर बहनें भद्राकाल समाप्त होने के बाद ही अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बाँधेंगी।
वार और नक्षत्र के विशेष संयोग से शुभ और सिद्ध योग बनता है , ऐसा ज्योतिष शास्त्रियों का मानना है। रक्षा बंधन पर्व इस बार रविवार के दिन पड़ रहा है। रक्षा बंधन पर्व सदैव श्रवण नक्षत्र में ही मनाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार श्रवण नक्षत्र के स्वामी चन्द्रदेव हैं जबकि रविवार का दिन भगवान सूर्यदेव से जुड़ा है। सूर्यदेव को समस्त ग्रहों में सर्वाधिक शक्तिशाली माना गया है। इसी प्रकार सूर्यदेव से चन्द्रदेव को प्रकाश भी प्राप्त होता है। लेकिन इसकी बावजूद दोनों की प्रकृति में बहुत अंतर है।  सूर्यदेव गर्म प्रकृति के हैं तो चन्द्रदेव की प्रकृति अत्यंत शीतल है। इसके बाद भी दोनों में मित्रता है। जहां सूर्यदेव ज्ञान, विवेक, यश, सामान, सौख्य और समृद्धि के प्रदाता हैं, वहीँ चन्द्रदेव जीवन में सौम्यता, शान्ति और शीतलता प्रदान करते हैं।
रविवार के दिन रक्षा बंधन पर्व को मनाना विशेष फलप्रद हो सकता है। क्योंकि इस बार रक्षा बंधन पर सूर्यदेव और चन्द्रदेव, दोनों ही शुभ प्रभाव देने वाले होंगें। इसके अलावा 10 अगस्त रक्षा बंधन को 8 घंटा 2 मिनट से 23 घंटा 54 मिनट तक यग्योजय योग भी पड़ रहा है। इस योग में किया गया प्रत्येक शुभ कार्य विशेष फलीभूत होता है। इस दृष्टि से इस बार रक्षा बंधन का पर्व समस्त भाई और बहनों के लिए विशेष महत्त्व रखता है।  पूर्ण श्रद्धा भाव के साथ इस अवसर पर किया गया कार्य सभी के लिए अवश्य ही सफल होगा।
रक्षा बंधन के पर्व पर श्रवण कुमार की पितृ भक्ति को भी याद किया जाता है और उनके माता-पिता सहित उनका पूजन करके उनसे आशीर्वाद लिया जाता है।
यह पर्व धार्मिक और पौराणिक महत्त्व के साथ-साथ ऐतिहासिक महत्त्व भी रखता है। ऐतिहासिक तथ्यों के अनुसार एक हिन्दू रानी ने अपने स्वाभिमान की रक्षा के लिए एक मुस्लिम शासक को रक्षा सूत्र भेजा। साम्प्रदायिक सौहाद्र की मिसाल कायम रखते हुए मुस्लिम शासक ने भी उस हिन्दू बहिन को उसकी रक्षा करने का विश्वास दिलाया।
रक्षा बंधन पर्व को मनाने का उद्देश्य भाई-बहिन के पवित्र रिश्ते की मर्यादा को बनाए रखने के साथ-साथ अपनी प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परम्पराओं को आने वाली पीढ़ी तह पहुंचाना है। तो आइये हम सब इस पर्व के मर्म को समझे और निहित स्वार्थ और धन लिप्सा का त्याग करके रक्षा बंधन के पर्व पर स्नेह और प्रेम की वर्षा करें। -- ज्योतिषविद प्रमोद कुमार अग्रवाल, आगरा 

Thursday, July 17, 2014

इंटरनेशनल ज्योतिष वास्तु महासम्मेलन दिल्ली में

इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ़ एस्ट्रो वास्तु रिसर्च [ रजिस्टर्ड ], ऊधमसिंह नगर, उत्तराखंड के प्रख्यात ज्योतिषविद डॉक्टर शुभोद्युती कुमार मंडल द्वारा दी गयी जानकारी के अनुसार सितम्बर, 2014 माह में अंतर्राष्ट्रीय स्तर का एक ज्योतिष महासम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। सम्मलेन में भाग लेने वाले प्रत्येक सदस्य ज्योतिषविद को उनकी ज्योतिष और वास्तु के क्षेत्र में योग्यता, अनुभव और ज्ञान के अनुसार ज्योतिष सम्राट, ज्योतिष सागर, ज्योतिष महर्षि, ज्योतिष दैवज्ञाचार्य, ज्योतिष श्री, वास्तु रत्न, वास्तु शिरोमणि, हस्तरेखा शास्त्री, अंक शास्त्री, लाल किताब शास्त्री आदि उपाधियों के साथ-साथ टॉप टेन इंटरनेशनल अवार्ड गोल्ड मेडल, प्रमाण-पत्र और मानद उपाधि से सम्मानित किया जाएगा। ज्योतिष महासम्मेलन में सहभागिता निभाने के इच्छुक ज्योतिषविद डॉक्टर मंडल से मोबाइल नंबर : 09568895555 पर अपना नाम, पता और ईमेल एसएमएस करके संपर्क कर सकते है। 

Wednesday, July 16, 2014

ज्योतिष और वास्तु टिप्स
++ किचन अर्थात रसोईघर में गैस का चूल्हा या खाना पकाने का स्टोव सदैव आग्नेय कोण [दक्षिण-पूर्व दिशा] में ही रखना चाहिए।
++ किचन में अनाज का भंडारण करना हो तो उसके लिए आग्नेय कोण और ईशान कोण [उत्तर-पूर्व दिशा] के बीच में पूर्वी दीवार के पास भंडारण करना उचित रहता है।
++ किचन में पूजा स्थल या मंदिर नहीं बनवाना चाहिए।
++ किचन में पानी का स्त्रोत और अग्नि से संबन्धित गैस चूल्हा को पास-पास नहीं रखना चाहिए।
++ किचन में भोजन पकाते समय पूर्व या उत्तर दिशा में मुख रहना चाहिए। 

Monday, May 5, 2014

विधिक साक्षरता शिविर सम्पन्न

   माननीय जिला जज विजय प्रताप सिंह के निर्देशन में गत मई दिवस के अवसर पर मै0 अनिल पेण्ट्स फाउन्ड्रीनगर आगरा में श्रमिको हेतु एक विधिक साक्षरता/जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें मीडियेटर लक्ष्मीचंद बंसल एवं अधिवक्ता फरहत अली के साथ अनिल अग्रवाल, रोहित अग्रवाल एवं श्रमिकों ने भाग लिया।
     कार्यक्रम में  विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव एवं अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मुमताज अली ने जिला प्राधिकरण द्वारा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों-लोक अदालत, प्री लिटिगेशन लोक अदालत, एड क्लीनिक की जानकारी दी तथा मीडियेशन सेण्टर की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तृत से जानकारी दी। उन्होंने श्रमिको को अपने विवाद सुलह समझौते से निस्तारित कराये जाने के सम्बन्ध में विभिन्न नियमों से भी अवगत कराया ।

जायरीनो को किसी प्रकार की समस्या न हो-एडीएम सिटी

   जायरीनों को जनपद में किसी प्रकार की समस्याआ न हो इसके लिए अपर जिलाधिकारी नगर प्रेम पाल सिंह ने औचक निरीक्षण किया उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा कराये जा रहे कार्यो की समीक्षा की। उन्होंने जायरीनों के ठहरने के लिए बनाने जा रहे  पाण्डालों, उनमें  समुचित प्रकाश व्यवस्था,  बारिस आने पर पानी पाण्डालांे के अन्दर न जाने पाये। शौचालय तथा स्नानग्रह पूर्व निर्धारित स्थानों पर बनवाने तथा पानी निकासी की समुचित व्यवस्था आदि कार्यो का निरीक्षण किया । कोठी मीना बाजार पूर्ण परिसर के साथ ही आस-पास साफ-सफाई सुनिश्चित करायें जाने,  पाण्डालों में फर्श, कुर्सी, मेज, पंखा, पेडस्टल फेन की व्यवस्था ,सुरक्षा की दृष्टि से कोठी मीना बाजार पर अस्थाई पुलिस चैकी स्थापित कराने, ट्रैफिक व्यवस्था सुचारू रूप से कराने, विद्युत कटौती पर जनरेटर व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिये। पेयजल व्यवस्था के लिए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल संस्थान को निर्देश दिये । जायरीनों को  गेहॅू चावल, चीनी बाजार भाव से तथा मिट्टी का तेल कन्ट्रोल रेट से उपलब्ध कराने के भी उन्होंने निर्देश दिये।
उन्होंने बताया कि कोठी मीना बाजार में अस्थाई रूप से एक स्वास्थ्य केन्द्र खोला जायेगा, जिसमें राउण्ड वार डाक्टरों की ड्यूटी लगायी जायेगी। स्वास्थ्य केन्द्र में सभी आवश्यक दवांए तथा एम्बुलेंस भी उपलब्ध रहेगी। निरीक्षण के समय उनके साथ अपर नगर मजिस्ट्रेट , सीओ0 लोहामंडी, थानाध्यक्ष शाहगंज आदि अनेक अधिकारी उपस्थित थे। 

Friday, April 25, 2014

NHRC notice to SSP, Barabanki, UP on alleged police inaction in a case of gang rape

          The National Human Rights Commission has taken suo motu cognizance of a media report that no FIR had been registered in a case of gang rape in Haidergarh area of Barabanki District in Uttar Pradesh on the 13th April, 2014.
          Reportedly, the incident happened at the behest of a woman who, dissatisfied with the jail sentence to the rapist of her teenage daughter, conspired to avenge her daughter’s trauma by meting out the same fate to the wife of her daughter’s tormentor.  The four alleged culprits also included the father of the girl.  The victim of sexual assault was found in a critical condition by villagers on the roadside and was admitted to a nearby medical facility.


          The Commission has observed that the contents of the press report, if true, amount of serious violation of human rights of the victim.  It has issued notice to the Senior Superintendent of Police, Barabanki calling for a report in the matter within four weeks.

Monday, April 21, 2014

मतदान करना हमारा राष्ट्रीय दायित्व है

 लोकतंत्र प्रणाली का मूलभूत आधार प्रत्येक नागरिक को बिना किसी भेदभाव के मिला मताधिकार है और इस अधिकार के सदुपयोग से हम शासन की नीति निर्माण में न केवल अपनी प्रत्यक्ष उपस्थिति दर्ज करातें है अपितु इसके माध्यम से हम अपनी आवश्यकताओं और जरूरतों के अनुरूप आवश्यक परिवर्तन भी करते है। इसलिए यह आवश्यक है कि संविधान द्वारा प्रदत्त मताधिकार का हम प्रथम प्राथमिकता के आधार पर प्रयोग करके हम अपने राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन करें।
     उक्त विचार आकांक्षा समिति की अध्यक्षा संगीता भटनागर ने सदर बाजार में आंकाक्षा समिति एवं फ्रेन्डेशन आफ ट्रैबल एशोसियन के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित मतदाता जागरूकता मिशन की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किये। उन्होंने आशा व्यक्त की कि जागरूक मतदाता इस राष्ट्रीय पर्व पर हर हाल में मतदान के लिए समर्पित रहेगा। उन्होंने उपस्थित जनता एवं नये वोटरों को मतदान करने के पश्चात अन्य कार्य करने का आह्वान  किया और कहा आगरा में मतदान की अधिकाधिक प्रतिशत होनी चाहिए। उन्होंने उपस्थित पुलिस महानिरीक्षक आगरा जोन से महिलाओं की सुरक्षा, एवं अन्य मतदान से सम्बन्धित प्रश्न कर जनता को विशेष जानकारी भी दिलाई। 
     इस अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक आशुतोष पाण्डेय ने कहा कि मतदान केन्द्र को पूर्णरूप से सुरक्षित किया गया है साथ पैरा मिलिट्री फोर्स, पुलिस के आदि तैनात है इसके अतिरिक्त क्षेत्रों में पुलिस और मजिस्ट्रेट पैट्रोलिंग करते रहेगें। 
     उन्होंने मतदाता लाइन में खड़े होकर वोट डालने पर कहा कि इससे समानता की भावना बलवती होती है जिस लाइन में बडे़ से बड़ा व्यक्ति खड़ा होता है उसी में छोटे से छोटा व्यक्ति भी खड़ा होता है जो हमारे लोकतंत्र का प्रतीक है। 
     कार्यक्रम में संयुक्त मजिस्ट्रेट जसजीत कौर छावनी के उपाध्यक्ष पंकज महेन्द्रू एवं उनकी पत्नी रेनू महेन्द्रू  आकांक्षा समिति की सुभाषनी पालीवाल, बीना पोद्दार, शैल बाला अग्रवाल, सरोज प्रशान्त, नीलिमा पाटनी के साथ नये वोटरो ने दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। 
      कार्यक्रम में डिम्मी मिश्रा द्वारा सेठ बांके लाल, शीतल चैहान द्वारा गीत, एवं शैल बाला द्वारा कविता,  एवं राजीव तिवारी और देवाशीष भौमिक द्वारा अपने विचार व्यक्त किये । कार्यक्रम का संचालन गजल गायक सुधीर नारायण एवं सुशील सरित ने किया।  
     इस अवसर पर हिमांशु सचदेवा, बिल्लू चैहान, राजू महाजन, चन्द्र प्रकाश तिवारी संजीव अरोरा , अमित दीक्षित उमेश अग्रवाल, गजल गायक शारदा शर्मा के साथ अनेक गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया ।  

Monday, April 14, 2014

मेगा लोक अदालत में 10446 वादों का निस्तारण

जनपदीय न्यायाधीश विजय प्रताप सिंह के कुशल निर्देशन में लोक अदालत में दीवानी न्यायालयों, प्री लिटिगेशन, तहसील में लोक अदालत एवं राजस्व न्यायालयों द्वारा कुल 10446 वादों का निस्तारण किया गया।  12 अप्रैल, 2014 की मेगा लोक अदालत में जिला जज द्वारा 08 वादों का निस्तारण किया गया जिसमें एफ.डी.आर. धनराशि रू0 4500/- एवं प्रतिकर राशि रू0 4,74,381/- सम्मिलित है। इसके अतिरिक्त विभिन्न न्यायालयों द्वारा 09 मोटर दुर्घटना के प्रतिकर वादों का निस्तारण किया गया । लोक अदालत में अपर जिला जज न्यायालय स्तर के न्यायिक अधिकारीगण द्वारा कुल 136  प्रकीर्ण वादों, सिविल अपीलों एवं क्रिमिनल अपीलों का निस्तारण किया गया ।
      अपर जिला जज जितेन्द्र कुूमार सिंह द्वारा 14 वादों में 13 लाख रूपये की प्रतिकर धनराशि, इश्त्यिाक अली द्वारा 645 वाद, विशेष जज आर्थिक अपराध अशोक कुमार मिश्रा के द्वारा आर्थिक अपराध के 184 वाद, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय, सुदीप कुमार बनर्जी  के द्वारा कुल 85 वादों  निस्तारित किया गये जिसमें 19 वाद गुजाराभत्ता एवं 66 अन्य वैवाहिक वाद सम्मलित है। सी.जे.एम. खलीकज्जुमा द्वारा 6001 वाद, अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रेलवे तबरेज अहमद द्वारा 1426 वादों का निस्तारण किया गया । 
     सिविल जज (सी.डि.) चन्द्र प्रकाश तिवारी  के द्वारा कुल 14 वादों का निस्तारण किया गया है जिसमें उत्तराधिकार के 07 मामलों में धनराशि रू0 12,04,837/-है। इसके अतिरिक्त लोक अदालत में सिविल के कुल 34 मामलों का निस्तारण किया गया ।  दीवानी परिसर में प्रीलिटिगेशन लोक अदालत का भी आयोजन किया गया जिसमें केनरा  बैंक, एवं एच.डी.एफ.सी. बैंक , ओरियण्टल बैंक आॅफ कामर्स एवं स्टेट बैंक आॅफ पटियाला के बैंक ऋण से सम्बन्धित कुल 121 मामलों का भी निस्तारण किया गया । 
      इसी प्रकार जिला जज के निर्देशानुसार जनपद की समस्त तहसीलों मे आज लोक अदालत का आयोजन किया गया जिसमें राजस्व के 266 वाद एवं फौजदारी के 84 वाद कुल 350 मामलों का निस्तारण किया गया । आज की इस अवसर पर जिला जज के निर्देशानुसार आज कलेक्ट्रेट पर में किशोर न्यायालय में किशोर न्याय बोर्ड द्वारा बाल अदालत का आयोजन किया जिसमें कुल दो वादों का निस्तारण हुआ । बाल अदालत में किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट/ जे.एम. द्वितीय सुश्री सुनीता सिंह नागौर, सदस्यगण सुश्री मंजू पंवार एवं नेत्रपाल सिंह उपस्थित थे। (न्यूज़लाइन आगरा समाचार)

Saturday, April 12, 2014

Aasraa Trust observed the International Day for Street Children

Aasraa Trust observed the International Day for Street Children at Gandhi Park in Doon, on 11th April, 2014

The trust involved over 250 street children in the one hour program and made the day special for them. Mr.Ajay Setiya, Chairperson, State Commission for Protection of Child Rights, Uttarakhand, a special invitee, confirmed all street children would be given ‘adhaar cards’.

The children who have been a part of Aasraa Trust put up a show for the visitors and guests the highlights were the play ‘Hum Bhi Hain’ conceptualized by Neelu Khanna. The recitation of the poem ‘Kitabein’ by Suresh was well appreciated. The programme ended with the audience joining the children in an impromptu dance to the beats of ‘Jai Ho’.

A vote of thanks was presented by Shaila Brijnath in which she thanked the District Administration, Mr.Ajay Setiya, Chairperson, State Commission for Protection of Child Rights, Uttarakhand, Plan India, SBMA for lending their support for the event; NIOS Director, Mr.P Rawat; Doon Shelter Society; doctors and hospitals Sakya, Indresh & Doon,  that have consistently given free medical care for the children, the leading day & residential schools of Doon that have supported Aasraa; donors and volunteers.

International Day for street children gives children a platform to speak about the issues that affect them. The Consortium for Street Children is a global network that raises street children’s voice, promotes their rights and improves their lives. CSC is currently seeking support for International Day for Street children to be adopted by the United Nations. It may be noted that it is the fourth year that this is being celebrated. In 2013, 132 countries took part on the day.

 Aasraa Trust, established 2009, with over 500 children, works for the education and empowerment of street & slum children. The organization crafted a cyclical approach, first reaching out to children in the slums through their outreach programs. Classes are conducted within the neighborhoods and once the children achieve an elementary level, Aasraa helps to mainstream them into formal schools by providing scholarships that pay their school fees and living costs. Children above the age of 14 are also taught block printing & sewing.
Aasraa Trust is the 1st organization working with street children to receive accreditation as an examination centre of the National Institute of Open Schooling (NIOS). This will benefit the street children age barred from entering main stream schools.
The International Day for Street Children in Dehradun is being supported by Plan India and SBMA.

SBMA is an independent organization that works with the people of Uttarakand Himalayas.  It works on a simple mission of ‘Happy child’.

“Plan India is an Indian NGO working to improve the lives of disadvantaged children, their families and communities through an approach that puts children at the centre of community development. Plan India helps lasting improvement to the lives of vulnerable children and their communities. It also helps girls overcome the disadvantages and discrimination they face. We are committed to the principles of child rights and equality,” explained,” said Suresh Balodi, StateManager, Uttarakhand, Plan India.

Others present on the occasion were Meena Rajbir Singh, Director NIOS Mr.Rawat, Deputy Director, Sandhya Kumar, Anita Sehgal, Hopetown School, Ranjit & Veena Sikund, Ms.Meenakshi Gandotra, Principal, Jaswant Modern, as well as students of Olympus High School, St.Joesph’s Academy, Patrician College & Jaswant Modern School. (Newsline Agra)

व्यय लेखा के निरीक्षण हेतु प्रत्याशी स्वयं उपस्थित हों

   लोक सभा सामान्य निर्वाचन 2014 हेतु 18 आगरा लोकसभा एवं 19 फतेहपुर सीकरी लोकसभा के निर्वाचन के लिए अभ्यर्थियों के दैनिक निर्वाचन व्यय लेखों का निरीक्षण व्यय प्रेक्षकों द्वारा निर्धारित तिथि के अनुसार किया जायेगा। जिसके लिए प्रत्याशियों को स्वयं उपस्थित होना होगा अथवा विशेष परिस्थियों में अपने वास्तविक एजेन्ट जिसका फोटोयुक्त प्रमाण पत्र हो को  कलेक्टेªट स्थित सभागार मंे निर्धारित तिथियों के अनुसार  व्यय प्रेक्षक के समक्ष उपस्थित होना आवश्यक है । प्रभारी अधिकारी व्यय लेखा/मुख्य कोषाधिकारी डा0 अमर सिंह ने बताया कि प्रत्याशियों के आय व्यय के निरीक्षण निर्धारित कार्यक्रम के अन्तर्गत 18 आगरा लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशियों का प्रथम निरीक्षण 12 अप्रैल को, द्वितीय निरीक्षण 16 अप्रैल तथा तृतीय निरीक्षण 21 अप्रैल को प्रथम पाली प्रातः10 बजे से अपरान्ह 01 बजे तक तथा द्वितीय पाली अपरान्ह 02 बजे से संाय 05 बजे तक किया जायेगा।  इसी प्रकार 19 फतेहपुर सीकरी लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशियों के व्यय लेखा का प्रथम निरीक्षण 12, अप्रैल, द्वितीय निरीक्षण 16, अप्रैल, तृतीय निरीक्षण ,21, अप्रैल 2014 को व्यय प्रेक्षकगणों द्वारा किया जायेगा। उन्होंने बताया कि अधिक जानकारी के लिए कलेक्ट्रेट स्थित उनके कार्यालय से सम्पर्क किया जा सकता है।

14 अप्रैल को सभी तथा 15 अप्रैल को शोभा यात्रा मार्ग में शराब की दुकान बन्द रहेगीं

     जिला मजिस्टेट मनीषा त्रिघाटिया ने डा0 भीमराव अम्बेडकर जयन्ती के अवसर पर 14 अप्रैल केा जनपद के समस्त आबकारी अनुज्ञापन की पूर्ण बन्दी रहेगी तथा 15 अप्रैल को  शोभा यात्रा मार्ग के अन्तर्गत  टंडन मार्केट,छीपीटोला, शाहगंज, नगला तेजा, शाहगंज बोदला रोड, बोदला चैराहा, की देशी शराब की दुकान एवं  टंडन मार्केट,छीपीटोला, कलेक्ट्रेट चैराहा, शाहगंज, भोगीपुरा, शाहगंज बोदला रोड, मारूति स्टेट, बोदला चैराहा, दहतौरा मोड, स्थित विदेशी शराब की दुकानें,  चक्कीपाट, छीपीटोला कलेक्ट्रेट रूई की मण्डी, भोगीपुरा शाहगंज बोदला रोड, मारूति स्टेट , बोदला चैराहा, दहतौरा मोड स्थित  बीयर की दुकान , प्रतापपुरा एवं खेरिया मोड स्थित माॅडल शाॅप, प्रिंस संजय, बंगाल लाॅज, प्रेसीडेन्ट, ख्याति, खैबर बार,  एवं शिवाजी मार्केट, छीपीटोला , बोदला चैराहा स्थित की भांग की दुकाने बन्द रहेगी । 

Thursday, April 10, 2014

मीडिया संस्थानों से संतुलित समाचार प्रकाशन की अपील

   लोक सभा सामान्य निर्वाचन-2014 में प्रत्याशियों और राजनैतिक दलों की ओर से संदिग्ध पेड न्यूज पर निगाह रखने तथा बिना पूर्वानुमति के इलैैक्ट्रानिक मीडिया पर विज्ञापन से प्रचार करने के मामलांे में दो स्थानीय केबिल नेटवर्क को नोटिस दिया गया है तथा एक स्थानीय हिंदी दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर को पेड न्यूज की श्रेणी में मानते हुए आवश्यक कार्यवाही किए जाने की संस्तुति की गई है।
    यह जानकारी अपर जिलाधिकारी (नगर)/ प्रभारी  अधिकारी, आदर्श आचार संहिता, आगरा प्रेम प्रकाश पाल ने देते हुए बताया कि स्थानीय केबिल नेटवर्क पर आदर्श समाज पार्टी, आगरा लोक सभा क्षेत्र के विज्ञापन का प्रसारण बिना मीडिया सर्टीफिकेशन एवं मानीटरिंग समिति (एमसीएमसी) के संज्ञान में लाकर किया जा रहा था जिस पर इन दोनों चेनल्स को कारण बताओ नोटिस दिया गया है तथा उनसे प्रसारित सामग्री की विषय वस्तु तथा उस पर होने वाले व्यय का विवरण भी मांगा गया है। इसी प्रकार एक स्थानीय हिंदी दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार को पेड न्यूज की श्रेणी में मानते हुए फतेहपुर सीकरी लोक सभा क्षेत्र से राष्ट्रीय लोकदल-कांग्रेस प्रत्याशी तथा संबंधित समाचार पत्र को कारण बताओ नोटिस दिया गया है।
    उल्लेखनीय है कि चुनाव आयोग के निर्देश पर आगरा के दोनों संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों पर मीडिया में हो रहे कवरेज, पेड न्यूज के मामलों तथा इलैक्ट्रानिक एवं अन्य माध्यमों को इस हेतु गठित मीडिया सर्टीफिकेशन एवं मानीटरिंग समिति (एमसीएमसी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है और ऐसे प्रकाशन या प्रसारण पर आयोग के निर्देशों तथा मानकों के अनुरूप कार्यवाही न होने पर संबंधित संस्थान व प्रत्याशी के विरूद्ध सुसंगत प्राविधानों के अंतर्गत कार्यवाही की जा रही है।
    अपर जिलाधिकारी नगर ने सभी इलैक्ट्रानिक मीडिया संस्थानो ंसे अपील की है कि वह बिना मीडिया सर्टीफिकेशन एवं मानीटरिंग समिति (एमसीएमसी) के संज्ञान में लाये हुए किसी प्रत्याशी या दल के विज्ञापनों का प्रसारण न करें तथा प्रिंट मीडिया भी आयोग के निर्देशानुसार आदर्श आचार संहिता का पालन करते हुए संतुलित समाचारों का प्रकाशन करें। समिति द्वारा प्रतिदिन इस प्रकार के मामलों की गहराई से जांच की जा रही है और दोषी पाये जाने पर निश्चित रूप से आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।